
नई दिल्ली, 11 जनवरी, न्यूज़ मंच, CBI में पिछले 48 घंटों में भारी उठापटक जारी रही। पहले सुप्रीम कोर्ट के न्यामूर्ति संजय किशन कौल ने सरकार के आदेश के खिलाफ अपना फैसला सुनाया, जिसके तहत, कोर्ट ने कहा सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को हटाने से पहले सेलेक्ट कमेटी से सहमति ली जानी चाहिए थी। कोर्ट ने केंद्र के फैसले को पलटते हुए आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने का आदेश निरस्त कर दिया, और इसके बाद आलोक वर्मा को CBI चीफ के बाद पर बहाल कर दिया गया।
इसी के 24 घंटे के अंदर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को उच्चस्तरीय सिलेक्शन कमिटी ने मैराथन बैठक कर सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को पद दोबारा से हटाने का फैसला ले लिया। समिति के अन्य सदस्यों में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और जस्टिस एके सीकरी शामिल थे। जस्टिस सीकरी देश के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की तरफ से उपस्थित हुए। यह अहम बैठक दो घंटे से अधिक समय तक चली और आखिरकार आलोक वर्मा पर गाज गिरी।
सेलेक्ट कमेटी द्धारा आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक पद से हटाए जाने के बाद नागेश्वर राव ने एक बार फिर देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी की कमान संभाल ली है। नए डायरेक्टर की नियुक्ति होने या अगला आदेश आने तक CBI के अपर निदेशक एम. नागेश्वर राव एजेंसी चीफ का कामकाज देखेंगे।
प्रवर समिति द्वारा हटाए जाने से पहले अपने 24 घंटे के कार्यकाल के दौरान अलोक वर्मा ने सीबीआई में पांच अधिकारियों के तबादले कर दिए, जबकि अंतरिम डायरेक्टर नागेश्वर राव द्वारा स्थानांतरित किए गए अपने चहेते अधिकारियों के तबादले को रद्द कर दिया था। सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा ने गुरुवार को संयुक्त निदेशक अजय भटनागर, डीआईजी एमके सिन्हा, डीआईजी तरुण गाबा, जेडी मुरुगेसन और एडी एके शर्मा का ट्रांसफर कर दिया।
लेकिन वापस सीबीआई की कमान संभालते ही नागेश्वर राव ने 10 और 11 जनवरी को आलोक वर्मा के सीबीआई अधिकारियों का ट्रांसफर रद्द करने के फैसले को पलट दिया है।
बता दें कि इससे पहले जब सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच टकराव सामने आने के बाद भी 24 अक्टूबर को राव को अंतरिम सीबीआई निदेशक की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी। राव ओडिशा कैडर के 1986 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। नागेश्वर राव को इससे पहले 5 साल के लिए CBI का ज्वाइंट डायरेक्टर बनाया गया था।
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