
न्यूजमंच। गुना-शिवपुरी से भारतीय जनता पार्टी के सांसद डॉ. कृष्णपाल सिंह यादव के खिलाफ मुंगावली विधायक बृजेन्द्र सिंह यादव एवं पत्रकार गिर्राज यादव ने आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की है। दरअसल, पत्रकार गिर्राज यादव ने अशोकनगर कलेक्टर को शिकायत की थी, कि सांसद केपी यादव एवं उनके बेटे सार्थक यादव ने जाति प्रमाणपत्र बनवाने के दौरान गलत जानकारी दी है। शिकायत के बाद अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) मुंगावली से जांच कराई गई, जांच में खुलासा हुआ कि जाति प्रमाण बनवाते समय भाजपा सांसद केपी यादव एवं उनके बेटे सार्थक यादव ने खुद को क्रीमीलेयर श्रेणी से बाहर बताते हुए जाति प्रमाण पत्र बनवाया था। जांच के बाद एसडीएम ने सांसद एवं उनके बेटे का जाति प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया।
एसडीएम द्वारा की गई कार्रवाई के बाद गुना सांसद डॉ केपी यादव की मुसीबतें बढ़ती नजर आ रही हैं। मुंगावली विधायक बृजेन्द्र सिंह यादव एवं पत्रकार गिर्राज यादव दोनों ही उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर सांसद डॉ. केपी यादव इस पूरे मामले को लेकर पूर्व सांसद एवं दिग्गज कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का षडयंत्र बता रहे हैं। डॉ. यादव का कहना है कि यह सिंधिया की चुनावी हार की बौखलाहट है। उन्होंने कहा कि मैंने और मेरे बेटे ने कभी भी जातिप्रमाण पत्र के आधार पर किसी भी तरह का आर्थिक लाभ नहीं लिया है।
सांसद पर है जाति प्रमाणपत्र बनवाने के दौरान गलत आय बताने का आरोप
2019 के लोकसभा चुनाव में गुना संसदीय क्षेत्र से पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं कांग्रेस के आला नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को हराकर देश भर में चर्चित हुए भाजपा सांसद डॉ. केपी यादव के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग करने वाले पत्रकार गिर्राज यादव ने आरोप लगाया है कि सांसद केपी यादव एवं उनके बेटे सार्थक यादव ने जातिप्रमाण पत्र बनवाने के दौरान गलत जानकारी एवं दस्तावेज प्रस्तुत किए थे।
22 नवंबर 2019 को गिर्राज द्वारा अशोकनगर कलेक्टर के पास की गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि डॉक्टर केपी यादव द्वारा 20 दिसंबर 2014 में पिछड़ा वर्ग का जो जाति प्रमाण पत्र हासिल किया है ,उस दौरान उन्होंने अपनी आय एक लाख रुपए से कम दर्शाई थी, जबकि डॉ. केपी यादव ने 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान दाखिल किए शपथपत्र में वित्तीय वर्ष 2014-15 में अपनी आय 4 लाख 13 हजार 7 सौ 746 रुपए एवं उनकी पत्नी श्रीमती डॉ. अनुराधा यादव की आय 4 लाख 5 हजार 3 सौ 55 रुपए बताई थी। इस तरह डॉ. केपी यादव की कुल पारिवारिक आय 8 लाख 19 हजार एक सौ एक रुपए बताई गई थी।
शिकायतकर्ता गिर्राज यादव ने आरोप लगाया कि डॉ. केपी यादव ने वित्तीय वर्ष 2013-14 में भी जो आय बताई थी, वह जाति प्रमाण पत्र बनवाने के दौरान भरी गई जानकारी से बहुत ज्यादा थी। गिर्राज यादव ने आरोप लगाया कि जाति प्रमाणपत्र बनवाने के लिए इसी तरह का फर्जीवाड़ा सांसद के बेटे सार्थक यादव द्वारा भी किया गया है। गिर्राज यादव ने सांसद के खिलाफ की गई अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि सांसद एवं उनके बेटे दोनों ने खुद को क्रीमिलेयर श्रेणी से बाहर बताते हुए जाति प्रमाण हासिल कर कई जगह आर्थिक लाभ लिया है, जबकि सांसद और उनका बेटा क्रीमिलेयर श्रेणी में होने के कारण जातिगत आरक्षण के आधार पर आर्थिक लाभ लेने की पात्रता नहीं रखते हैं।
सांसद केपी यादव ने लगाया सिंधिया पर षड़यंत्र का आरोप
भाजपा सांसद डॉ. केपी यादव ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर गुना सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया पर षड़यंत्र करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला सिंधिया की चुनावी हार की बौखलाहट का नतीजा है। उन्होंने चुनाव के समय भी मुझ पर झूठे केस बनवाए, बिना आधार पुलिस के छापे पड़वाए, अब इस तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। मुझ पर दबाब बनाने के लिए ऐसे लोगों का सहारा ले रहे हैं, जो जिलाबदर हो चुके हैं और उन पर दर्जनों केस चल रहे हैं। सांसद ने जिला प्रशासन पर भी सिंधिया के दबाब में उन्हें परेशान करने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिले में प्रशासन द्वारा प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया जा रहा है। यह शिकायत मैं संसदीय कार्यमंत्री से भी कर चुका हूं।
