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AMU के शताब्दी समारोह में शामिल हुए पीएम मोदी, बोले-यहां से तालीम लेकर निकले लोग भारत और दुनिया के सैकड़ों देशों में छाए
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AMU के शताब्दी समारोह में शामिल हुए पीएम मोदी, बोले-यहां से तालीम लेकर निकले लोग भारत और दुनिया के सैकड़ों देशों में छाए

नई दिल्ली। अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय (AMU) के शताब्दी समारोह में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बतौर चीफ गेस्ट शामिल हुए। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बाद यूनिवर्सिटी के किसी भी कार्यक्रम में भाग लेने वाले मोदी पहले पीएम है। इस ऑनलाइन समारोह में पीएम मोदी ने कहा, सर सैयद का संदेश कहता है कि हर किसी की सेवा करें, चाहे उसका धर्म या जाति कुछ भी हो। ऐसे ही देश की हर समृद्धि के लिए उसका हर स्तर पर विकास होना जरूरी है। आज हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के विकास का लाभ मिल रहा है। पीएम ने कहा, नागरिक संविधान से मिले अधिकारों को लेकर निश्चिंत रहे, सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास ही सबसे बड़ा मंत्र है। 

पीएम मोदी ने बताया कि AMU के चांसलर ने उन्हें कुछ दिन पहले चिट्ठी लिख कोरोना वैक्सीन के मिशन के दौरान हर संभव मदद का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा,  AMU में एक मिनी इंडिया है, यहां उर्दू-हिन्दी-अरबी-संस्कृत पढ़ाई जाती है। यहां की लाइब्रेरी में कुरान है तो गीता-रामायण के अनुवाद भी हैं। AMU में एक भारत-श्रेष्ठ भारत की अच्छी तस्वीर है। यहां पर इस्लाम को लेकर जो रिसर्च होती है, उससे भारत का इस्लामिक देशों से संबंध अच्छा होता है। मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि AMU की दीवारों में देश का इतिहास है, यहां से पढ़ने वाले छात्र दुनिया में देश का नाम रोशन कर रहे हैं। यहां से निकले छात्रों से कई बार विदेश में उनकी मुलाकात हुई, जो हमेशा हंसी-मजाक और शेर-ओ-शायरी के अंदाज में खोए रहते हैं।

पीएम मोदी का संबोधन
-आज एएमयू से तालीम लेकर निकले लोग भारत के सर्वश्रेष्ठ स्थानों के साथ ही दुनिया के सैकड़ों देशों में छाए हैं। एएमयू के पढ़े लोग दुनिया में कहीं भी हों, भारत की संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हैं।

-कोरोना संकट के दौरान AMU ने जिस तरह समाज की मदद की वो अभूतर्पूव है। लोगों का मुफ्त टेस्ट कराना, आइसोलेशन वार्ड बनाना, प्लाज्मा बैंक बनाना और पीएम केयर फंड में एक बड़ी राशि का योगदान देना समाज के प्रति आपके दायित्यों को पूरा करने की गंभीरता को दिखाता है।

-मुझे बहुत से लोग बोलते हैं कि एएमयू कैंपस अपने आप में एक शहर की तरह है। अनेक विभाग, दर्जनों हॉस्टल, हजारों टीचर-छात्रों के बीच एक मिनी इंडिया नजर आता है। यहां एक तरफ उर्दू पढ़ाई जाती है, तो हिंदी भी। अरबी पढ़ाई जाती है तो संस्कृति की शिक्षा भी दी जाती है।

-आज देश जो योजनाएं बना रहा है वो बिना किसी मत मजहब के भेद के हर वर्ग तक पहुँच रही हैं। बिना भेदभाव, 40 करोड़ से ज्यादा गरीबों के बैंक खाते खुले। बिना भेदभाव, 2 करोड़ से ज्यादा गरीबों को पक्के घर दिए गए। बिना भेदभाव 8 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को गैस मिला।

-देश आज उस मार्ग पर बढ़ रहा है जहां मजहब की वजह से कोई पीछे न छूटे, सभी को आगे बढ़ने के समान अवसर मिले, सभी अपने सपने पूरे करें। सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास ये मंत्र मूल आधार है। देश की नीयत और नीतियों में यही संकल्प झलकता है।

-पहले मुस्लिम बेटियों को स्कूल ड्रॉपआउट रेट 70% से ज्यादा था वो अब घटकर करीब-करीब 30% रह गया है। पहले लाखों मुस्लिम बेटियां शौचायल की कमी की वजह से पढ़ाई छोड़ देती थीं, अब हालात बदल रहे हैं।

-नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में 21वीं सदी में भारत के छात्र-छात्राओं की जरूरतों को सबसे ज्यादा ध्यान में रखा गया है। हमारे देश के युवा Nation First के आह्वान के साथ देश को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

-एक empower women का हर फैसले में उतना ही योगदान होता है, जितना किसी और का। फिर चाहे बात परिवार को दिशा देने की हो या देश को। मैं देश की अन्य शिक्षा संस्थानों से भी कहूंगा कि ज्यादा से ज्यादा बेटियों को शिक्षा से जोड़ें।

-सरकार higher education में number of enrollments बढ़ाने और सीटें बढ़ाने के लिए भी लगातार काम कर रही है। वर्ष 2014 में हमारे देश में 16 IITs थे। आज 23 IITs हैं। वर्ष 2014 में हमारे देश में 9 IIITs थे। आज 25 IIITs हैं। वर्ष 2014 में हमारे यहां 13 IIMs थे। आज 20 IIMs हैं।

-Medical education को लेकर भी बहुत काम किया गया है। 6 साल पहले तक देश में सिर्फ 7 एम्स थे। आज देश में 22 एम्स हैं। शिक्षा चाहे Online हो या फिर Offline, सभी तक पहुंचे, बराबरी से पहुंचे, सभी का जीवन बदले, हम इसी लक्ष्य के साथ काम कर रहे हैं।

-आज पूरी दुनिया की नजर भारत पर है। जिस सदी को भारत की बताया जा रहा है, उस लक्ष्य की तरफ भारत कैसे आगे बढ़ता है, इसे लेकर सब उत्सुक हैं। इसलिए हम सबका एकनिष्ठ लक्ष्य ये होना चाहिए कि भारत को आत्मनिर्भर कैसे बनाएं।

- पिछली शतब्दी में मतभेदों के नाम पर बहुत समय पहले ही जाया हो चुका है। अब समय नहीं गंवाना है, सभी को एक लक्ष्य के साथ मिलकर नया भारत, आत्मनिर्भर भारत बनाना है।

-समाज में वैचारिक मतभेद होते हैं, लेकिन जब बात राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति की हो, तो हर मतभेद किनारे रख देने चाहिए। जब आप सभी युवा साथी इस सोच के साथ आगे बढ़ेंगे तो ऐसी कोई मंजिल नहीं, जो हम हासिल न कर सकें।

शास्त्री के बाद पहली बार कोई प्रधानमंत्री एएमयू के किसी भी समारोह में शामिल
बता दें कि दिवंगत लाल बहादुर शास्त्री के बाद पहली बार कोई प्रधानमंत्री एएमयू के किसी भी समारोह में शामिल हुआ। साल 1964 में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने दीक्षांत समारोह को संबोधित किया था। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय 1920 में बना था। 17 दिसंबर को तत्कालीन कुलपति मुहम्मद अली मुहम्मद खान राजा महमूदाबाद ने इस विश्वविद्यालय का उद्घाटन किया था।

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