
नई दिल्ली, 10 दिसंबर, न्यूज़ मंच । संसद का शीतकालीन सत्र मंगलवार को शुरू हो रहा है। सत्र शुरू होने के दो दिन पहले राम मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश का दबाव बनाने के लिए विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने दिल्ली के रामलीला मैदान में धर्मसभा का आयोजन किया। आयोध्या में राम मंदिर बनाए जाने के लिए विहिप की धर्मसभा में देश के कोने-कोने से जनसैलाब उमड़ पड़ा। धर्मसभा में साधु संतों के अलावा लाखों की संख्या में विहिप और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। धर्मसभा को स्वामी नृत्यगोपाल दास, जगद्गुरू रामभद्राचार्य, साध्वी ऋतंभरा, महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि, जगतगुरु हंसदेवाचार्य महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद महाराज, आरएसएस के सुरेश (भैय्याजी) जोशी, आलोक कुमार और बीएस कोकजे के अलावा अन्य लोगों ने संबोधित किया। धर्मसभा में वक्ताओं ने एक स्वर में ऐलान किया कि अब किसी भी सूरत में भगवान राम टेंट में नहीं रहेंगे। अदालत को भी इस जनभावना का सम्मान करना चाहिए।
आगे बढ़ो, कानून बना कर अयोध्या में मंदिर बनाओ : चंपकराय
धर्मसभा को संबोधित करते हुए वीएचपी उपाध्यक्ष चंपतराय ने कहा अगर इंडिया गेट से जॉर्ज पंचम हटाए जा सकते हैं, विक्टोरिया गायब हो सकती है, इरविन हॉस्पिटल, विलिंगटन हॉस्पिटल, औरंगजेब रोड के नाम बदले जा सकते हैं, सोमनाथ पुनर्निमाण का संकल्प भारत की राजसत्ता 1950 में कर सकती है, तो आज की राजसत्ता भी संकल्प करे। हिंदुस्तान की तरुणाई इस राजसत्ता को बल प्रदान करने के लिए यहां आई है। आगे बढ़ो, कानून बनाओ, अयोध्या हिंदुओं का तीर्थ है, मोक्ष नगरी है, ये हिंदुओं का ही तीर्थ रहेगा। यहां किसी आक्रांता का प्रतीक बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा देश की संस्थाओं को गुलामी अस्वीकार करनी ही होगी। हमें कानून से मंदिर चाहिए। सरकार और न्यायपालिका का धर्म है कि वो जिस देश में रहते हैं, उसके सम्मान की रक्षा करें। उसके गौरव में वृद्धि करे, जिन आक्रमणकारियों ने देश पर हमले किए, उनकी निशानियां हटाओ। उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट ने भगवान राम के जन्मस्थान के 3 टुकड़े कर दिए। हमें तीन टुकड़े नहीं, पूरी जन्मभूमि चाहिए। हम एक इंच जमीन नहीं देंगे। हमें ऐसा कानून चाहिए, जिसमें भगवान राम की जन्मभूमि व लीला भूमि हिंदुओं को प्राप्त हो। हमें किसी भी कीमत पर बंटवारा स्वीकार नहीं है।
शीतकालीन सत्र में विधेयक लाने का दबाव
वीएचपी के महासचिव सुरेंद्र जैन का दावा है कि इस धर्मसभा से उन लोगों का हृदय परिवर्तन होगा, जो मानते हैं कि संसद के शीतकालीन सत्र में राम मंदिर पर विधेयक लाना संभव नहीं है। बता दें कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था कि अयोध्या पर कोई भी निर्णय सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही होगा। सुरेंद्र जैन का कहना है कि अगर किसी वजह से शीतकालीन सत्र में राम मंदिर को लेकर विधेयक नहीं आता है, तो प्रयाग में होने वाले महाकुंभ में होने वाली आगामी धर्म संसद में भविष्य की रणनीति तय होगी। बता दें कि महाकुंभ में 31 जनवरी से एक फरवरी तक दो दिवसीय धर्म संसद होनी हैं, जिसमें राम मंदिर समेत कई अन्य मुद्दों पर धर्मादेश जारी होगा।
निर्मोही और निर्वाणी अखाड़ा ने किया किनारा
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हो रही धर्मसभा से निर्मोही अखाड़ा और निर्वाणी अखाड़ा ने किनारा किया है। 25 नवंबर को अयोध्या में हुई धर्मसभा में भी निर्मोही अखाड़ा शामिल नहीं हुआ था। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर राम जन्मभूमि को तीन हिस्सों में बांटा गया है, जिसमें एक हिस्सा निर्मोही अखाड़े को दिया गया है। वहीं निर्वाणी अखाड़ा परिषद भी इस धर्मसभा में शामिल नहीं हो रही है। निर्वाणी अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत धर्मदास ने कुछ दिन पहले राम मंदिर को लेकर आत्मदाह की चेतावनी दी थी, जिसे लेकर अयोध्या प्रशासन ने उन्हें हिरासत में ले लिया था।
सुरक्षा में लगी सेंध, मीडियाकर्मियों से हाथापाई
धर्म सभा में सुरक्षा व्यवस्था की मुकम्मल व्यवस्था नहीं हो सकी । जिसकी वजह से लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा है। वीआईपी एंट्री के लिए गेट नंबर-2 निर्धारित किया गया था, लेकिन वहां से आम लोग भी अंदर घुसने लगे, तो सुरक्षा घेरा टूट गया। बेकाबू भीड़ की वजह से वहां हंगामा मच गया। इसी बीच मीडियाकर्मियों के साथ भी हाथापाई की गई। पुलिस प्रशासन ने दावा किया कि रामलीला मैदान में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और ऊंची जगहों पर स्नाइपर तैनात किए गए हैं। लेिकन उसके दावे के पोल खुल गई। रैली को देखते हुए पुलिस मुख्यालय में हुई हाई लेवल मीटिंग बुलाई गई थी, जिसमें सिक्यॉरिटी और ट्रैफिक मैनेजमेंट का खाका तैयार किया गया था। रैली के लिए रामलीला मैदान और उसके आसपास के इलाकों के अलावा दिल्ली की सीमाओं और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में 15 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे।
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