
2019 के लोकसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के खिलाफ महा गठबंधन पर चर्चा करने के लिए विपक्षी दलों की बैठक सोमवार को हो रही है। यह बैठक आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने बुलाई है। वे सभी विपक्षी दलों को सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी के विरुद्ध एकजुट होने पर ज़ोर दे रहे हैं, हालाँकि बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने इस महागठबंधन से खुद को दूर रखा। ऐसे हालातों में यह कहना मुश्किल है कि 2019 का लोकसभा चुनाव आते आते इस गठबंधन की महत्ता कितनी बचेगी।
चंद्रबाबू नायडू, जिन्होंने कांग्रेस के साथ अपनी दशकों पुरानी शत्रुता समाप्त कर दी, वे अब महागठबंधन बनाने पर ज़ोर दे रहे हैं। उनका मानना है की लोगों के अपने मतभेदों को भूलकर, लोकतंत्र को महत्वपूर्ण समझना चाहिए।
पिछले कुछ हफ्तों से श्री नायडू कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष शरद पवार, पूर्व जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, मायावती, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल सहित विपक्षी नेताओं की एक श्रृंखला से मुलाकात कर रहे थे।
विधान सभा चुनाव के नतीजों के एक दिन पहले बैठक ?
गौर करने की बात यह है की यह बैठक पांच राज्यों के चुनाव के परिणाम आने के ठीक एक दिन पहले राखी गयी है। हाल ही में जिन पांच राज्यों में चुनाव हुए हैं, वे हैं, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मिजोरम और तेलंगाना। इन राज्यों के चुनावों के नतीजे मंगलवार (11 दिसंबर) को आने हैं।
अब कोई खुश हो या हो खफा!
सूत्रों के अनुसार, मायावती, जिनकी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के चुनाव में अहम् भूमिका हो सकती है, इस बैठक का हिस्सा नहीं होंगी। वही अरविन्द केजरीवाल, जो इस तरह की ज़्यादातर बैठकों से नदारद होते हैं, वह इस बैढक का हिस्सा होंगे।
यह माना जा रहा है की बसपा और आम आदमी पार्टी, दोनों ही कांग्रेस से कुछ खफा हैं। मायावती इन पांच में से तीन राज्यों, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के सीट विभाजन को लेकर, और अरविन्द केजरीवाल 2019 में होने वाले लोक सभा चुनाव में गठबंधन को लेकर कांग्रेस के रूखे व्यवहार की वजह से।
शीतकालीन सत्र के एक दिन पहले बैठक ?
इसी के साथ, मंगलवार से ही संसद का शीतकालीन सत्र भी शुरू होने जा रहा है। यह सत्र 11 दिसंबर को शुरू होकर 8 जनवरी को समाप्त होगा और यह 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले होने वाला आखिरी सत्र होगा। विपक्षी दलों की इस बैठक में शीतकालीन सत्र के प्लान को लेकर भी चर्चा होगी, और कुछ प्रमुछ मुद्दों, जैसे कि, बेरोज़गारी, रफाएल, किसान, आदि को लेकर रणनीति बनाई जाएगी।
एच डी कुमारस्वामी ने महागठबंधन का किया था आह्वान
इसी वर्ष मई में कर्नाटक में एच डी कुमारस्वामी के मुख्यमंत्री बनने के बाद, उन्होंने विपक्षी दलों के एकजुट होने का आह्वान किया था, तभी से सभी विपक्षी दलों के महागठबंधन को लेकर चर्चा चल रही है।
ममता बनर्जी - चंद्रशेखर राओ से क्यों मिली ?
जबकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हमेशा गठबंधन के समर्थन में बात की है, उन्होंने तेलंगाना राष्ट्र समिति के नेता के चंद्रशेखर राव से भी मुलाकात की है, जो गैर-कांग्रेस, गैर-बीजेपी मोर्चे की ओर काम कर रहे हैं।
सुश्री बनर्जी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह राष्ट्रीय दलों के लिए एक बड़ी और अधिक केंद्रीय भूमिका चाहती है।
किस किस के आने की संभावना
सुश्री बनर्जी के अलावा, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायन्स (यूपीए) की अध्यक्ष सोनिया गांधी, द्रमुक के एमके स्टालिन, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) तेजस्वी यादव, श्री कुमारस्वामी और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक में आने की संभावना है।
उत्तर, दक्षिण, पूरब, पश्चिम - ये कैसा महागठबंधन
इस तरह के गठबंधन को देख कर लगता है की को उत्तर, कोई दक्षिण, कोई पूरब और कोई पश्चिम, फिर भी एकजुट होने की एक अच्छी कोशिश। देखना है की चंद्रबाबू नायडू, ममता बनर्जी , मायावती, अरविन्द केजरीवाल, अखिलेश यादव, जैसे पूर्णतः विपरीत दिशाओं के नेता, अगर एक गठबंधन बनाने की कोशिश करते हैं, तो एक महाशक्ति बनती है या राजनीती का महाप्रलय आता है !
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