
नई दिल्ली। भारतीय सेना के प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे चार नवंबर को तीन दिवसीय दौरे पर नेपाल पहुंचेंगे। नेपाली सेनाध्यक्ष जनरल पूर्ण चंद्र थापा के निमंत्रण पर, भारतीय सेना प्रमुख यह दौरा कर रहे हैं। इस दौरे पर सेना प्रमुख का फोकस नेपाल के साथ रक्षा, सुरक्षा और समग्र संबंधों को मजबूत करने पर रहेगा। सेना प्रमुख ये दौरा ऐसे वक्त में कर रहे हैं जब नेपाल-भारत के संबंध पिछले साल नवंबर से शुरू हुए सीमा विवाद के कारण सर्वकालिक निम्न स्तर पर पहुंच गए हैं।
यात्रा के दौरान काठमांडू में एक समारोह में नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी द्वारा जनरल नरवणे को जनरल ऑफ द नेपाल आर्मी की मानद रैंक से सम्मानित किया जाएगा। नेपाल और भारत में 1950 से एक दूसरे के सेना प्रमुख को मानद उपाधि प्रदान करने की एक ऐतिहासिक परंपरा रही है। नेपाल सेना लंबे समय से रियायती मूल्य में भारत से घातक हथियारों सहित सैन्य हार्डवेयर खरीदती है। जनरल नरवणे अपनी यात्रा के अंतिम दिन प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री के. पी. शर्मा ओली से मुलाकात करेंगे।
बता दें कि नेपाल ने एक नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था। इस नए नक्शे में लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था। हालांकि यह क्षेत्र हमेशा से ही भारत का हिस्सा रहा है। इसके बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव आ गया है। भारत की ओर से यह पहला उच्च स्तरीय दौरा है। सेना प्रमुख नरवणे रक्षा क्षेत्र सहित समग्र संबंधों को मजबूत बनाने के उद्देश्य से इस यात्रा पर जा रहे हैं।
नेपाल के नक्शे को लेकर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा था, 'यह ऐतिहासिक तथ्यों और सबूतों पर आधारित नहीं है। ऐसे में उनका दावा जायज नहीं है। यह सीमा विवाद पर होने वाली बातचीत के हमारे मौजूदा समझौते का उल्लंघन भी है।'
8 मई को भारत ने उत्तराखंड के लिपुलेख से कैलाश मानसरोवर के लिए सड़क का उद्घाटन किया। भारत के इस कदम से नेपाल नाराज हो गया और प्रधानमंत्री केपी ओली शर्मा ने 20 मई को उनके देश का एक नया नक्शा जारी कर दिया। इस नक्शे में भारत के कंट्रोल वाले कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया। जिस हिस्से को लेकर विवाद चल रहा है वो करीब 335 स्क्वायर किलोमीटर का है।
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