
जयपुर, 14 दिसंबर, न्यूज़ मंच, कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने वरिष्ठ कांग्रेसी अशोक गहलोत को राजस्थान का मुख्यमंत्री घोषित किया है। इसके साथ ही, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट को राजस्थान का उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। सचिन राजनीति में ज्यादा पुराने नहीं हैं, लेकिन वह संगठन के कामों में बहुत रुचि लेते हैं और युवा वर्ग में काफी लोकप्रिय हैं। उनकी इसी खासियत ने कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें गहलोत का डिप्टी नियुक्त किया है। उनकी दिन-रात की मेहनत का ही नतीजा है कि राज्य की सत्ता में कांग्रेस की एक बार फिर से वापसी संभव हुई है। सचिन इस बार टोंक विधानसभा से विधायक चुने गए हैं। इससे पहले वह दो बार सांसद और एक बार विधायक रह चुके हैं। हालांकि, 2014 की 'मोदी लहर' में सचिन लोकसभा चुनाव हार गए थे।
मात्र 26 साल की उम्र में बने थे सांसद
सचिन पायलट ने पहली बार 14वीं लोकसभा में दौसा से जीत हासिल की थी। तब वह सबसे कम उम्र के सांसद थे, उस वक्त सचिन की उम्र मात्र 26 वर्ष थी, इसके बाद वह 2009 में अजमेर से लोकसभा सांसद चुने गए और इस बार टोंक से विधायक चुने गए हैं। इस बार उन्होंने भाजपा के एकमात्र मुस्लिम कैंडिडेट युनूस खान को 54,179 वोटों के भारी अंतर से हराया है। सचिन पायलट पिछले 5 साल से राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष पद पर काबिज हैं।
जितने चुनाव लड़े सभी में सफलता
राजस्थान में वसुंधरा सरकार के खिलाफ माहौल बनाने और जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने का श्रेय उन्हें ही जाता है। उनके नेतृत्व में ही पार्टी को पिछले चुनाव में 21 से इस बार 99 सीटें मिली है। सचिन पायलट पार्टी के युवा चेहरे हैं और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी भी हैं। सचिन पायलट के नेतृत्व में पांच साल में जितने भी चुनाव और उपचुनाव हुए सभी कांग्रेस ने जीते। इनमें चार विधानसभा और दो लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनाव भी शामिल हैं।
गुर्जर समुदाय में खासा प्रभाव
किसी भी तरह के विवाद और विवादित बयानों से भी दूर रहते हैं। चुपचाप मन लगा कर काम करते हैं। सचिन पायलट गुर्जर समुदाय से हैं। इस समुदाय में उनके परिवार की बहुत साख है। पायलट का जन्म मूलरूप से यूपी के सहारनपुर में हुआ था, इसलिए कुछ बाहरी बता कर उनका विरोध करते थे। वह कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे राजेश पायलट के बेटे हैं। राजस्थान में कांग्रेस को जिताने के लिए सचिन 230 जनसभाएं की। उनके तूफानी चुनाव प्रचार का ही नतीजा रहा कि पार्टी राज्य की सत्ता में एक बार फिर आ गई।
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