
नई दिल्ली,11 दिसंबर न्यूज़ मंच, आज का दिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए विशेष महत्व का है। राहुल की एक साल पहले आज ही के दिन कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर ताजपोशी हुई थी। 11 दिसंबर 2017 को उन्हें निर्विरोध कांग्रेस अध्यक्ष चुना गया था। उनके अध्यक्ष बनने के एक साल बाद यानी 11 दिसंबर को आने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ी बड़ी बढ़त हासिल होती दिखाई दे रही है। यह उनके कांग्रेस अध्यक्ष बनने के पहले साल पर सबसे बड़ा तोहफा है।
पांच राज्यों के ताजा रुझानों में कांग्रेस आगे
मध्यप्रदेश के अब तक के रुझानों में कांग्रेस 110 सीटों पर आगे चल रही है। जबकि भाजपा 107 सीटों पर आगे चल रही है। जबकि 13 सीटों पर अन्य आगे चल रहे हैं। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस 59 सीटों पर आगे रहते हुए लगभग क्लीन स्वीप की स्थिति में आती जा रही है। यहां भाजपा 24 सीटों पर आगे चल रही है। जबकि अन्य 9 सीटों पर आगे हैं। राजस्थान में भाजपा 79 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस 95 सीटों पर आगे चल रही है जबकि 25 सीटों पर अन्य आगे हैं। तेलंगाना में टीआरएस 93 सीटों पर आगे है, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन काफी पीछे रहते हुए केवल 17 सीटों पर आगे है। मिजोरम में एमएनएफ 28 और कांग्रेस 7 सीटों पर आगे है। जबकि, अन्य 5 सीटों पर आगे हैं।
गुजरात-कर्नाटक में भी किया अच्छा प्रदर्शन
इससे पहले के चुनावों में भी राहुल कांग्रेस के गिरते ग्राफ को रोकने में कुछ हद तक सफल हुए हैं। राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद इसकी शुरूआत गुजरात विधानसभा चुनाव से हुई थी। वहां पर उन्होंने मोदी और शाह की जोड़ी को उनके गृह राज्य में जमकर चुनौती दी थी। वहीं कर्नाटक की राजनीति में भी उन्होंने सही रणनीति अपनाकर जेडीएस के साथ गठबंधन करके सरकार बना ली।
उप चुनाव के नतीजे भी उत्साहजनक
अगर चुनावी मोर्चें की बात करें तो कांग्रेस पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया है। हाल में ही कांग्रेस ने राजस्थान में हुए उपचुनाव में अजमेर, अलवर और मंडलगढ़ विधानसभा की सीटों पर जीत हासिल की। कांग्रेस ने बीजेपी के खिलाफ मुंगौली और कोलारस विधानसभा सीटें भी बरकरार रखी। इसके साथ ही भाजपा के कट्टर प्रतिद्वंद्वी चंद्रबाबू नायडू को लगे लगाकर राहुल गांधी ने अपनी गंभीरता का परिचय दिया है। वहीं उनके लचीलेपन वाले व्यवहार ने क्षेत्रीय दलों को यह विश्वास दिलाया है कि राहुल गांधी अपने नए अवतार में बड़े भाई की भूमिका में नहीं रहेंगे। उन्होंने मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में सामूहिक नेतृत्व का सफलतापूर्वक अनुमान लगाया।
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