
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने लक्ष्मी विलास के बाद मंता अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक पर 6 महीनों के लिए पाबंदी लगा दी है। ये बैंक महाराष्ट्र के जालना जिले में है। पाबंदी के बाद अब यह बैंक आरबीआई की अनुमति के बिना कोई कर्ज या उधार नहीं दे सकेगा और न ही पुराने कर्जों का नवीनीकरण या कोई निवेश कर सकेगा। बैंक पर नई जमा राशि स्वीकार करने पर भी पाबंदी लगा दी गई है। वह कोई भुगतान भी नहीं कर सकेगा। हालांकि, ये पाबंदी किन गड़बड़ियों के चलते लगाई गई है आरबीआई ने इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी है।
इससे पहले मंगलवार को आरबीआई ने वित्तीय संकट से गुजर रहे निजी क्षेत्र के लक्ष्मी विलास बैंक पर एक महीने तक के लिए पाबंदियां लगा दी। इस पाबंदी में बैंक का कोई खाताधारक ज्यादा से ज्यादा 25,000 रुपये तक की निकासी कर सकेगा। लक्ष्मी विलास बैंक का डीबीएस बैंक इंडिया लिमिटेड में विलय का प्रस्ताव भी आरबीआई ने रखा। आरबीआई ने लक्ष्मी विलास बैंक को 30 दिन के मोरेटोरियम के अंतर्गत रखने के बाद यह प्रस्ताव रखा है। केंद्रीय बैंक ने बैंक की वित्तीय स्थिति के बुरी तरह बिगड़ने का हवाला देते हुए बैंक के बोर्ड को अपने नियंत्रण में लेने का निर्णय किया है। इसके साथ ही केनरा बैंक के पूर्व गैर-कार्यकारी अध्यक्ष (नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन) टी. एन. मनोहरन को बैंक का प्रशासक नियुक्त किया गया है।
आरबीआई के अनुसार, डीबीएस बैंक सिंगापुर एशिया के प्रमुख वित्तीय सेवा समूह डीबीएस ग्रुप होल्डिंग्स लिमिटेड की सहायक कंपनी है। डीबीएस बैंक इंडिया के पास एक मजबूत बैलेंस शीट है। 31 मार्च को 7,023 करोड़ रुपये की पूंजी के मुकाबले 30 जून को इसकी कुल विनियामक पूंजी 7,109 करोड़ रुपये थी। लक्ष्मी विलास बैंक लिमिटेड को 17 नवंबर को मोरेटोरियम के अंतर्गत रखा गया है, जो 16 दिसंबर तक प्रभावी रहेगा।
पिछले साल सितंबर में रिजर्व बैंक को पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक (पीएमसी) में हो रहे कथित घोटाले का पता चला था। इस घोटाले के सामने आते ही आरबीआई ने बैंक पर पाबंदी लगा दी थी। बैंक को संकट से बचाने के लिए आरबीआई ने 24 सितंबर 2019 को पैसे निकालने पर एक सीमा या मोरेटोरियम लगा दी थी।
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