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क्या जौरा की जनता फिर दिखायेगा सूबेदार सिंह पर भरोसा या कांग्रेस, बीजेपी और बसपा के बीच होगा त्रिकोणीय मुकाबला
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क्या जौरा की जनता फिर दिखायेगा सूबेदार सिंह पर भरोसा या कांग्रेस, बीजेपी और बसपा के बीच होगा त्रिकोणीय मुकाबला

जौरा, 24 नवंबर, न्यूज़मंच, जौरा विधान सभा सीट पर अभी बीजेपी का कब्ज़ा है।  मध्य प्रदेश की इस सीट पर इस बार त्रिकोणीय मुकाबला देखा जा सकता है। जौरा सीट का इतिहास रहा है कि यहाँ पर किसी भी पार्टी को लगातार दो बार जीत नहीं मिली है। इस तर्क को माने, तो इस बार यहाँ कांग्रेस या बसपा की जीत हो सकती है।  

जौरा विधान सभा सीट पर 2013 का परिणाम

जौरा विधान सभा सीट की निर्वाचन क्षेत्र संख्या 4 है। यह सीट SC या ST  के लिए आरक्षित नहीं है। जौरा विधान सभा सीट, मुरैना लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के मुरैना जिले में आती है। 

इस सीट पर 2013 के विधान सभा चुनाव में, बीजेपी से Subedar Singh की जीत हुई थी, और उन्हें 42421 वोट मिले थे। Subedar Singh के निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस से Banwari Lal थे जिन्हे, 39923 वोट मिले थे। Subedar Singh और Banwari Lal के बीच वोटों का अंतर 2498 था। 2018 के विधान सभा चुनाव में बीजेपी के Subedar Singh के विरुद्ध कांग्रेस के Banwarilal Sharma लड़ रहे हैं। 

सूबेदार सिंह ने बड़ाई कांग्रेस और बसपा की चिंता 

ऐसा कहा जाता है की पिछले चुनाव में बीजेपी सिर्फ सूबेदार सिंह की बदौलत इस सीट पर जीत पायी थी।   इस सीट पर आज़ादी के बाद बीजेपी की यह पहली जीत थी।  इस बार भी बीजेपी ने सूबेदार सिंह को ही टिकट दिया है, जिससे कांग्रेस और बसपा की मुश्किलें बढ़ गयी हैं।  वहीँ, अगर, कांग्रेस और बसपा इस सीट से मिलकर लड़ते, तो बीजेपी के लिए खतरा बन जाते, पर अब लगता है के बीजेपी को सूबेदार सिंह को दोबारा टिकट देने का फायदा हो सकता है। 

कांग्रेस और बसपा को मिलेगा एंटी इंकम्बैंसी का फायदा

इसके बावजूद भी अगर पिछले चुनाव के वोटों का अंतर देखा जाये, तो बीजेपी के सूबेदार सिंह और कांग्रेस के बनवारी लाल में वोटों का अंतर मात्र  2000 था, और पूरे प्रदेश में एंटी इंकम्बैंसी की लहर है।  पिछले चुनाव में मोदी लहर थी, जिसका फायदा बीजेपी दो संभवतः हुआ था।  लेकिन इस बार एंटी इंकम्बैंसी के चलते ये भी देखा जा सकता है की कांग्रेस इस सीट पर जीत जाये।  

वहीँ, बसपा के मनीराम को भी यहाँ 30 हजार से ज्यादा वोट मिले थे।  तो पूरी संभावना है की मुकाबला त्रिकोणीय होगा।  और वोटों का अंतर इस बार भी बहुत अधिक नहीं होगा।  

जौरा सीट पर ब्राह्मण, धाकड़, क्षत्रीय व कुशवाह समुदाय बहुत प्रभावशाली हैं। लेकिन देखा गया है कि मुस्लिम वोट जिस पार्टी की ओर ,रहे हैं वही यहाँ जीती है।  

 तो अगर बसपा बीजेपी के वोट काटने में सफल हुई, और मुस्लिम वोट जाकर कांग्रेस के पास जुड़ गए, तो संभवतः कांग्रेस इस सीट पर जीत सकती है। 

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