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आलोक वर्मा को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत, सीबीआई निदेशक पर बने रहेंगे, नीतिगत फैसले लेने पर रोक
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आलोक वर्मा को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत, सीबीआई निदेशक पर बने रहेंगे, नीतिगत फैसले लेने पर रोक

नई दिल्ली, 7 दिसंबर, न्यूज़ मंच, सीबीआई बनाम सीबीआई मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। न्यामूर्ति संजय किशन कौल ने सरकार के आदेश के खिलाफ अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को हटाने से पहले सेलेक्ट कमेटी से सहमति ली जानी चाहिए थी। कोर्ट ने केंद्र के फैसले को पलटते हुए आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने का आदेश निरस्त कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले सो आलोक वर्मा को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट के इस फैसले का मतलब यह हुआ वह सीबीआई निदेशक के पद पर बने रहेंगे पर बने रहेंगे। सुप्रीम फैसले के बाद आलोक वर्मा के वकील ने कहा हमें कोर्ट पर पूरा भरोसा था। फैसले ने साबित कर दिया कि जब तक देश में स्वतंत्र न्याय प्रणाली है, तब तक किसी के साथ कुछ भी गलत नहीं हो सकता। उन्होंने कहा सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला वास्तव में संवैधानिक संस्थाओं की जीत है। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा आलोक वर्मा अभी नीतिगत फैसले नहीं लेंगे, सिर्फ सीबीआई का रोजाना का कामकाज देखेंगे। कोर्ट ने कहा आलोक वर्मा पर लगे आरोपों के आधार पर हाई पावर कमेटी एक सप्ताह के भीतर फैसला लेगी। 

हाई पावर सेलेक्ट कमेटी करेगी फैसला
अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार को कानून के तहत सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने का कोई अधिकार नहीं है। यह अधिकार केवल सेलेक्ट कमेटी के पास है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई पावर सेलेक्ट कमेटी में प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और लोकसभा में नेता विपक्ष होंगे। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह कमेटी एक हफ्ते के भीतर वर्मा पर कार्रवाई पर फैसला ले। इस दौरान आलोक वर्मा कोई भी नीतिगत फैसला नहीं लेंगे। कोर्ट ने ये भी कहा कि आगे से ऐसे बड़े मामलों में उच्च स्तरीय कमेटी ही फैसला करेगी।

वर्मा की याचिका पर आया फैसला
उल्लेखनीय है कि सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा ने पूर्व संयुक्त निदेशक राकेश अस्थाना के साथ विवाद के चलते शक्तियां छीने जाने और छुट्टी पर भेजने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। यह फैसला उसी याचिका पर आया है। अस्थाना और वर्मा के बीच भ्रष्टाचार को लेकर छिड़ी जंग के सार्वजनिक होने के बाद केंद्र की मोदी सरकार ने दोनों अधिकारियों को छुट्टी पर भेज दिया था।

23 अक्टूबर को भेजा था अवकाश पर  
वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच छिड़ी जंग सार्वजनिक होने के बाद सरकार ने पिछले साल 23 अक्टूबर को दोनों अधिकारियों को उनके अधिकारों से वंचित कर अवकाश पर भेज दिया था। दोनों अधिकारियों ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। इसके साथ ही केंद्र ने ब्यूरो के संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को जांच एजेंसी के निदेशक का अस्थायी कार्यभार सौंप दिया था।

6 दिसंबर को पूरी हो गई थी सुनवाई  
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई, संजय किशन कौल और केएम जोसेफ की पीठ ने पिछले साल छह दिसंबर को याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली थी। पीठ ने वर्मा, केंद्र सरकार, केंद्रीय सतर्कता आयोग और अन्य की दलील सुनने के बाद कहा था कि इस पर फैसला बाद में सुनाया जाएगा। कोर्ट ने गैर सरकारी संगठन कॉमन कॉज की याचिका पर भी सुनवाई की थी। इस संगठन ने न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल से राकेश अस्थाना सहित जांच ब्यूरो के तमाम अधिकारियों के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कराने का अनुरोध किया था।

सीवीसी को सौंपी गई थी जांच
न्यायालय ने जांच ब्यूरो की गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से केंद्रीय सतर्कता आयोग को कैबिनेट सचिव से मिले पत्र में लगाए गए आरोपों की जांच दो सप्ताह के भीतर पूरी करके अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सौंपने का निर्देश दिया था। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश एके पटनायक को सीवीसी जांच की निगरानी का जिम्मा सौंपा गया था।

कांग्रेस ने कहा- सरकार को बड़ा सबक
सीबीआइ विवाद में सुप्रीम फैसले पर कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने सरकार को बड़ा सबक सिखाया है। आलोक वर्मा के पास राफेल की फाइल आने वाली थी इसलिए केंद्र सरकार ने जल्दबाजी में उनको हटाने का फैसला लिया। सुप्रीम कोर्ट का फैसला अहम और राष्ट्रहित में है।

केजरीवाल ने राफेल से जोड़ा केस
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा मोदी सरकार ने देश की सभी संस्थाओं को बर्बाद कर दिया है। केजरीवाल ने सवालिया लहजे में कहा कि क्या राफेल घोटाले की जांच रोकने के लिए कोर्ट ने आधी रात को सीबीआई डायरेक्टर को नहीं हटाया? अब कोर्ट का यह फैसला राफेल में भ्रष्टाचार की संभावना को नई दिशा देगा।

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