
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच बीते करीब 7 महीनों से लद्दाक में सीमा विवाद चल रहा है। इसे लेकर कई दौर की बैठके हो चुकी है लेकिन अब तक दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन पाई है। इस बीच चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ जनरल बिपिन रावत ने कहा कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास हालात तनावपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि हमारा रुख स्पष्ट है, हम लाइन ऑफ एक्चुएल कंट्रोल में कोई बदलाव स्वीकार नहीं करेंगे।
जनरल रावत ने कहा, चीन की पीएलए लद्दाख में अपने दुस्साहस को लेकर भारतीय बलों की मजबूत प्रतिक्रिया के कारण अप्रत्याशित परिणाम का सामना कर रही है। उन्होंने कहा, सीमा पर झड़पों और बिना उकसावे के सैन्य कारवाई के बड़े संघर्ष में तबदील होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं पाकिस्तान के बारे उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पाक के लगातार छद्म युद्ध और भारत के खिलाफ दुष्ट बयानबाजी के कारण भारत और पाकिस्तान के संबंध और भी खराब हो गए हैं।
गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में पिछले करीब 7 महीनों से तनातनी का माहौल है। दोनों तरफ से बड़ी तादाद में सेना की तैनाती लगातार बनी हुई है। लद्दाख की ऊंची चोटियों पर सेना के जवानों की तैनाती है। इन सैनिकों को अब भीषण ठंड का भी मुकाबला करना पड़ रहा है। चीन ने कुछ इलाकों से हथियार और टैंक वापस लेने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि सभी विवादित इलाकों से चीनी सेना की पूरी तरह वापसी चाहता है।
भारत ने फिर दोहराया है कि भारत शांति प्रिय देश है लेकिन ये अपनी संप्रभुता और अखंडता के लिए किसी भी तरह की कुर्बानी देने के लिए तैयार है। आज पूर्वी लद्दाख के चुशूल में दोनों देशों के बीच सैन्य वार्ता चल रही है। दोनों देशों के बीच आठवीं कोर कमांडर स्तर की वार्ता सुबह 9.30 बजे शुरू हुई। पहली बार, लेफ्टिनेंट जनरल पी.जी.के. मेनन वार्ता के दौरान भारतीय सैन्य प्रतिनिधियों की अगुवाई कर रहे हैं। इससे पहले, उन्होंने दो ऐसी वार्ताओं में भाग लिया था, लेकिन प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व तत्कालीन लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने किया था।
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