
भोपाल, 26 दिसंबर, न्यूज़ मंच, कहते हैं करने का जज्बा हो तो इंसान तूफानों का भी रूख मोड़ सकता है। कुछ ऐसा ही तूफानी अंदाज ली हुई राजस्थान की डिजाइनर रूमा देवी का जोश और जज्बे को देश और दुनिया ने सलाम किया। राजस्थान के बड़मेर सहित देशभर के ट्राइबल डिजाइनर ड्रेसेस को रैंप पर लाने वाली रूमा अब एक नाम नहीं देश की पहचान हैं।
ग्रामीण विकास चेतना मंच की हेड रूमा खुद 8वीं पास है लेकिन उनकी पहल से बड़मेर को एक नाम व पहचान मिली। रूमा के निर्देशन में बड़मेर सहित देशभर के ट्राइबल ड्रेसेस को सात देशों और भारत के कोनो कोनो में रैंप पर बड़ी बड़ी मॉडल्स द्वारा प्रदर्शित किया जा रहा है।
आदिमहोत्सव के तहत आयोजित ट्राइबल फैशन शो में रूमा अपने अंचल की ट्राइबल महिलाओं द्वारा बनी ड्रेसेस को मॉडल्स के जरिए एग्जीबिट करती हैं वहीं देश के अलग अलग आदिवासी डिजाइनर ड्रेस फार्म का भी निर्देशन करती हैं।
आदिवासी स्टालों की डिजाइनर ड्रेसेस, ज्वेलरी में की रैंप वॉक
दिल्ली के बाद भोपाल में हुए आदिमहोत्सव में रूमा के निर्देशन में लैकमे फैशन वीक और फैमिना मिस इंडिया में अपनी अदाओं का जलवा बिखेरनी वाली 20 मॉडल्स ने रैंप वॉक की। इन मॉडल्स ने भोपाल हॉट में लगे अलग अलग आदिवासी स्टालों की डिजाइनर ड्रेसेस, ज्वेलरी को पहना साथ ही कई स्टॉलस के डिजाइनर होम डेकोरेटिव आयटम को भी हाथों में लेकर रैंप वॉक की।
टॉप 20 मॉडल्स ने 10 राज्यों की आदिवासी प्रोडक्ट्स के साथ की रैंप वॉक
आदि महोत्सव में टॉप 20 मॉडल्स ने 10 राज्यों की आदिवासी प्रोडक्ट्स के साथ रैंप वॉक की जिसमें मप्र का चंदेरी, तेलंगना की मेटल ज्वेलरी,राजस्थान का एप्लिक वर्क, हिमाचल के गर्म कपड़ों में रैंप वॉक की। साथ ही इन मॉडल्स ने अलग अलग राज्यों के होम डेकोरेटिव आयटम को साथ लेकर भी उनकी ब्रांडिंग की। इस फैशन शो में किसी एक ट्राइबल प्रोडक्टस को डिसप्ले करने के बाद इन मॉडल्स के साथ डिजाइनर को भी लाया जाता है और उसके स्टॉल का नंबर व नाम अनाउंस होता है।
20 हजार आदिवासी महिलाओं को दिया रोजगार
इन मॉडल्स को कोरियोग्राफ करने वाली शो की को आर्डिनेटर रूमा देवी का कहना है कि मैंने 8वीं पास की ही थी कि मेरी शादी भारत पॉक बार्डर पर स्थित राजस्थान के बाड़मेर में कर दी गई। लेकिन लगा कि नहीं कुछ करना है। फिर मैंने देखा वहां की एक लाख आदिवासी महिलाएं एप्लिक एम्ब्रायडरी वर्क करती हैं जो राजस्थान का फैमस डिजाइनर वर्क है। मुझे लगा कि इन महिलाओं के कुछ करना होगा फिर मैंने इनमें से 20 हजार महिलाओं को लेकर डिजाइनर ड्रेसेस बनानी शुरू की और इसे प्रमोट करने के लिए ट्राइफेड के साथ कॉन्टेक्ट किया और मुझे इन ड्रेसेस को डिस्पले करने के लिए एक उम्दा मंच मिला।
लैकमे फैशन वीक में मना करने के बाद 2015 से नई शुरूआत
रूमा कहती हैं कि मैंने इन आदिवासी महिलाओं के साथ 2008 से काम शुरू किया और इसके बाद 2012 में लैकमे फैशन वीक में अनिता डोंगरे ने मेरी डिजाइनर डेÑसेस को लैकमे फैशन वीक में शामिल करने की बात कही जिसे मैंने मना कर दिया। लेकिन फिर फैशन शो देखकर लगा कि गलत किया।
10 राज्यों में आदि महोत्सव के तहत करना है ट्राइबल फैशन शो
रूमा कहती हैं कि फिर मैंने 2015 से ट्राइफेड के साथ मिलकर बड़े मंच पर मॉडल्स द्वारा इन आदिवासी अंचल की ड्रेसेस को प्रदर्शित करना आरंभ किया। जिसके अंतर्गत मुझे 10 राज्यों में आदि महोत्सव के तहत इस तरह के फैशन शो का आयोजन करना है जिसमें टॉप मॉडल्स ड्रेसेस पहनकर रैंप वॉक करेंगी और इससे ट्राइबल प्रोडक्ट लांच होंगे और आर्टिजन को पैसे भी मिलेंगे।
पहली बार मंच पर बोला तो तीन दिन तक रहा बुखार
बड़मेर जैसे पिछड़े इलाके में रहने वाली रूमा कहती हैं कि जब मैंने राजस्थान सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण पर आयोजित कार्यक्रम में मंच पर स्पीच दी मुझे तीन दिन बुखार रहा। फिर मैंने खुद को तैयार किया बाहर निकलने के लिए, लोगों से बातचीत करने के लिए जिससे मेरे भीतर का डर निकला अब मैंने भारत के अलग अलग राज्यों में फैशन शो कराने के साथ ही जर्मनी, थाइलैंड, सिंगापुर सहित सात देशों में भी देश के ट्राइबल फार्म को पेश किया है।
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