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श्योपुर विधान सभा सीट - बीजेपी और कांग्रेस में अंतरकलह, बसपा का फायदा?
Politics

श्योपुर विधान सभा सीट - बीजेपी और कांग्रेस में अंतरकलह, बसपा का फायदा?

श्योपुर, 23 नवंबर न्यूज़मंच,श्योपुर जिले में दो निर्वाचन क्षेत्र आते हैं।  पहला निर्वाचन क्षेत्र है श्योपुर (निर्वाचन क्षेत्र 1) श्योपुर जिले और दूसरा निर्वाचन क्षेत्र है विजयपुर (निर्वाचन क्षेत्र 2)। श्योपुर जिले के श्योपुर निर्वाचन क्षेत्र में पूरा श्योपुर सब-डिवीज़न शामिल हैं। 

श्योपुर निर्वाचन राजस्थान से सटा हुआ है, तो कहा जा सकता है कि यहाँ राजस्थान जैसा ही राजनीतिक माहौल है। इस निर्वाचन क्षेत्र की एक खास बात ये है कि जनता यहाँ हर बार विधान सभा इलेक्शन के बाद विधायक बदल देती  हैं। कभी कांग्रेस को चुनती है तो कभी बीजेपी, यहाँ आना जाना लगा ही रहता है।  

बीजेपी और कांग्रेस में अंतरकलह, बसपा का फायदा

भाजपा विधायक दुर्गालाल के विरोध में तो कांग्रेस से ज़्यादा बीजेपी के नेता इकट्ठे हो गए है। आलम ये है कि तीन महीने पहले श्योपुर आए भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान के सामने भाजपा कार्यकर्ताओं ने ही "भाजपा से बैर नहीं, दुर्गा तेरी खैर नहीं" जैसे नारे लगाकर दिखा अपना विरोध प्रदर्शन किया था। तो इस बार फिर इनके बदले जाने की पूरी संभावना हैं। 

उधर कांग्रेस में भी दो बार विधायक रह चुके कांग्रेस जिला अध्यक्ष बृजराज सिंह चौहान भाजपा से ज्यादा अपनी ही पार्टी के लोगों से जूझ रहे हैं।

इधर  बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही लड़खड़ाए हुए है, तो उधर बसपा की हिम्मद बढ़ती जा रही है। यूँ तो बसपा यहाँ कभी चुनाव जीती नहीं है, लेकिन इस विधान सभा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस का गणित बिगाड़ने में बसपा बहुत अहम भूमिका निभा रही है। मीणा समाज के तुलसीनारायण मीणा ने जैसे ही बसपा का झंडा थामा तो तो ऐसा लगा कि सालों से सोया हाथी जाग उठा है और मदमस्त हो सबको भयभीत कर रहा है।

कांग्रेस ने खेला खेल 

तमाम अटकलों के बीच कांग्रेस ने इस बार बृजराज सिंह चौहान का टिकट काटकर नए चेहरे बाबू लाल मीणा उर्फ जंडेल को मैदान में उतारा है।पुराने चेहरे के स्थान पर नए चेहरे को भरोसा जताया है। जंडेल पिछले तीन चुनाव बसपा के टिकट पर लड़ चुके हैं और इसी वर्ष बसपा छोडकऱ कांग्रेस में शामिल हुए हैं। अपने जातिगत वोटों के समीकरण और गत चुनावों में दूसरे नंबर पर रहने के चलते टिकट पाने में सफल रहे जंडेल के टिकट पाने में सफल रहे। बताया गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा जंडेल का नाम रखा गया

2013 इलेक्शन के परिणाम

2013 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर बीजेपी के दुर्गालाल विजय हुई थीइ थे। दुर्गालाल को 65211 वोट मिले थे ।  दूसरा स्थान (48784) वोटों के साथ बाबू जंदेल (बीएसपी) को मिला. तीसरा स्थान (34898) वोटों के साथ ब्रजराज सिंह (कांग्रेस) का रहा. (1834) वोटों के साथ नोटा को चौथा स्थान को मिला. 

पार्टीउम्मीदवारवोटवोट %
बीजेपीदुर्गालाल विजय6521141.1
बीएसपीबाबू जंदेल4878430.8
कांग्रेसब्रजराज सिंह3489822
नोटा-18341.2

क्या कहते हैं जातीय समीकरण 

दलित आंदोलन के बाद यहां दलित वोट बहुत प्रभाव डाल सकते हैं। जातीय समीकरण की बात की जाए इस सीट पर मुस्लिम- आदिवासियों का काफी प्रभाव है। इसके अलावा यहाँ रावत (मीणा) और बैरवा (जाटव) मतदाता समीकरण बदलने की स्तिथिति में हैं। 
शेओपुर मोरेना जिले में सात अन्य विधान सभा क्षेत्रों, अर्थात् विजयपुर में इसपुर में सबालगढ़, जौरा, सुमावली, मोरेना, दीमानी और अंबाह के साथ मोरेना लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा हैं।

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