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सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में सिर्फ 30 सेकेंड की सुनवाई करते हुए. अगली सुनवाई 10 जनवरी तक के लिए टाली
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सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में सिर्फ 30 सेकेंड की सुनवाई करते हुए. अगली सुनवाई 10 जनवरी तक के लिए टाली

नई दिल्ली, 4 जनवरी, न्यूज मंच, सुप्रीम कोर्ट में राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद को लेकर दायर की गई 14 अपीलों पर सुनवाई 10 जनवरी तक के लिए टल गई है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने सिर्फ 30 सेकंड की सुनवाई में मामला 10 जनवरी तक के लिए टाल दिया है। 

खास बातें
-पीठ ने किसी भी पक्ष की दलील सुने बगैर 30 सेकंड में सुनवाई टालने का फैसला दिया
-अभी केस चीफ जस्टिस की अगुआई वाली 2 सदस्यीय पीठ के सामने, वही तय करेगी नई पीठ
-नई पीठ इलाहाबाद हाईकोर्ट के सितंबर 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर सुनवाई करेगी

तीन जजों की बेंच करेगी सुनवाई
अब तीन जजों के बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी, जिसका हिस्सा जीफ जस्टिस गोगोई हो सकते हैं। पहले पूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच सुनवाई कर रही थी। ऐसे में दो सदस्यीय बेंच विस्तृत सुनवाई नहीं कर सकती। इस पर तीन या उससे अधिक जजों की बेंच ही सुनवाई करेगी। यह पीठ इलाहाबाद हाईकोर्ट के सितंबर, 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर सुनवाई करेगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस विवाद में दायर चार दीवानी वाद पर अपने फैसले में 2.77 एकड़ भूमि का सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच समान रूप से बंटवारा करने का आदेश दिया था।

जल्द सुनवाई से किया था इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 29 अक्टूबर को कहा था कि यह मामला जनवरी के प्रथम सप्ताह में उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा, जो इसकी सुनवाई का कार्यक्रम निर्धारित करेगी। बाद में अखिल भारत हिंदू महासभा ने एक अर्जी दायर कर सुनवाई जल्द करने का आग्रह किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा करने से इनकार कर दिया था।  सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 29 अक्तूबर को ही इस मामले की सुनवाई के बारे में आदेश पारित किया जा चुका है।
 
गरमाई मंदिर की राजनीति

लोकसभा चुनाव नजदीक होने की वजह से राम मंदिर मुद्दे पर राजनीति गरमा रही है। केंद्र में एनडीए की सहयोगी शिवसेना ने कहा है कि अगर 2019 चुनाव से पहले मंदिर नहीं बनता तो यह जनता से धोखा होगा। इसके लिए भाजपा और आरएसएस को माफी मांगनी पड़ेगी। उधर, केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने अध्यादेश लाने का विरोध करते हुए कहा कि सभी पक्षों को सुप्रीम कोर्ट का आदेश ही मानना चाहिए। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि न्यायिक प्रकिया पूरी हो जाने के बाद एक सरकार के तौर पर जो भी हमारी जिम्मेदारी होगी हम उसे पूरा करने के लिए सभी प्रयास करेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी कहा है कि अयोध्या में मंदिर निर्माण से कहीं ज्यादा देश में दूसरे जरूरी काम पड़े हैं, जिन पर तुरंत ध्यान दिए जाने की जरूरत है।

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