
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया कि रेपो रेट चार फीसदी के स्तर पर बरकरार रहेगी। इसका अर्थ यह हुआ कि उपभोक्ताओं को ईएमआई पर कोई राहत नहीं मिलेगी। त्योहारी सीजन शुरु होने को देखते हुए उम्मीद की जा रही थी कि आरबीआई उपभोक्ता मांग को प्रोत्साहित करने के लिए रेपो रेट में कटौती कर सकती है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। बीते अगस्त में हुई आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में भी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया था। हालांकि, रिजर्व बैंक इससे पहले हुई दो बैठकों में रेपो रेट में 1.15 फीसदी की कटौती कर चुका है। फिलहाल रेपो दर चार प्रतिशत और रिवर्स रेपो दर 3.35 फीसदी है। शक्तिकांत दास ने कहा कि इस वर्ष दिसंबर महीने से किसी भी समय आरटीजीएस किया जा सकेगा। उन्होंने कहा वित्त वर्ष 2021 की जीडीपी में 9.5 फीसद की मंदी देखी जा सकती है। सितंबर महीने में पीएमआई बढ़कर 56.9 हो गया, यह जनवरी 2012 के बाद से सबसे अधिक है। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में उधार की औसत लागत 5.82 फीसद पर है, यह 16 साल में सबसे कम है।
सभी सेक्टरों में ग्रोथ दिखना सकारात्मक संकेत
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ पॉजिटिव रूख अख्तियार कर लेगा। उन्होंने कहा कि सभी सेक्टरों में ग्रोथ दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा अब कोविड रोकने से ज्यादा फोकस रिवाइवल पर है। उन्होंने जीडीपी ग्रोथ अनुमान निगेटिव में 9.5 फीसदी रखा है। वहीं, छोटे कर्जदारों के लिए 7.5 करोड़ रुपए के कर्ज को मंजूरी दे दी गई है। नए हाउसिंग लोन पर रिस्क वेटेज को कम कर दिया गया है। वहीं, डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा के लिए आरटीजीएस को 24 घंटे लागू करने का प्रस्ताव है।
20,000 करोड़ का अगले हफ्ते ओएमओ करेंगे
आरबीआई गवर्नर दास ने कहा कि इस समय हमारा फाइनेंस को आसान बनाने और ग्रोथ पर ध्यान केंद्रित है। इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए अगले हफ्ते 20,000 करोड़ रुपए का ओपन मार्केट ऑपरेशन यानी ओएमओ करेंगे। उल्लेखनीय है कि ओएमओ के तहत केंद्रीय बैंक सरकारी सिक्योरिटी और ट्रेजरी बिल की खरीद और बिक्री करते हैं। भारत में यह काम आरबीआई करता है। आरबीआई जब अर्थव्यवस्था में पैसे की आपूर्ति बढ़ाना चाहता है, तो वह बाजार में सरकारी सिक्योरिटी खरीदता है। जब उसे अर्थव्यवस्था में पैसे की आपूर्ति घटाने की जरूरत महसूस होती है, तो वह बाजार में सरकारी सिक्योरिटी बेचता है।
पहले 28 सितंबर को होने वाली थी बैठक
रिजर्व बैंक ने पहले मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक का दिन 28 सितंबर तय किया था। लेकिन एमपीसी के सदस्यों चेतन घाटे, पामी दुआ, रविन्द्र ढोलकिया का कार्यकाल सितंबर में ही पूरा हो गया था और उनके स्थान पर तयसमयावधि में नए सदस्यों की नियुक्ति नहीं हो पाने की वजह से इसे आगे के लिए टाल दिया गया था। सरकार ने अब उनके स्थान पर जाने माने अर्थशास्त्रियों अशिमा गोयल, जयंत आर वर्मा और शशांक भिडे को एमपीसी का सदस्य नियुक्त कर दिया है।
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