सांसद ने प्रशासन को घेरते हुए कहा कि मुंगावली में प्रशासन की ही देखरेख में अवैध उत्खनन हो रहा है और झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। पूरे शहर को पता है कि अशोकनगर विधायक जजपाल सिंह जज्जी को अनुसूचित जाति का न होने के बाद भी टिकिट दिया है, अब उनके मामले से ध्यान भटकाने के लिए मुझ पर इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। डॉ. यादव ने कहा कि मेरे बेटे ने इसी वर्ष जुलाई में प्रमाण पत्र बनवाया था, उसका अभी तक कोई उपयोग नहीं किया है। वहीं मैंने भी जाति प्रमाण पत्र से किसी तरह का कोई आर्थिक लाभ नहीं लिया है। मैं पिछले कई सालों से आयकर रिटर्न भर रहा हूं, जाति प्रमाण पत्र में जो जानकारी दी गई है, उसमें त्रुटिवश गलती हुई है, जब मुझे मेरे खिलाफ चल रहे इस षड़यंत्र की जानकारी मिली तो उस त्रुटि में सुधार हेतू मुंगावली एसडीएम कार्यालय साहित ऑनलाइन आवेदन भी दिया था। लेकिन प्रशासनिक स्तर पर मेरे आवेदन पर कोई सुनवाई नहीं की गई।
वहीं इस मामले में मुंगावली एसडीएम बृजबिहारी श्रीवास्तव का कहना है कि मुझसे जो जांच प्रतिवेदन मांगा गया था, जांच कर वह प्रतिवेदन अपर कलेक्टर को भिजवा दिया है। जांच प्रतिवेदन में क्या लिखा है यह जानकारी मैं नहीं दे सकता।
सत्ता के करीबी हैं सांसद की शिकायत करने वाले गिर्राज यादव
कांग्रेस के कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को पटखनी देकर डॉ. केपी यादव ने चुनावी महाभारत में जीत हासिल भले ही कर ली, लेकिन जाति प्रमाणपत्र के लिए गलत जानकारी देने का मामला उछालकर अशोकनगर के एक पत्रकार गिर्राज यादव ने सांसद केपी यादव के खिलाफ एक नए राजनैतिक चक्रव्यूह की रचना कर दी।
सांसद के खिलाफ शिकायत कर उनका जाति प्रमाण पत्र निरस्त करवाने वाले गिर्राज यादव की सत्ता के गलियारों में सक्रियता किसी से छिपी नहीं है। जिस समय मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश सरकार थी, उस समय भी गिर्राज की सरकार में शामिल आला नेताओं के बीच अच्छी घुसपैठ होने के साथ ही उसका संपर्क कांग्रेस के आलानेताओं से भी था। कांग्रेस के सत्ता में काबिज होने के बाद गिर्राज की नजदीकियां मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सहित पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से बढ़ गईं। इस तरह इस समय कांग्रेस के तीनों प्रमुखों धुरों पर गिर्राज की राजनैतिक पकड़ बनी हुई है। वहीं भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा नेता अरविंद भदौरिया, रामपाल सिंह आदि नेताओं से भी गिर्राज के संबंधों की चर्चा राजनैतिक गलियारों में सुनने मिलती है। इन दिनों गिर्राज को अक्सर भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा के बंगले के आसपास देखा जाता है। भाजपा और कांग्रेस के आला नेताओं के बीच गिर्राज के रसूख का अंदाजा सोशल मीडिया पर पोस्ट होने वाली उनकी तस्वीरों से लगाया जा सकता है।
सत्ता के गलियारों में पहुंच कायम करने से पहले गिर्राज का दामन दागदार भी हो चुका है। गिर्राज पर बीते सालों में कई आपराधिक प्रकरण दर्ज हुए हैं, जिनमें से कई मामलों राजीनामा हो गया, तो वहीं कई प्रकरणों में गिर्राज को कोर्ट से राहत मिली। गिर्राज के खिलाफ अशोकनगर जिलादंडाधिकारी दो बार जिला बदर की कार्रवाई की गई, लेकिन दोनों ही बार अपने खिलाफ की गई जिलाबदर की कार्रवाई पर गिर्राज ने कोर्ट से स्टे हासिल कर लिया। पुलिस महकमे के कई आलाअफसरों से भी गिर्राज की जुगलबंदी की चर्चा पुलिस अधिकारियों से ही सुनने मिल जाती है।
फिलहाल गिर्राज प्रदेश स्तर के एक न्यूज चैनल में अशोकनगर जिला संवादादाता हैं। कांग्रेस से जुड़े राजनैतिक सूत्र बताते हैं कि निगम-मंडलों के गठन के समय गिर्राज को भी किसी निगम अथवा मंडल की जिम्मेदारी मिल सकती है।
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