
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की 71 सीटों में से 42 सीटों पर विभिन्न सियासी दलों के बागी चुनाव मैदान में अपनी किश्मत आजमाएंगे। भाजपा, कांग्रेस, जेडीयू, राजद और लोजपा सभी पार्टियों को अपने बागी नेताओं से जूझना पड़ रहा है। जो नेता कल तक पार्टी के वफादार कार्यकर्ता हुआ करते थे, वे टिकट नहीं मिलने के बाद बागी बन कर अपनी ही पार्टी के लिए मुसीबत बन कर चुनाव मैदान में आ हटे हैं। बागी नेताओं की वजह से भाजपा, जेडीयू और राजद के कई दिग्गज नेताओं की सीटों पर कठिनाई पैदा हो गई है। पहले जिसे निरापद समझा जा रहा था, वह अब मुश्किल में फंसती दिखाई दे रही है।
हर सियासी दल को मिल रही बागियों से चुनौती
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में सबसे ज्यादा बागी रुख भाजपा नेताओं ने अपनाया है। भाजपा के उन नेताओं ने खासतौर से बागी रुख अपनाया है, जिनकी सीटें जेडीयू या दूसरे सहयोगी दलों के पास चली गई हैं। विधानसभा चुनाव में 23 भाजपा नेताओं ने बगावत का झंडा बुलंद कर सहयोगी दलों के उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। बागियों के लिहाज से जेडीयू दूसरे स्थान पर है। जेडीयू से बगावत कर अब तक 17 लोग चुनाव मैदान में उतर चुके हैं, जबकि आरजेडी के 12 और कांग्रेस के तीन बागी नेता चुनाव मैदान में मजबूती से खड़े हैं।
भाजपा के बागी विधायकों का नया ठिकाना बनी लोजपा
बिहार में सीट शेयरिंग के चलते सबसे ज्यादा एनडीए और महागठबंधन दोनों को बागी नेताओं का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष और संघ प्रचारक रहे राजेंद्र सिंह की दिनारा सीट जेडीयू के खाते में चली गई है, जिसके चलते वह लोजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। इसी तरह से संदेश सीट जेडीयू के खाते में गई तो भाजपा नेता श्वेता सिंह ने रातों रात दल बदल कर लोजपा के टिकट लेकर चुनाव मैदान में उतर गईं। अमरपुर में पिछले चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रहे डॉ. मृणाल शेखर भी बगावत करके लोजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में मौजूद हैं। एक अन्य भाजपा नेता पप्पू सिंह ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक पार्टी से नामांकन किया है। वजीरगंज सीट पर भाजपा के राजीव कुमार पप्पू यादव की पार्टी जाप के टिकट पर मैदान में उतर गए हैं। ब्रह्मपुर से भाजपा का टिकट नहीं मिलने पर भरत शर्मा निर्दलीय चुनाव मैदान में हैं।
टिकट वितरण से नाराज जेडीयू विधायकों ने थामा दूसरे दलों का हाथ
डुमरांव सीट पर जेडीयू ने अंजुम आरा को टिकट दिया है, जिसके चलते यहां जेडीयू के पूर्व विधायक ददन यादव नाराज हो गए हैं। उन्हें किसी दल से टिकट नहीं िमला तो उन्होंने निर्दलीय चुनाव मैदान मेंउतरने निर्णय लिया है। इसी तरह कहलगांव सीट से भागलपुर के जेडीयू सांसद अजय कुमार मंडल के भाई और जेडीयू नेता अनुज कुमार मंडल एनसीपी उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतर गए हैं। जेडीयू की महिला प्रकोष्ठ की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कंचन गुप्ता ने भी बागी बन कर निर्दलीय उम्मीदार केरूप में पर्चा दाखिल किया है। सूर्यगढ़ा सीट पर जेडीयू के लखीसराय विधानसभा के प्रभारी रविशंकर प्रसाद सिंह लोजपा से चुनाव मैदान में हैं। जेडीयू अति पिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव गणेश कुमार बिंद आरएलएसपी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे हैं।
राजद ने टिकट काटे तो बगावत पर उतरने 17 विधायक
बिहार में राजद ने अपनी मौजूदा 6 विधायकों की सीटें सहयोगी दलों को दे दी है। इसके अलावा 11 विधायकों के टिकट काटे हैं, जिसके चलते राजद नेता बगावती रुख अख्तियार किए गुए हैं। टिकारी में आरजेडी नेता कमलेश शर्मा लोजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतर गए हैं। टिकारी से ही राजद के पूर्व विधायक शिवबचन यादव बसपा के टिकट पर चुनाव मैदान में कूद पड़े हैं। तारापुर सीट पर कांग्रेस में बगावत हुई है। राजेश कुमार मिश्रा बागी हो कर निर्दलीय मैदान में उतर गए हैं। तरारी सीट भाजपा के खाते में गई तो लोजपा में बगावत हो गई। पूर्व विधायक सुनील पाण्डेय लोजपा छोड़कर निर्दलीय चुनाव मैदान में मौजूद हैं। इसी तरह बोधगया, इमामगंज, शेरघाटी, रफीगंज, औरंगाबाद, कुटुंबा, नबीनगर, ओबरा,गोह, मखदुमपुर, घोसी, जहानाबाद, अरवल, डुमरांव, शाहपुर, जगदीशपुर, आरा, बड़हरा, संदेश, बरबीघा और लखीसराय में भी बागियों ने चुनाव मैदान में उतर कर मुश्किल खड़ी कर दी है।
Leave Comments