
भोपाल: बाल संरक्षण गृह में सुधार करने और उसमे रह रहे बच्चो की सुरक्षा को देखते हुए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग 'मासी' नामक एक एप लांच करेगा। इसमें जीपीएस लगा होगा। इस एप से बाल संरक्षण गृहों में निरीक्षण के लिए पहुंचने वाले अधिकारियों की वास्तविक समय की जानकारी और उनके द्वारा दिया जा रहा डाटा भी समय पर मिल जाएगा।यह बातें राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने कही है।
बालिकाओं के देखभाल के लिए नियुक्त किए जाएंगे काउंसलर
भोपाल में बालिकाओं के यौन शोषण से जुड़े एक मामले का जिक्र करते हुए आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने पीड़ित बालिकाओं से संरक्षण गृह में मुलाकात की है। बालिकाओं ने अंग्रेजी व विज्ञान पढ़ने की इच्छा जताई है। बालिकाओं को मुआवजा दिलाया जाएगा। इसके साथ ही इन बालिकाओं की सुरक्षा, व्यवस्था और देखभाल के साथ उन्हें मानसिक स्थिति से उबरने के लिए काउंसिलिंग को जरूरी बताया।इसके लिए यहां पर एक स्थायी काउंसलर नियुक्त किया जाए।
उन्होंने आगे बताया कि आयोग देश के धार्मिक स्थलों पर बच्चों द्वारा भीख मांगने और बाल श्रम रोकने के लिए परिवार आधारित देखभाल व्यवस्था के लिए गाइड लाइन जारी करने जा रहा है। इसके लिए प्रथम चरण में देश के 50 पर्यटन स्थल चुने गए हैं, जिनमें मध्य प्रदेश के छह स्थान सांची, खजुराहो, उज्जैन, ओरछा, ओंकारेश्वर व पीतांबरा पीठ का चयन किया गया है। आयोग ने देशभर के 7 हजार 134 और प्रदेश के 115 संस्थाओं का निरीक्षण किया है।
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