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बिहार विधान सभा चुनाव : चुनावी समीकरण विपरीत देख राजद ने आधा दर्जन सीटों पर बदले प्रत्याशी
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बिहार विधान सभा चुनाव : चुनावी समीकरण विपरीत देख राजद ने आधा दर्जन सीटों पर बदले प्रत्याशी

पटना।राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कई प्रमुख चेहरों ने इस बार अपनी अलोकप्रियता से भयभीत होकर, जातिगत समीकरण विपरीत देखकर या विरोधी दलों के प्रत्याशियों के दबाव में अपनी पुरानी विधानसभा सीटों को छोड़ कर नया ठिकाना तलाश लिया है। वे पुरानी सीटों पर अपनी जीत को लेकर आशंकित थे। सीट बदलने वालों में कद्दावर नेता अब्दुल बारी सिद्दिकी, राष्ट्रीय महामंत्री भोला यादव, पूर्व मंत्री और विधायक तेजप्रताप यादव, शिवचंद्र राम जैसे कई बड़े नाम शामिल हैं। 

बदले समीकरणों से बदलना पड़ा चुनाव क्षेत्र  
राजद नेतृत्व ने इस बार अपने करीब आधा दर्जन नेताओं के चुनाव क्षेत्र बदल दिए हैं। जातिगत समीकरणों के अलावा, दूसरी पार्टियों के सबल प्रतिद्वंद्वियों के दबाव और बढती अलोकप्रियता की वजह से इन नेताओं को नए चुनाव क्षेत्रों की ओर रुख करने पर मजबूर कर दिया है।  इनमें सबसे पहला नाम पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के बड़े पुत्र तेजप्रताप यादव का है। तेजप्रताप ने पिछला चुनाव महुआ विधानसभा क्षेत्र से लड़कर जीता था। इस बार वह हसनपुर सीट से राजद प्रत्याशी हैं। राजद के कद्दावर नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी इस बार अलीनगर से चुनाव मैदान में नहीं उतर रहे हैं। उन्हें अलीनगर की जगह इस बार केवटी सीट ज्यादा सुरक्षित लग रही है।

इस बार हायाघाट से चुनाव लड़ रहे हैं भोला यादव
पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव भोला यादव ने भी इस बार अपना चुनाव क्षेत्र बदल दिया है। उन्होंने इस बार दरभंगा की बहादुरगंज सीट की जगह हायाघाट से मैदान में उतरने का निर्णय लिया है। राष्ट्रीय जनता दल के बड़़े दलित चेहरा माने जाने वाले शिवचंद्र राम को भी इस बार वैशाली की राजा पाकड़ सीट पर अपनी स्थिति कमजोर महसूस हुई तो उन्होंने पातेपुर से भाग्य आजमाने का निर्णय लिया है। इस सूची में यदुवंश यादव का भी नाम शामिल है। पिपरा के मौजूदा विधायक यदुवंश यादव इस बार निर्मली  विधानसभा सीट से राजद के प्रत्याशी हैं।

प्रत्याशियों के नए चुनाव क्षेत्र भी निरापद नहीं 
 
सबसे अहम बात यह है कि इन प्रत्याशियों ने अपना पुराना चुनाव क्षेत्र छोड़कर नए चुनाव क्षेत्र से नामांकन तो कर दिया है, लेकिन उन्हें स्थानीय जनता कितना स्वीकार कर पाती है, यह फिलहाल भविष्य के गर्भ में छिपा है। इतना तो तय है कि इस बार वे अपनी जीत को लेकर उतने निश्चिंत नहीं होंगे, क्योंकि इस बार पिछले चुनाव की तुलना में स्थिति अलग है। पिछले चुनावों की तरह इस बार भी राजद का मुख्य फोकस जातिगत गणित पर ही है। जदयू और भाजपा के प्रत्याशियों के नाम सामने आने के बाद राजद ने अपने कई प्रत्याशियों की विधानसभा सीटें बदली हैं।  

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