
न्यूज मंच। केन्द्र सरकार द्वारा हाल ही में लागू किए गए नागरिकता संसोधन बिल (Citizenship Amendment Bill- CAB) का पर भाजपा को अपने विरोधी दलों के पुरजोर विरोध का सामना करना पड़ रहा हैं, ऐसे हालातों में कांग्रेस के एक सीनियर विधायक द्वारा राष्ट्रीय नागरिकता कानून का समर्थन करना, भाजपा नेताओं के उत्साह को बढ़ाता नजर आ रहा। अपने एक टवी्ट के जरिए राष्ट्रीय नागरिकता कानून को स्वीकार करने की बात कहने वाले कांग्रेस नेता लक्ष्मण सिंह, मध्यप्रदेश के गुना जिले की चांचौड़ा विधानसभा से विधायक होने के साथ ही कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह के छोटे भाई भी हैं। इस पूरे मामले में खास बात यह है कि जहां कांग्रेस के आला नेता दिग्विजय सिंह के छोटे भाई लक्ष्मण सिंह ने राष्ट्रीय नागरिकता कानून को स्वीकार करने की बात कही है, वहीं गुरुवार को भोपाल मध्य से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने एक आमसभा कहा था कि अगर मध्यप्रदेश सरकार नागरिकता संशोधन बिल (केब) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्ट्रर (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस- एनआरसी) लागू करेगी तो मैं विधानसभा का सदस्य नहीं रहूंगा। कांग्रेस के इन दोनों नेताओं यह बयान राष्ट्रीय नागरिकता कानून को लेकर पार्टी को दो लाइनों में बांटतें नजर आ रहे हैं।
लक्ष्मण सिंह का ट्वीट, राष्ट्रीय नागरिकता कानून, स्वीकार करो और आगे बढ़ो
शुक्रवार शाम 7 बजकर 31 मिनिट पर किए अपने ट्वीट में कांग्रेस के आला नेता दिग्विजय सिंह के छोटे भाई लक्ष्मण सिंह ने लिखा कि ‘ राष्ट्रीय नागरिकता कानून’ संसद में पारित हो चुका है, सभी दलों ने अपने विचार व्यक्त कर दिए हैं। इस विषय पर ज्यादा टिप्पणी, बयान, व्यर्थ हैं। इसे स्वीकार करों और आगे बढ़ो। कांग्रेस विधायक के इस ट्वीट को अब तक 33 बार रिट्वीट किया जा चुका है, वहीं उनके इस ट्वीट पर कई लाइक भी मिले हैं। इस ट्वीट पर कमेंट करते हुए लोगों ने लिखा है कि हिम्मत चाहिए हिम्मत दिखाने के लिए, वहीं एक कमेंट आया है सर जी, हो क्या रहा है, एक कह रहा है स्वीकार किया तो इस्तीफा दे दूंगा, दूसरा कह रहा स्वीकार करो आगे बढ़ो।
"राष्ट्रीय नागरिकता कानून"संसद में पारित हो चुका है,सभी दलों ने अपने विचार व्यक्त कर दिए हैं।इस विषय पर ज्यादा टिप्पणी,बयान,व्यर्थ हैं।इसे स्वीकार करो और आगे बढ़ो।
— lakshman singh (@laxmanragho) December 13, 2019
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा था इस बिल को कबूल किया, तो नहीं रहेंगे विधानसभा सदस्य
गुरुवार शाम एनआरसी और कैब के खिलाफ भोपाल के बुधवारा में आयोजित एक आमसभा में बोलते हुए भोपाल मध्य से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कांग्रेस के आलानेताओं से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तरह साहस दिखाने की अपील की। मसूद ने बिना किसी का नाम लिए कहा था कि मैं अपने नेता से अनुरोध करूंगा, जिस तरीके से ममता बनर्जी ने साहस दिखाया, हमारी सरकार भी कैब और एनआरसी को रिजेक्ट करें और अगर यह लोग इस कानून को मानेंगे, तो मैं इस असेंबली का मेंबर नहीं रहूंगा।
