
भोपाल, 3 नवंबर, न्यूजमंच, भाजपा द्वारा जिन तीन दिग्गज मंत्रियों के टिकिट काटे गए हैं, उनमें सबसे ज्यादा चर्चित नाम राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और मप्र की कैबिनेट मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया की मामी माया सिंह का है। वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे सिंधिया के साथ ही वे कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया की भी रिश्तेदार हैं। माया सिंह भाजपा की कद्दावर नेता होने के साथ ही पूर्व राज्यसभा सांसद, बीजेपी महिला मोर्चा की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और मौजूदा सरकार में कैबिनेट के तौर पर काबिज थीं। बड़े राजनैतिक बैकग्राउंड से आने के बाद भी माया सिंह का टिकिट काटे जाने के पीछे बड़ी राजनैतिक वजह मानी जा रही है।
कद्दावर मंत्री माया सिंह का टिकिट काटने की वजह को लेकर न्यूज़ मंच ने तहकीकात की, न्यूजमंच की तहकीकात में खुलासा हुआ कि 2013 के विधानसभा चुनाव में माया सिंह बेहद मामूली अंतर से चुनाव जीती थीं, उसके बावजूद भी उनका क्षेत्र के मतदाताओं और कार्यकर्ताओं से कभी सीधा संपर्क ही नहीं रहा। ग्वालियर पूर्व विधानसभा क्षेत्र के रहवासी सड़क,नाली, पानी जैसी आधारभूत जरूरतों के लिए ही तरसते रहे। माया सिंह के प्रति कार्यकर्ताओं और मतदाताओं की नाराजगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जन आशीर्वाद यात्रा माया सिंह के विधानसभा क्षेत्र में पहुँची, तो उसमें बमुश्किल 500-600 लोगों की ही भीड़ जुट पाई। पार्टी ने इस बात को गंभीरता से लिया, वहीं मुख्यमंत्री और पार्टी द्वारा कराए गए सर्वे में भी माया सिंह की स्थिति कमजोर रही। इसके अलावा संघ का फीडबैक और ग्वालियर में हुई रायशुमारी भी माया सिंह के पक्ष में नहीं रही। पार्टी इस विधानसभा चुनाव में एक-एक सीट को महत्वपूर्ण मानते हुए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाह रही थी। इसलिए पार्टी ने टिकिट देने के किए पहली कसौटी जीत को माना और माया सिंह इस कसौटी पर खरी नहीं उतर पा रही थीं। यही वजह रही कि इतना बड़ा कद होने के बावजूद भी भाजपा ने उनका टिकिट काट कर ग्वालियर नगर निगम के पार्षद सतीश सिकरवार को दे दिया।
जानिए कौन हैं सतीश सिकरवार, जो माया सिंह को पटकनी देकर ग्वालियर पूर्व से बनें बीजेपी का चेहरा
मुरैना जिले की सुमावली विधानसभा के विधायक रहे सतपाल सिंह उर्फ नीटू सिकरवार के बड़े भाई सतीश सिकरवार ग्वालियर क्षेत्र के लिए कोई अंजाना चेहरा नहीं हैं। सतीश सिकरवार ग्वालियर नगर-निगम में पार्षद के तौर पर अपना तीसरा कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। साथ ही इनकी पत्नी भी ग्वालियर नगरनिगम की पार्षद हैं। सतीश अपनी सामाजिक संस्था उत्थान न्यास के जरिए समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय रहे सामाजिक सरोकारों से जुड़े कई बड़े आयोजन कराते रहते हैं। मतदाताओं और कार्यकर्ताओं में सतीश की मजबूत जमीनी पकड़ के चलते भाजपा ने अपनी कद्दावर मंत्री का टिकिट काट कर सतीश को अपना उम्मीदवार बनाया। कांग्रेस नेता एवं ग्वालियर के महाराजा कहे जाने वाले सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाली इस सीट को जीत पाना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती थी, लेकिन सतीश सिकरवार को टिकिट दिए जाने के बाद ग्वालियर पूर्व सीट जीतने की संभावना नजर आने लगी है। साथ ही सुमावली से विधायक इनके भाई सतपाल सिकरवार उर्फ नीटू सिकरवार ने पार्टी से कहा था कि अगर उनके भाई को मौका दिया जाता है, तो वह टिकिट के लिए दावेदारी नहीं करेंगे। नीटू सिकरवार ने पिछले विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के प्रभाव वाली सुमावली सीट से बसपा के अजब सिंह कुशवाह को हराया था, इस बार अजब सिंह ने बसपा को छोड़ भाजपा का साथ पकड़ लिया है, भाजपा ने भी उन्हें सुमावली से अपना उम्मीदवार घोषित किया है।
आखिर क्यों कटा 7 बार के विधायक सीनियर कैबिनेट मंत्री डॉ गौरीशंकर शेजवार का टिकिट
रायसेन जिले की सांची विधानसभा सीट से 7 बार विधायक रह चुके कैबिनेट मंत्री डॉ गौरी शंकर शेजवार का कद भाजपा में बेहद मजबूत माना जाता है। मजबूत कद और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की पृष्ठभूमि से आने के कारण उनका टिकिट काटा जान नामुमकिन माना जा रहा था, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से खुद शेजवार अपनी जगह अपने बेटे को टिकिट दिलाना चाह रहे थे। कुछ महीने पहले मुम्बई में उनकी बायपास सर्जरी भी हुई थी, उसके कुछ समय बाद से ही उन्होंने अपने बेटे मुदित को सांची से उम्मीदवार बनाने के लिए लॉबिंग शुरू कर दी थी। पार्टी ने उनकी मांग को स्वीकार कर उनके बेटे मुदित शेजवार को सांची से उम्मीदवार घोषित कर दिया।
सीएम शिवराज के करीबी थे मंत्री हर्ष सिंह फिर कटा टिकिट
सतना जिले की रामपुर बघेलान सीट पर 4 बार से विधायक रह चुके मंत्री हर्ष सिंह प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री गोविंदनारायण सिंह के बेटे हैं। परिवार की बेहद मजबूत राजनैतिक पृष्ठभूमि और सीएम शिवराज सिंह के करीबी होने के बावजूद भी मंत्री हर्ष सिंह के टिकिट काटे जाने की वजह वे खुद ही हैं। दरअसल मंत्री हर्ष सिंह की इच्छानुसार भाजपा ने उनकी परंपरागत सीट रामपुर बघेलान से हर्ष सिंह के बेटे और नगर पालिका परिषद रामपुर बाघेलान के अध्यक्ष विक्रम सिंह को टिकट दिया है। शायद कम ही लोग जानते होंगे कि पूर्व विधायक ध्रुवनारायण सिंह विक्रम सिंह के चाचा हैं।
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