
नई दिल्ली, 19 अगस्त, न्यूजमंच। भोपाल और इंदौर मेट्रो संचालन की राह अब आसान होती दिख रही है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो 2022- 23 तक प्रदेश के दोनों बड़े शहरों में मेट्रो रेल के पहले चरण की शुरुआत हो जाएगी। इस संबंध में आज नई दिल्ली स्थित केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय में केन्द्र सरकार, मध्यप्रदेश सरकार, मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कार्पोरेशन के बीच करार हुआ। इस मौके पर केन्द्रीय शहरी विकासी मंत्री हरदीप पुरी एवं मध्यप्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री जयवर्द्धन सिंह विशेष रूप से मौजूद रहे। केन्द्र सरकार, मध्यप्रदेश सरकार और मध्यप्रदेश मैट्रो रेल कारपोरेशन के बीच हुए करारनामे के बाद मंत्री जयवर्द्धन सिंह मीडिया से मुखातिब हुए 2022-23 तक इंदौर-भोपाल में मेट्रो का पहला चरण शुरु होने की संभावना जताई।
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री जयवर्द्धन सिंह ने इंदौर-भोपाल में मेट्रो संचालन के लिए हुए केन्द्र और प्रदेश सरकार के बीच हुए करार का श्रेय मुख्यमंत्री कमलनाथ को दिया। उन्होंने कहा कि बीते 9-10 सालों से मेट्रो चलाए जाने को लेकर केवल बातें होती रहतीं थीं, लेकिन मध्यप्रदेश में मेट्रो परियोजना किसी मुकाम पर नहीं पहुंच पा रही थी। सिंह ने कहा कि यह मुख्यमंत्री का दृष्टिकोण और सोच का नतीजा है कि इन दोनों परियोजनाओं पर आज करार हुआ।
मेट्रो परियोजना के लिए हुए एमओयू पर साइन करने के लिए केन्द्र सरकार की ओर से केन्द्रीय शहरी एवं आवास मंत्रालय के सचिव दुर्गा polcitशंकर मिश्रा, मध्यप्रदेश सरकार की ओर से मुख्य सचिव एस.आर.मोहंती और मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कारपोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर संजय दुबे ने हस्ताक्षर किये। इस दौरान मध्यप्रदेश मैट्रो रेल कारपोरेशन के अतिरिक्त प्रबंध संचालक स्वतंत्र सिंह और तकनीकी निदेशक जितेन्द्र कुमार दुबे भी मौजूद रहे। उल्लेखनीय है कि इंदौर-भोपाल दोनों ही शहरों में मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए केन्द्रीय मंत्रिमंडल पहले ही अपना अनुमोदन दे चुका है।
पाल में 7 हजार करोड़, इंदौर में साढ़े सात हजार करोड़ रुपए होगी मेट्रो की लागत
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भोपाल मेट्रो परियोजना की अनुमानित लागत 6 हजार 9 सौ 41 करोड़ 40 लाख रुपए रहेगी। भोपाल मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के तहत कुल 27.87 किलोमीटर के दो कॉरीडोर बनाए जाएंगे। जिसमें पहला कॉरीडोर करोंद सर्कल से एम्स तक 14.99 किलोमीटर का होगा, वहीं दूसरा कॉरीडेार भदभदा चैराहे से रत्नागिरी तिराहा तक 12.88 किलोमीटर का होगा। इंदौर मैट्रो रेल प्रोजेक्ट के अंर्तगत 31.55 किलोमीटर लंबी मेट्रो रेल लाइन तैयार की जाएगी। प्रस्तावित मेट्रो रिंग लाइन बंगाली चैराहा से विजय नगर, भंवर कुंआ, एयरपोर्ट होते हुए पलसिया तक जायेगी। इसकी कुल लागत 7 हजार 5 सौ करोड़ 80 लाख रुपये रहने का अनुमान है। इन दोनों परियोजनाओं की लागत का 20 प्रतिशत केन्द्र सरकार, 20 फीसदी मध्यप्रदेश सरकार वहन करेगी, जबकि बाकी बची 60 प्रतिशत लागत का इंतजाम अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं से कर्ज लेकर किया जाएगा। कर्ज लेने के लिए गारंटी मध्यप्रदेश सरकार देगी।
केन्द्र सरकार चेयरमेन, प्रदेश सरकार नामित करेगी एमडी
मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कार्पोरेशन द्वारा भोपाल-इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट का क्रियांवयन किया जाएगा। इसका संचालन केन्द्र सरकार एवं मध्यप्रदेश सरकार के संयुक्त उपक्रम वाली एक कंपनी द्वारा किया जाएगा। इस कंपनी में केन्द्र एवं मध्प्रदेश सरकार की 50-50 फीसदी हिस्सेदारी होगी। यह कंपनी स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) के रूप कार्य करेगी। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में 10 डायरेक्टर होगें। जिनमें भारत सरकार बोर्ड के चेयरमैन सहित 5 डायरेक्टर नामित करेगी। वहीं मध्यप्रदेश सरकार मैनेजिंग डायरेक्टर सहित 5 डायरेक्टर नामित करेगी।
-अधिग्रहण के लिए प्रदेश सरकार वहन करेगी खर्च
प्रोजेक्ट में आने वाली कठिनाइयों के जल्द निराकरण के लिए प्रदेश सरकार द्वारा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हाई पावर कमेटी बनायी जायेगी। कमेटी में संबंधित विभागों के प्रमुख सचिवों को भी रखा जाएगा। प्रोजेक्ट के तहत किए जाने वाले भूमि अधिग्रहण, पुर्नस्थापन और पुनर्वास में आने वाले खर्च वहन करने की जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की रहेगी। भोपाल मेट्रो के लिए यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक और इंदौर मैट्रो के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक तथा न्यू डेवलपमेंट बैंक से लोन भी लिया जायेगा। भारत सरकार इक्विटी शेयर कैपिटल खरीदेंगी, जिससे प्रोजेक्ट के लिए बहु पक्षीय और द्विपक्षीय लोन की सुविधा मिल सके।
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