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1984 के सिख विरोधी दंगे के एक आरोपी को मौत की सजा दुसरे को आजीवन कारावास - जाने क्या थी दंगों की वजह
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1984 के सिख विरोधी दंगे के एक आरोपी को मौत की सजा दुसरे को आजीवन कारावास - जाने क्या थी दंगों की वजह

नई दिल्ली, 21 नवंबर, न्यूज़ मंच, 1984 में सिख विरोधी दंगों के दौरान, दो लोगों की हत्या के दोषी, दो हमलावरों में से एक को दिल्ली की अदालत ने मंगलवार को मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने दूसरे दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। 

68 वर्षीय नरेश शेरावत और 55 वर्षीय यशपाल सिंह को, दक्षिण दिल्ली के महिपालपुर में, दो लोगों की हत्या का दोषी पाया गया था। दोनों ही आरोपियों पर 35 लाख प्रत्येक रूपए का जुर्माना भी लगाया गया है।

शेरावत महिपालपुर के डाकघर में काम करता था, और यशपाल सिंह एक ट्रांसपोर्टर था।

1 नवंबर,1984 को, हरदेव सिंह और दो अन्य, महिपालपुर में अपनी किराने की दुकानों में थे, जब लोहे की छड़ें, हॉकी स्टिक, पत्थरों, केरोसिन तेल से सशस्त्र 800-1,000 की भीड़ ने उन पर हमला किया और उनकी दुकानों को आग लगा दी।

वे अपने दोस्त सुरजीत सिंह के घर पहुंचे और खुद को अंदर बंद कर लिया। इसके बाद अवतार सिंह भी वहां आ गए। भीड़ के उन सभी को बालकनी से नीच फेंक दिया। फेंकने से पहले ही हरदेव सिंह को मार डाला गया था।

घायलों को सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया जहां अवतार सिंह और हरदेव सिंह की मृत्यु हो गई।

साक्ष्य की कमी के कारण दिल्ली पुलिस ने 1994 में मामला बंद कर दिया था।

2015 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल ने कुल 293 में से 60 मामलों को फिर खोला, और 14 नवंबर 2018 को नरेश शेरावत और यशपाल सिंह को दोषी पाया गया और 20 नवंबर को दिल्ली कोर्ट द्वारा आरोपियों को सज़ा सुनाई गयी ,जो की विशेष जांच दल द्वारा ओपन किये गए मामलों पर पहली सज़ा है ।  

सिख विरोधी दंगों की पूरी जानकारी

तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के अंगरक्षकों द्वारा आपरेशन ब्लू स्टार के विरोध में सन 1984 में नई दिल्ली स्थित उनके सरकारी आवास में उनकी हत्या कर दी थी। इसके बाद दिल्ली समेत पूरे देश में सिखों के विरोध में हिंसा की आग भड़क उठी थी। सिख विरोधी हिंसा में 3000 से अधिक लोग मारे गए थे। जिनमें 2000 लोग अकेले दिल्ली में ही मारे गए थे। इस इन दंगों पर जमकर राजनीति हुई। इसके बाद सीबीआई ने व्यापक नरसंहार पर अपनी टिप्पणी में कहा कि, ये दंगे राजीव गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार और दिल्ली पुलिस ने मिलकर कराए थे।

      
यह थी लोगों के गुस्से की वजह

सिख पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से इसलिए नाराज थे, क्योंकि उन्होंने सन 1970 में इमरजेंसी के दौरान सिखों पर जुल्म ढ़ाए थे। इसके बाद जून 1984 में जब जरनैल सिंह भिंडरावाला के नेतृत्व में खालिस्थान पृथकतावादियों ने स्वर्ण मंदिर पर कब्जा कर लिया था, तब भिंडरावाला के नेतृत्व में सिखों का एक वर्ग सिखों के लिए खालिस्तान नाम से पृथक देश बनाए जाने की मांग पर अड़ा हुआ था। 

श्रीमती गांधी ने इस विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से हल करने का बहुत प्रयास किया, लेकिन जब बात बनती नहीं दिखाई दी तो उन्होंने भारतीय सेना को ऑपरेशन ब्लू स्टार का आदेश दे दिया। जिसके बाद भारतीय सेना में स्वर्ण मंदिर के भीतर प्रवेश कर भिंडरावाला और उनके समर्थकों को मार गिराया था। इस घटना के बाद सिखों का एक वर्ग श्रीमती गांधी से नाराज हो गया था। भिंडरावाले के नेतृत्व में सिखों का एक वर्ग सिखों के लिए अलग से देश बनाने का मांग कर रहा था। जिसे उन्होंने खालिस्तान नाम दिया था। 

बात नहीं मानी तो सेना उप-प्रमुख को हटाया

कहा जाता है कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भारतीय सेना के तत्कालीन वाइस चीफ लेफ्टनेंट जनरल एसके सिन्हा को लालच दिया कि यदि वह अपने जवानों को अमृतसर में मौजूद सिखों पर हमला करने का आदेश देगें तो वह उन्हें आर्मी चीफ बना देंगी। एसके सिन्हा ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आदेश को नहीं माना। 
इस अवज्ञा की वजह से इंदिरा गांधी ने उन्हें हटा कर उनकी जगह जनरल सुंदरजी को सेना का उप-प्रमुख बनाया और जनरल अरुन श्रीधर वैद्य को सेना प्रमुख बना दिया। इसके बाद जनरल वैद्य और लेफ्टनेंट जनरल सुंदरजी ने मिलकर ऑपरेशन ब्लू स्टार को अंजाम दिया। ऑपरेशन ब्लू स्टार में जरनैल सिंह भि‍न्डरावाला और उनके समर्थकों को मारने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री ने सेना को तोपों के साथ चढ़ाई करने के निर्देश दिए थे। इस दौरान भारतीय सेना ने सात विजयंता टैंकों का भी इस्तेमाल किया था।

अंगरक्षकों ने ही कर दी थी इंदिरा की हत्या 

आपरेशन ब्लू स्टार से खफा तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के दो सिख अंगरक्षकों ने ही उनकी हत्या कर दी थी। जिसके बाद पूरे देश में दंगे भड़क उठे थे। इस दौरान हजारों सिखों को अपनी जान से हाथ धोना पडा, हजारों अपंग हुए जबकि लाखों सिख विस्थापित हुए। हजारों सिखों की जीवन भर की कमाई दंगों की भेंट चढ़ गई। हजारों सिखों ने अपने बाल कटवा कर अपनी जान बचाई। हजारों सिख दिल्ली, पंजाब और हरियाणा से भाग कर यूपी, बिहार सहित कई अन्य राज्यों के छोटे-छोटे गांवों में जाकर बस गए। 

सिख विरोधी दंगों की कड़वी यादें आज भी कई सिख परिवारों के दिलों में ताजा हैं।

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