
नई दिल्ली, 22 नवंबर, न्यूज़मंच, इंसुलिन के उत्पादन में बढ़ोतरी नहीं की गई तो अगले 12 सालों में दुनिया के चार करोड़ टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित मरीजों के लिए गंभीर संकट पैदा हो जाएगा। इस महारोग की रोकथाम के लिए जीवनरक्षक औषधि इंसुलिन आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाएगी।
खानपान में बदलाव जरूरी
अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल लैंसेट में प्रकाशित एक रिपोर्ट आगाह करती है कि यदि लोगों ने अपनी जीवनशैली और खानपान में बदलाव नहीं किया तो टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित इंसुलिन जरूरतमंदों की संख्या 2030 में 7.9 करोड़ हो जाएगी। इनमें से आधे को यह दवा सुलभ नहीं होगी। टाइप 2 पीड़ितों और इंसुलिन के जरूरतमंदों की संख्या का अनुमान लगाने के लिए डायबिटीज फेडरेशन और 14 अन्य अध्ययनों से आंकड़े जुटाए गए। सभी टाइप 2 पीड़ितों को इंसुलिन की जरूरत नहीं पड़ती है।
भारत, चीन अमेरिका में होंगे सबसे ज्यादा मरीज
2018 में दुनिया भर में इसके पीड़ितों की संख्या 40.6 करोड़ थी। 2030 में 51.1 करोड़ हो जाने का अनुमान है। इनमें से आधी से ज्यादा संख्या चीन, भारत और अमेरिका जैसे तीन देशों की होगी। धनी देशों में भी लोग इंसुलिन की किल्लत महसूस करने लगे हैं। अमेरिका में इसकी कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। वहां के सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने जांच की मांग की है। अगले 12 साल के दौरान बढ़ती आयु, शहरीकरण और खुराक में बदलाव के साथ शारीरिक गतिविधियों में कमी के चलते दुनिया भर में टाइप-2 डायबिटीज के रोगी तेजी से बढ़ेंगे।
12 सालों में 20 फीसदी बढ़ेगी मांग
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले 12 वर्षों में इंसुलिन की जरूरत 20 फीसद बढ़ जाएगी। हालांकि संयुक्त राष्ट्र का लक्ष्य है कि गैर संचारी रोगों के इलाज के साथ ही सबको डायबिटीज की दवाएं मिलना सुनिश्चित हो, लेकिन बढ़ती जरूरत से यह लक्ष्य पीछे छूटता दिख रहा है। डायबिटीज वाले व्यक्ति के रक्त में ग्लूकोज की मात्रा आवश्यकता से अधिक हो जाती है। हम जो खाना खाते हैं, वह पेट में जाकर ऊर्जा में बदलता है। उस ऊर्जा को हम ग्लूकोज कहते हैं। खून इस ग्लूकोज को हमारे शरीर के सारे सेल्स (कोशिकाओं) तक पहुंचाता है, परंतु ग्लूकोज को हमारे शरीर में मौजूद लाखों सेल्स के अंदर पहुंचाना होता है। यह काम इंसुलिन का है।
तेजी से बढ़ रहे मरीज
इंसुलिन हमारे शरीर में अग्नाशय (पैन्क्रियाज) में बनता है। इंसुलिन के बगैर ग्लूकोज सेल्स में प्रवेश नहीं कर सकता। डायबिटीज जिसे सामान्यतः मधुमेह कहा जाता है, एक ऐसी बीमारी है जिसमें खून में शर्करा का स्तर बढ़ जाता है। अमेरिका में यह मृत्यु का आठवां और अंधेपन का तीसरा सबसे बड़ा कारण बन गया है। आजकल पहले से कहीं ज्यादा संख्या में युवक और यहां तक की बच्चे भी मधुमेह से ग्रस्त हो रहे हैं। निश्चित रूप से इसका एक बड़ा कारण पिछले 4-5 दशकों में चीनी, मैदा और ओजहीन खाद्य उत्पादों में किए जाने वाले प्रयोग हैं।
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