
खजुराहो, 27 दिसंबर, न्यूज़ मंच, नेटफ्लिक्स और अमेजॉन प्राईम जैसी वीडियो स्ट्रीमिंग साइट्स का बढ़ता स्वरूप समय की मांग है, इसके बावजूद भी ‘टपरा टॉकीज’ जैसी पहल भी जरूरी है। देश में दर्शकों का एक बड़ा वर्ग अब भी ऐसा हैं, जो मल्टीप्लेक्स के टिकिट खरीदने में सक्षम नहीं है। इसलिए सिनेमा को सिंगल स्क्रीन की तरफ फिर से लौटना ही होगा। यह बात प्रसिद्ध सिने कलाकार और बुंदेलखंड मुक्ति मौर्चा के अध्यक्ष राजा बुंदेला ने एक खास मुलाकात के दौरान न्यूजमंच के रजनीश जैन से साझा की।
क्षेत्रीय सिनेमा और बुंदेलखंड को सेलुलाईड के अंतर्राष्ट्रीय पर्दे पर उभारने के लिए 4 साल पहले खजुराहो फिल्म फेस्टीवल शुरु करने की भागीरथी पहल करने वाले राजा बुंदेला ने बुंदेलखंड, सिनेमा और समाज से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय देते हुए बताया कि खजुराहो फिल्म महोत्सव सीधे आम लोगों तक पहुँचने का प्रयास करता है, इसलिए यह अनूठा है।
उन्होंने बताया कि इस फिल्मोत्सव के जरिए शुरू की गई ' टपरा टाकीज़ ' एक ऐसी ही पहल है, जो साधनहीन दर्शक को सीधे सिनेमा से जोड़ने का प्रयास करती है।
बुंदेला ने बताया कि दक्षिण भारत में लोकप्रिय इस तरह के टाकीज़ सिनेमा को समाज के आखरी छोर पर बैठे दर्शक के पास ले जाते हैं। बुंदेलखंड के विकास पर चिंता व्यक्त करते हुए राजा बुंदेला कहते हैं कि प्राकृतिक संसाधनों और दृश्यावली से संपन्न होने के बावजूद भी बुंदेलखंड विकास की बाट जोह रहा है। वे बताते हैं खजुराहो फिल्म महोत्सव के जरिए उनका प्रयास है कि बुंदेलखंड को सिनेमा की मुख्य धारा से जोड़ा जा सके। राजा बुंदेला मानते हैं कि सिनेमा से गाँव अब लगभग लुप्त हो चुके है , वे अपने प्रयासों से सिनेमा को फिर से गाँवों की ओर ले जाना चाहते हैं।
एक प्रश्न के जबाब में राजा बुंदेला कहते हैं कि देश के केन्द्र में स्थित मध्यप्रदेश जैसे राज्य में फिल्म निर्माण की संभावनाओं को तलाशने के लिए अंतर्राष्ट्रीय खजुराहो फिल्म महोत्सव की शुरुआत की गई थी। उन्होंने इस बात पर अफ़सोस जताया कि पर्यटन की असीम संभावना के बावजूद सरकारों ने बुंदेलखंड को रेल एवं हवाई मार्ग से उस तरह से नहीं जोड़ा है, जैसी की आवश्यकता है। वे यह जरूर स्वीकार करते हैं कि उनके अपने संपर्कों और संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से उन्हें इस हेरिटेज साइट को जनचर्चा में शामिल कराने में सफलता मिली है। राजा बुंदेला इस बात पर उत्साहित नजर आते हैं कि खजुराहो फिल्मोत्सव कई शौकिया फिल्मकारों की नर्सरी बन रहा है।
जानिए, समाजिक आंदोलन और सेलुलाईड के सम्मिश्रण राजा बुंदेला के बारे में:-
बुंदेलखंड की माटी में जन्मे राजा बुंदेला ने बॉलीवुड कलाकार और निर्माता-निर्देशक के तौर पर सफलता हासिल करने के बाद राजनैति एवं समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय हुए। एक तरफ उन्होंने बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा का गठन कर अलग बुंदेलखंड राज्य की स्थापना की मांग जोरशोर से उठाई। वहीं उन्होंने बुंदेलखंड यात्रा निकालकर बुंदेलखंड की समस्याओं को समझा और उनके निराकरण के प्रयास किए। सिनेमा के जरिए बुंदेलखंड को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए राजा बुंदेला खजुराहो अंतराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल से सक्रिय रुप से जुड़ गए और ठेठ बुंदेली के तौर अपनी एक अलग पहचान कायम की, वहीं बुंदेलखंड में अंतिम छोर के कलाकारों को दुनिया के सामने लाने का प्रयास किया।
पढि़ए क्या है, खजुराहो अंतराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल:-
धीरे धीरे आकार ले रहे ' खजुराहो अंतराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल ' ने इस वर्ष चौथे वर्ष में प्रवेश किया है। विश्व हेरिटेज साइट खजुराहो पर होने वाला यह अपनी तरह का पहला फिल्म समारोह है। हर वर्ष दिसंबर माह में होने वाले इस महोत्सव की निरंतरता अभिनेता निर्माता एवं सामजिक कार्यकर्ता राजा बुंदेला के अथक प्रयासों से संभव हुई है। इस समारोह में फिल्म जगत से जड़ी देश भर की नामचीन हस्तियां शिरकत करती हैं। साथ ही क्षेत्रीय सिनेमा से जुड़े नवोदित कलाकार, निर्माता-निर्देशकों के लिए भी खजुराहो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव एक बेहतर प्लेटफार्म साबित हो रहा है।
इस साल 17 दिसंबर से 23 दिसंबर तक खजुराहो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का आयोजन किया गया। फिल्मोत्सव के पहले ही दिन एक साथ 5 अलग-अलग जगहों पर बनाए गए टपरा टॉकीज में 5 बुंदेली फिल्में रिलीज की गईं। 7 दिन तक चले इस समारोह में कुल 82 फिल्में दिखाई गईं।
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