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आने के बाद, जाने से पहले, पांच अफसरों के तबादले कर गए सीबीआई प्रमुख, चहेतों की हुई वापसी
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आने के बाद, जाने से पहले, पांच अफसरों के तबादले कर गए सीबीआई प्रमुख, चहेतों की हुई वापसी

नई दिल्ली, 11 जनवरी, न्यूज़ मंच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने आलोक वर्मा को तगड़ा झटका दिया है। उनको केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) के निदेशक पद से हटा दिया गया है। गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली चयन समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया। इस समिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जस्टिस एके सीकरी और लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल रहे।  इस बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे ने आलोक वर्मा को हटाए जाने के निर्णय से असहमति जताई।

प्रवर समिति द्वारा हटाए जाने से पहले आलोक वर्मा ने सीबीआई में पांच अधिकारियों के तबादले कर दिए, जबकि अंतरिम डायरेक्टर नागेश्वर राव द्वारा स्थानांतरित किए गए अपने चहेते अधिकारियों के तबादले को रद्द कर दिया था। सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा ने गुरुवार को संयुक्त निदेशक  अजय भटनागर, डीआईजी एमके सिन्हा, डीआईजी तरुण गाबा, जेडी मुरुगेसन और एडी एके शर्मा का ट्रांसफर कर दिया। सूत्रों ने बताया है कि अनीष प्रसाद डेप्युटी डायरेक्टर (ऐडमिनिस्ट्रेशन), सीबीआई मुख्यालय बने हुए हैं। वहीं, केआर चौरसिया स्पेशल यूनिट-1 को लीड करेंगे, जिसके पास सर्विलांस का जिम्मा होता है। 

तबादले के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे डीएसपी कुमार
आपको बता दें कि एक दिन पहले बुधवार को कार्यभार संभालते ही आलोक वर्मा ने तत्कालीन चीफ एम नागेश्वर राव द्वारा किए गए लगभग सभी तबादलों को रद करने का आदेश दिया था। हालांकि गुरुवार को सीबीआई के डीएसपी देवेंद्र कुमार अधिकारियों के तबादले के आदेश को पलटने के वर्मा के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गए।

चहेते अफसर वापस लौटे
सूुप्रीम कोर्ट द्वारा बहाली किए जाने के बाद आलोक वर्मा ने अपनी ज्वाइनिंग के पहले ही दिन अपने चहेते अफसर एके बस्सी, अश्वनी गुप्ता, एसपी ग्रुम और ज्वाइंट डायरेक्टर एके शर्मा को वापस बुला लिया है। वर्मा के छुट्टी पर जाने के बाद इनमें किसी अफ़सर का दिल्ली से बाहर तबादला कर दिया गया तो अन्य अफ़सर दूसरी ब्रांच में तैनात कर दिए गए। इनमें डीएसपी एके बस्सी को अंडेमान भेजने के आदेश जारी हुए थे। अपने तबादला आदेश के ख़िलाफ़ वे अदालत भी गए थे। बस्सी को आलोक वर्मा का विश्वासपात्र माना जाता है। राकेश अस्थाना के भ्रष्टाचार मामले की जांच बस्सी को ही सौंपी गई थी।

कुमार की याचिका आज हो सकती है सूचीबद्ध
याचिका जस्टिस नजमी वजीरी के समक्ष शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होने की संभावना है। उन्होंने सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना, कुमार और बिचौलिए मनोज प्रसाद की विभिन्न याचिकाओं पर पहले ही सुनवाई पूरी करके अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इन लोगों ने याचिकाओं में अपने खिलाफ प्राथमिकी को निरस्त करने की मांग की थी। कुमार ने लंबित याचिका में दायर अपने आवेदन में सीबीआई को यह निर्देश देने की मांग की है कि वह आलोक वर्मा और फिर से स्थानांतरित किए गए अधिकारियों को किसी भी तरीके से उनके और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी पर विचार नहीं करने दे। गौरतलब है कि सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को 23 अक्टूबर 2018 की देर रात केंद्र सरकार ने एक आदेश के जरिए जबरन छुट्टी पर भेज दिया था। केंद्र सरकार के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को निरस्त कर दिया। इसकेबा दोबारा कार्यभार संभालते ही उन्होंने ताबड़तोड़ स्थानांतरण किए पूर्व अंतरिम निदेशक के नागेश्वर राव द्वारा किए गए स्थानांतरणों को निरस्त कर दिया था। 

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