
पटना। बिहार में विधानसभा चुनाव में पहले चरण वाली 71 सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब सबकी निगाहें एनडीए और महागठबंधन के प्रत्याशियों पर टिक गई हैं। दोनों ही गठबंधनों ने मालदार और दागी लोगों ही प्रत्याशियों को टिकट देने कोई परहेज नहीं किया है। पहले चरण की 71 सीटों पर एनडीए और महागठबंधन के कुल 142 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इसमें एनडीए की ओर से भाजपा के 29, जदयू के 35, हम के 6 और वीआईपी का 1 प्रत्याशी चुनाव मैदान में है। जबकि महागठबंधन की ओर से राजद के 41, कांग्रेस के 22 और लेफ्ट के 8 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।
महागठबंधन में करोड़पतियों की संख्या ज्यादा
दोनों गठबंधन के 142 प्रत्याशियों में 111 ने अपनी चल अचल सम्पत्ति एक करोड़ से ज्यादा घोषित की है। इसमें राजद के 71 प्रत्याशियों में 55 की हैसियत एक करोड़ से ज्यादा की है। जबकि एनडीए में करोड़पति प्रत्याशियों की संख्या 48 है। दोनों खेमों के कुल 142 प्रत्याशियों में मात्र 31 ऐसे हैं जिनकी कुल सम्पत्ति एक करोड़ से कम है। पहले चरण में जदयू की प्रत्याशी मनोरमा देवी सबसे ज्यादा अमीर हैं जिन्होंने अपनी सम्पत्ति 89.77 करोड़ घोषित की है।
पहले चरण में महागठबंधन के 71 में से 51 प्रत्याशी करोड़पति
पहले चरण में कुल 71 सीटों पर चुनाव हो रहा है, इसका मतलब है कि 71 प्रत्याशी चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। पहले चरण में चुनाव मैदान में उतरने वाले महागठबंधन के 71 प्रत्याशियों में 51 करोड़पति हैं। जबकि चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार एनडीए के 71 प्रत्याशियों में 48 करोड़पति हैं। विपक्षी महागठबंधन के सदस्य राजद के 41 प्रत्याशियों में से 38 प्रत्याशी करोड़पति हैं। जबकि कांग्रेस के 22 प्रत्याशियों में से 15 करोड़पति हैं। लेफ्ट के आठ प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, जिनमें दो करोड़पति हैं। इसी तरह एनडीए के घटक दलों में भाजपा के चुनाव मैदान में मौजूद 29 प्रत्याशियों में से 17 ने अपनी संपत्ति करोड़ों में बताई है। जबकि जदयू के 35 प्रत्याशियों में से 29 करोड़पति हैं। हम पार्टी के छह प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, जिनमें एक ने चुनाव आयोग में अपने को करोड़पति बताया है। वीआईपी का एकमात्र प्रत्याशी भी करोड़पति है।
दागियों के लिहाज से भी विपक्षी महागठबंधन एनडीए से आगे
पहले चरण में गठबंधन के प्रत्याशियों के क्राइम रिकॉर्ड पर नजर डालें तो यहां भी महागठबंधन एनडीए के तुलना में बीस नजर आता है। महागठबंधन के 71 प्रत्याशियों में 43 के खिलाफ कोई न कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज है। जबकि एनडीए के 71 प्रत्याशियों में ऐसे दागी उम्मीदवारों की संख्या 37 है। दोनों तरफ के प्रत्याशियों को मिला दिया जाएगा तो महागठबंधन में राजद के टिकट पर चुनाव लड़ने जा रहे अनंत सिंह पर सर्वाधिक 38 आपराधिक मामले दर्ज हैं जबकि 30 केस के साथ भाकपा माले प्रत्याशी मनोज मंजिल दूसरे नंबर पर हैं।
महागठबंधन के 71 प्रत्याशियों में 43 के विरुद्ध चल रहे केस
महागठबंधन के 71 प्रत्याशियों में से 43 पर कोई न कोई आपराधिक मामला चल रहा है। पहलेे चरण के चुनाव में महागठबंधन के प्रमुख घटक दल राजद के 41 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। जिनमें 26 लोगों के विरुद्ध कोई न कोई केस चल रहा है। कांग्रेस के 22 प्रत्याशियों में से 22 के खिलाफ और लेफ्ट के 08 प्रत्याशियों में से 05 के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं। इसी तरह एनडीए गठबंधन में भी दागियों की संख्या महागठबंधन से कुछ ही कम है। एनडीए के प्रमुख घटक दल भाजपा कते 29 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, जिनमें से 18 के विरुद्ध कोई न कोई केस चल रहा है। जबकि गठबंधन के दूसरे प्रमुख घटक दल जेडीयू के 37 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, जिनमें से 14 के खिलाफ आपराधिक केस चल रहे हैं। हम के छह में से चार के खिलाफ और वीआईपी के एकमात्र उम्मीदवार के विरुद्ध विभिन्न धाराओं में मामले चल रहे हैं।
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