इस आम सभा को सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं एवं राजनीतिक दलों के नेताओं ने संबोधित किया था। आमसभा में शैलेंद्र शैली नाम के एक वक्ता ने अपने भाषण के दौरान मांग करते हुए कहा था कि कांग्रेस सरकार को मप्र में एनआरसी लागू नहीं करना चाहिए। शैली के भाषण के बाद मंच पर अपनी बात रखने आए विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि शैलेंद्र शैली जी आपने जो मांग की है, कि कांग्रेस सरकार ममता बनर्जी सरकार की तरह इस बिल को रिजेक्ट करें। मसूद ने मंच से ही कहा कि मैं आप सबके सामने यह बात कहता हूं कि अगर मध्य प्रदेश सरकार ने इस बिल को कबूल किया, तो आरिफ मसूद इस विधानसभा का सदस्य नहीं रहेगा
वहीं मध्यप्रदेश में केब एवं एनआरसी लागू होने के सवाल पर जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने एक बयान में कहा कि कैब और एनआरसी पर पार्टी और सोनिया गांधी, जो स्टैंड लेंगी, वहीं मध्यप्रदेश में लागू होगा।
दूसरी ओर आरिफ मसूद द्वारा दिए गए बयान के बाद कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया ने एक टीवी चैनल को प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मसूद को इस तरह के बयान देने से बचना चाहिए। उन्होंने मसूद के बयान को लेकर कहा कि उनका यह बयान चाइल्डिश व्यवहार है।
ऐसा है नया नागरिकता कानून, इसलिए हो रहा संशोधन बिल का विरोध
नागरिकता संशोधन बिल लागू होने से पहले नागरिकता अधिनियम, 1955 के अनुसार भारत में अवैध तरीक़े से बाहर से आए लोगों की एक परिभाषा है। जिसमें दो श्रेणियां हैं- एक जो बिना दस्तावेज़ों के भारत में आए हैं और दूसरे, जो सही कागज़ात के साथ तो आए थे, लेकिन तय वक़्त बीतने के बाद भी भारत में ही रह रहे हैं।
नागरिकता अधिनियम 1955 के सेक्शन दो में जो संशोधन किया गया, उसे ही नागरिकता संशोधन बिल 2019 कहा गया। इस संशोधन के अनुसार पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़गानिस्तान से आने वाले छह समुदायों को अवैध प्रवासी की श्रेणी से हटा दिया गया है।
नए नागरिकता कानून के अनुसार अगर इन तीन देशों (पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफ़गानिस्तान) से कोई भी अल्पसंख्यक (हिंदू, बोद्ध, जैन, पारसी, इसाई, सिक्ख) बिना किसी दस्तावेज के भारत आया है, तो वह भारत में शरण लेने या नागरिकता के लिए आवेदन करने के लिए योग्य माना जाएगा।
वहीं पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से कोई मुस्लिम व्यक्ति बिना किसी दस्तावेज के भारत में आता है, तो उसे अवैध अप्रवासी ही माना जाएगा और उन्हें भारत में शरण या नागरिकता लेने का अधिकार नहीं होगा।
अब तक बिना दस्तावेज़ों के साथ भारत आने वाला कोई भी शरणार्थी या व्यक्ति भारतीय नागरिकता हासिल करने के योग्य नहीं था, लेकिन नए नागरिकता कानून लागू होने के बाद पाकिस्तान, बांग्ला देश एवं अफगानिस्तान से आने वाले गैर मुस्लिम छह धर्मों के लोग भारतीय नागरिकता पाने के योग्य हो जाएंगे। इन्हें भारतीय नागरिकता पाने के नियम में भी छूट दी जाएगी। अब इन तीनों देशों के ऐसे अल्पसंख्यक प्रवासियों भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने का अधिकार होगा, जो भारत में छह साल से रह रहे हो, पहले यह समय-सीमा 11 साल थी।
नए कानून में धार्मिक आधार पर नागरिकता दिए जाने की इन्हीं शर्तों के कारण भाजपा के विरोधी दल इस कानून को भारतीय संविधान के खिलाफ बताते हुए इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं। भाजपा के विरोधी दल इस कानून को भारतीय संविधान की भावना के खिलाफ बता रहे हैं।
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