
मै देश के ३० वे कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के भविष्य को लेकर बेहद आशान्वित हूं।वे डॉ राजेन्द्र प्रसाद से लेकर अब तक के सबसे कामयाब कृषि मंत्री हैं जो ५० से अधिक किसानों की कुर्बानी पर खड़े अब तक के सबसे लंबे किसान आन्दोलन का सामना कर पाए।उनकी जगह कोई और होता तो अब तक या तो इस्तीफा दे चुका होता या आंदोलन में शामिल हो जाता।
नरेंद्र सिंह तोमर उर्फ मुन्ना से पहले मप्र से सुंदर लाल पटवा भी केंद्र में कृषि मंत्री रहे पर कोई उन्हे याद नहीं करता। देश में कृषि मंत्री पंजाब, हरियाणा या बिहार से ही लिए जाते रहे।अब तक पंजाब, हरियाणा से १७, बिहार से ७ कृषि मंत्री बने। इनमें से डाक्टर राजेंद्र प्रसाद, फखरुद्दीन अली अहमद राष्ट्रपति पद तक पहुंचे। देवीलाल और जगजीवन राम उप प्रधानमंत्री बने। देवगौड़ा और अटल जी ने भी कृषि विभाग अपने पास रखा।
कृषि मंत्रालय सम्हालने वाले सभी किसान नहीं थे, लेकिन किसी को किसानों के इतने लंबे प्रतिरोध का सामना नहीं करना पड़ा। कमजोर दिल वाला कृषि मंत्री तो किसान आन्दोलन झेल ही नहीं सकता था।अब यदि कल ८ जनवरी को वार्ता कामयाब हो जाती है तो मुन्ना कामयाब कृषि मंत्री के रुप में अमर हो जाएंगे जबकि उनके पास न डाक्टर राजेंद्र प्रसाद जैसा कदम है और न शरद पवार जैसा जनाधार।वे स्वर्ण सिंह या सुरजीत सिंह बरनाला या देवीलाल भी नहीं हैं।
ग्वालियर के लिए ये गौरव का विषय है कि जिस पद पर कभी डॉ राजेन्द्र प्रसाद रहे उसी पर ग्वालियर का मुन्ना भाई भी आसीन हैं।
@राकेश अचल
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