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अरुण जेटली की जोरदार पिच के बाद, भारत माता की जय के नारों के बीच लोकसभा में 10 प्रतिशत सवर्ण आरक्षण बिल पास
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अरुण जेटली की जोरदार पिच के बाद, भारत माता की जय के नारों के बीच लोकसभा में 10 प्रतिशत सवर्ण आरक्षण बिल पास

नई  दिल्ली, 8 जनवरी, न्यूज़ मंच, लोकसभा में मंगलवार को आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों को 10 फीसदी आरक्षण से जुड़े 124वें  संशोधन बिल को पारित कर दिया गया। बिल के समर्थन में 323 वोट पड़े जबकि 3 सदस्यों ने बिल का विरोध किया। "भारत माता की जय" के नारों के बीच लोकसभा ने कोटा बिल पास कर दिया।

इस बिल के खिलाफ AIADMK सदस्यों ने सदन से वॉकआउट किया। इसके पास होने के बाद, लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई है। 

लोकसभा में कोटा बिल पारित होने के तुरंत बाद, भाजपा प्रमुख अमित शाह ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए पहल करने के लिए सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।

केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली की जोरदार पिच 
केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को सामान्य वर्ग के बीच गरीबों के लिए 10 प्रतिशत कोटा प्रदान करने वाले विधेयक के पारित होने के लिए एक जोरदार पिच बनाई, जिसमें कहा गया था कि कांग्रेस सहित लगभग हर पार्टी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में कोटा का समर्थन किया था।

इस सुझाव को खारिज करते हुए कि यह बिल सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को खारिज कर सकता है, जिसमें कुल कोटा में 50 फीसदी का कैप लगाया गया था, उन्होंने कहा कि कैप केवल जाति आधारित आरक्षण के लिए था, जबकि बिल सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए कोटा चाहता है। 

जेटली ने कहा कि इस संबंध में केंद्र और राज्यों की सरकारों द्वारा पहले भी प्रयास किए गए थे, लेकिन वे विफल रहे क्योंकि वे सामान्य वैधानिक प्रावधानों या अधिसूचनाओं के माध्यम से किए गए थे।

उन्होंने कहा कि संविधान (124 वां संशोधन) विधेयक 2019 आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण के प्रावधानों को लागू करके संविधान में संशोधन करना चाहता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में यह केवल सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन को कोटा के मानदंड के रूप में उल्लेख करता है।

कांग्रेस के घोषणापत्र का हवाला देते हुए, जिसमे पार्टी ने इस तरह के एक कोटे का आह्वान किया था , जेटली ने कांग्रेस से पूछा कि क्या उनके घोषणा पत्र में सामान्य वर्ग के लिए समान कोटे का उल्लेख एक जुमला था।

भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में भी इस बिल का समर्थन किया था और अब इसे लागू करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा, संविधान निर्माताओं ने भी स्थिति और अवसर की समानता के बारे में बात की है।

अपने विरोध प्रदर्शन के लिए विपक्षी दलों पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि अगर वे बिल का समर्थन कर रहे हैं, तो उन्हें पूरे दिल से जाना चाहिए, न कि वे इसे करने में कतराएं। उन्होंने यह भी साफ़ किया, कि संसद द्वारा पारित बिल को लागू किया जाएगा और राज्य विधानसभाओं द्वारा इसकी पुष्टि नहीं की जाएगी।

चुनाव से पहले लिया गया आरक्षण का फैसला चुनावी स्टंट लगता है : मायावती
बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने कहा कि मैं पहले ही सवर्णों को आरक्षण दिए जाने की बात करती रही हूं। उन्होंने कहा देश में गरीब सवर्णों को भी आरक्षण की सुविधा देने की बीएसपी की वर्षों से लंबित मांग को आधे-अधूरे मन और अपरिपक्व तरीके से स्वीकार किया गया है। इसके बावजूद मैं इसका स्वागत करती हूं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार यह फैसला पहले करती तो ज्यादा बेहतर होता। बीएसपी अध्यक्ष ने कहा लोकसभा चुनाव से पहले लिया गया यह फैसला हमें सही नीयत से लिया गया फैसला नहीं बल्कि चुनावी स्टंट लगता है, राजनीतिक छलावा लगता है। 

ओबीसी के लिए बढ़ाया जाए कोटा : रामगोपाल
समाजवादी पार्टी (एसपी) का इस बिल पर स्टैंड अब तक गोलमोल ही रहा है। सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने कहा ओबीसी के लिए भी आबादी के हिसाब से आरक्षण होना चाहिए था, सरकार इस लक्ष्मण रेखा (50 फीसदी)  को पार कर रही है, तो ओबीसी को उनकी आबादी के हिसाब से 54 फीसदी आरक्षण होना चाहिए। हालांकि उन्होंने आखिर में जोड़ा कि आरक्षण के प्रस्ताव का उनकी पार्टी समर्थन करती है। 

जातीय तुष्टीकरण ठीक नहीं : थंबी दुरई
अन्नाद्रमुक सांसद थम्बीदुराई ने कहा- आप जो कानून बना रहे हैं, वह सुप्रीम कोर्ट में टिक नहीं पाएगा। इस देश से जब तक जातिवाद खत्म नहीं होगा, तब तक कुछ नहीं हो सकता है। आजादी के 70 साल बाद भी यहां जातिवाद क्यों है? उत्तर भारत में कई समुदाय पिछड़ा आरक्षण के दायरे में लाए जाने की मांग कर रहे हैं, आपकी सरकार उनके लिए कुछ क्यों नहीं करती?

केंद्र की सरानीय पहल : आठवले
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि यह मेरी पुरानी मांग है, जो अब पूरी हो रही है। सवर्णों को भी आरक्षण दिया जाना चाहिए। यह मैं काफी समय से मांग कर रहा हूं। केंद्र सरकार की इस पहल से गरीब वर्ग से सवर्णों को न्याय मिलेगा और वे समाज की मुख्य धारा में आ सकेगे। दलित और सवर्ण दोनो के लिए ही गरीब समान रूप से अभिशाप है। 

पुराना वादा पूरा नहीं, तो नया क्यों              
शिवसेना नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री रामदास कदम ने केंद्र सरकार द्वारा सामान्य जाति को आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण देने के फैसले पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब मराठा आरक्षण जैसे मुद्दे पेंडिंग हैं, ये नया वादा करना गलत है।  

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