
नई दिल्ली। चीनी अंतरिक्ष यान चांगई-5 (Chang'e 5) ने चंद्रमा पर उतरने के बाद अपना पहला सैंपल कलेक्ट किया। चीनी यान भारतीय समयानुसार एक दिसंबर की रात 8.45 बजे चांद की सतह पर सफलतापूर्वक उतरा। इस यान को 23 नवंबर को चीन ने चांद के लिए भेजा था। चीन का चांगई-5 रोबोटिक स्पेसक्राफ्ट चांद पर ऐसी जगह पर उतरा है जहां पहले कोई मिशन नहीं भेजा गया। यह रोबोटिक स्पेसक्राफ्ट कुछ हफ्तों के बाद धरती पर वापस आएगा। इसके साथ चांद की मिट्टी वापस लौटेगी।1976 के बाद पहली बार धरती के लोग चांद की मिट्टी देखेंगे।
चांगई-5 स्पेसक्राफ्ट में एक ड्रिलर और एक चम्मच लगा है जो चांद की सतह को खोदकर करीब 2 किलोग्राम मिट्टी और छोटे पत्थर कलेक्ट करेगा। इसका ड्रिलर चांद की सतह पर 2 मीटर की गहराई तक खुदाई कर सकता है। चांगई-5 स्पेसक्राफ्ट को 14 दिन के अंदर चांद की सतह खोदकर, उसमें से मिट्टी और पत्थर के 2 किलोग्राम सैंपल लेकर वापस धरती की ओर लौटना है। क्योंकि यह चंद्रमा की माइनस 170 डिग्री सेल्सियस वाली रात को बर्दाश्त नहीं कर पाएगा। 3 दिसंबर को एक छोटा रॉकेट लैंडर और सैंपल को लेकर वापस ऑर्बिटर से जुड़ जाएगा। हालांकि अभी तक चीन की स्पेस एजेंसी CNSA ने इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
एक बार लैंडर और मिट्टी का सैंपल ऑर्बिटर पर पहुंच गया तो फिर वो उसे वापस आने वाले कैप्सूल में डाल देगा, जो 17 दिसंबर के आसपास मंगोलिया में लैंड कर सकता है। अगर यह पूरी जटिल प्रक्रिया सही से होती है तो चीन ऐसे करने वाला दुनिया का तीसरा देश बन जाएगा। चांद की मिट्टी से खनिज, अन्य गैसों, रासायनिक प्रक्रियाओं और जीवन की संभावनाओं पर रिसर्च करने में मदद मिलेगी। साथ ही यह भी पता चलेगा कि चांद का भविष्य कैसा होगा। सबसे पहले साल 1976 में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अपोलो मिशन ने चांद की मिट्टी का सैंपल लिया था और उसके बाद सोवियत संघ ने।
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