
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 2020 में हुई शोपियां फर्जी मुठभेड़ मामले में बड़ा खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी आर्मी कैप्टन और उसके दो सहयोगियों ने तीनों मजदूरों को मारने के बाद उनके पास हथियार रखे थे, ताकि उन्हें कट्टर आतंकवादी घोषित किया जा सके। आरोपी आर्मी कैप्टन ने जानबूझकर सहयोगियों और अपने अधिकारियों को गलत जानकारी दी।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा कि 62 आरआर के आरोपी कैप्टन भूपेंद्र सिंह, मेजर बशीर खान, चौगाम के रहने वाले ताबिश नजीर और पुलवामा के रहने वाले बिलाल अहमद लोन ने तीनों मजदूरों का अपहरण किया और उन्हें फर्जी मुठभेड़ में मार डाला। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा कि आर्मी कैप्टन ने जानबूझकर एसओपी का पालन नहीं किया और मजदूरों के शवों के पास अवैध रूप से प्राप्त हथियारों और सामान को रखा, ताकि उनकी पहचान छिपा ली जाए और उन पर कट्टर आतंकी का टैग लगाया जा सके।
वहीं सेना ने गुरुवार को एक बयान में कहा था कि साक्ष्य के सारांश को रिकॉर्ड करने की प्रक्रिया पूरी हो गई है। आगे की कार्यवाही के लिए कानूनी सलाह ली जा रही है। भारतीय सेना अपने नैतिक आचरण के लिए प्रतिबद्ध है।
बता दें कि 18 जुलाई 2020 को मारे गए मजदूरों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं थी। जिसके बाद जम्मू के राजौरी जिले के तीन परिवारों ने दावा किया कि मारे गए उनके परिजन हैं, जो शोपियां में मजदूरी करने गए थे। इसके बाद तीनों मजदूरों की डीएनए जांच हुई, जिसके बाद साबित हुआ कि मारे गए आतंकी नहीं, बल्कि मजदूर थे।
फर्जी मुठभेड़ में मारे गए लोगों की पहचान 25 वर्षीय अबरार अहमद, 20 वर्षीय इम्तियाज अहमद और 16 वर्षीय मोहम्मद इबरार के रूप में हुई थी। डीएनए रिपोर्ट आने के बाद शवों को 70 दिनों के बाद कब्र से निकालकर परिवार को सौंपा गया था। इसके बाद तीनों मजदूरों के परिवार ने उनका अंतिम संस्कार किया था।
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