
सुमावली, 24 नवंबर, न्यूज़मंच, सुमावली विधान सभा सीट पर अभी बीजेपी का कब्ज़ा है। मध्य प्रदेश की इस सीट पर हर बार त्रिकोणीय मुकाबला देखा गया है। लेकिन बीजेपी ने टिकट देते वक़्त एक सोची समझी रणनीति के तहत इस बार इस पुराने रिकॉर्ड को तोड़ने की कोशिश की है।
सुमावली विधान सभा सीट पर 2013 का परिणाम
सुमावली विधान सभा सीट की निर्वाचन क्षेत्र संख्या 5 है। यह सीट SC या ST के लिए आरक्षित नहीं है। सुमावली विधान सभा सीट, मोरेना लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के मोरेना जिले में आती है। \
इस सीट पर 2013 के विधान सभा चुनाव में, बीजेपी से Satyapal Singh की जीत हुई थी, और उन्हें 61557 वोट मिले थे। Satyapal Singh के निकटतम प्रतिद्वंदी BSP से Ajab Singh Kushwaha थे जिन्हे, 47481 वोट मिले थे। Satyapal Singh और Ajab Singh Kushwaha के बीच वोटों का अंतर 14076 था। 2018 के विधान सभा चुनाव में बीजेपी के Ajab Singh Kushwaha के विरुद्ध कांग्रेस के Adal Singh Kasana लड़ रहे हैं।
बीजेपी ने सत्यपाल सिंह के जगह अजब सिंह कुशवाहा को टिकट क्यूँ दी?
पिछले चुनाव में बीजेपी के सत्यपाल सिंह जीते थे, और बीजेपी चाहती तो इस बार भी सत्यपाल को ही टिकट देती। लेकिन एक गूढ़ रणनीति के तहत, बीजेपी ने यह टिकिट सत्यपाल को न देते हुए, उन्ही के निकटतम प्रतिद्वंदी अजब सिंह कुशवाहा को दिया। अब देखा जाये तो सत्यपाल का काम इस क्षेत्र में अच्छा था, और किसी भी प्रकार के अंतरकलह नहीं थे। फिर भी, टिकट अजब सिंह कुशवाहा को देने से ये फायदा होगा कि , जो वोट बीजेपी के थे वो तो सुरक्षित हो ही गए, अजब सिंह का बसपा वोट बैंक का कुछ हिस्सा भी बीजेपी के हाथ लग गया। दोनों को मिला कर, अंततः बीजेपी के जीतने के आसार ज़्यादा दिख रहे हैं।
सत्यपाल ने बीजेपी के बड़े नेताओं से साफ कह दिया था कि, उनके बड़े भाई सतीश सिकरवार को ग्वालियर पूर्व से टिकट दिया जाए। उनके इस कदम पर भी उन्हें बहुत तारीफ मिल रही है कि, जब उनके सामने यह विकल्प रखा गया कि परिवार में से किसी एक व्यक्ति को ही टिकट मिल सकती है, तो उन्होंने अपने बड़े भाई का नाम आगे बढ़ाया, और यह फैसला किया की चुनाव में लक्ष्मण बनकर उनकी सेवा में तत्पर रहेंगे। उन्होंने यह कहा की, उनका परिवार सिर्फ पार्टी और जनता की सेवा के लिए कार्य करता है।
पिता रहे विधायक अब बेटे भी राजनीति में सक्रिय
सत्यपाल सिंह सिकरवार और सतीश सिकरवार, गजराज सिंह के बेटे है। गजराज सिंह सुमावली से तीन बार विधायक रह चुके हैं। अब पिता की तरह ही सत्यपाल की लोकप्रियता भी काफी बढ़ चुकी है। और उनके परिवार ने सुमावली सीट को बीजेपी के लिए सुरक्षित बनाये रखने में काफी योगदान दिया है। अब बसपा का वोट बैंक और बीजेपी का अपना बनाया प्रभाव, इस सीट पर बीजेपी को निराश नहीं करेगा। चाहे कितनी भी एंटी इंकम्बैंसी हावी हो जाये, जिसने काम किया है, वह अपनी सीट को सुरक्षित कर देता है।
क्या कहते हैं जातीय समीकरण
जातीय समीकरण देखें तो यहां गुर्जर, सिकरवार (राजपूत), ब्राह्मण और कुशवाह मतदाता का चुनाव में प्रभाव रहता है। इन इलाकों में हुए दलित और अगड़ी जातियों के आंदोलन का असर भी चुनाव पर पड़ सकता है, तो ऐसे में बीजेपी के लिए अजब सिंह कुशवाहा को टिकट दे देने से कुछ स्थिति सुधर गयी है।
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