
नई दिल्ली, 19 दिसंबर, न्यूज़ मंच, 2014 के लोकसभा चुनावों की दौड़ में, भारतीय जनता पार्टी के नेता नरेंद्र मोदी ने देश के प्रधान मंत्री बनने पर 100 दिनों के भीतर विदेशों में काले धन वापस लाने का वादा किया था। 2014 में आम चुनाव जीतकर बीजेपी के रूप में प्रधान मंत्री बनने वाले मोदी ने यह भी कहा था, कि अगर यह काला धन वापस आ गया, तो देश में हर गरीब व्यक्ति को अपने खाते में 15 लाख रुपये मिलेंगे।
बीजेपी का यह वादा भी कुछ वैसा ही था, जैसा अब कांग्रेस ने 2019 की दौड़ में शामिल होकर पूरे देश के किसानो की क़र्ज़ माफ़ी को लेकर कर दिया है। और इस वादे के डैम पर तीन राज्यों में विजय प्राप्र्त भी कर ली। कुछ समय पहले तक ये वादे हवा बाज़ी लगते थे, लेकिन अब कांग्रेस ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जब ऐलान किया कि, किसानो का क़र्ज़ माफ़ किया जा रहा है, तो बीजेपी पर भी अपने वादे पूरे करने का दबाव आने लगा।
बीजेपी की सरकार आने के बाद इस तरह की किसी रकम (15 लाख हर गरीब के खाते में) का कोई हस्तांतरण कभी नहीं हुआ। इसपर, विपक्षी दलों ने पिछले कुछ वर्षों से प्रधान मंत्री और उनकी बीजेपी की अगुआई वाली एनडीए सरकार का मज़ाक उड़ाया है।
हालांकि, अब केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले यह बताने के लिए सामने आये हैं कि, क्यों 15 लाख रुपये प्रत्येक को लोगों के बैंक खातों में स्थानांतरित नहीं किया गया था।
अठावले ने कहा कि पैसा धीरे-धीरे लोगों के खातों में आ जाएगा, न कि एक किश्त में। उन्होंने भारतीय रिज़र्व बैंक को पैसे के हस्तांतरण में देरी के लिए दोषी ठहराया।
"15 लाख रुपए (हर बैंक खाते में जैसा कि केंद्र सरकार द्वारा वादा किया गया) धीरे-धीरे आ जायेंगे, एक ही किश्त में नहीं। आरबीआई से पैसे मांगे लेकिन वे नहीं दे रहे हैं, तो राशि एकत्र नहीं की जा सकती है। कुछ तकनीकी मुद्दे हैं।" ऐसा मंत्री ने सोमवार को एक बड़ी समाचार एजेंसी से कहा।
इस साल की शुरुआत में, प्रत्येक नागरिक के बैंक खाते में 15 लाख रुपये जमा करने के वादे के बारे में पूछे जाने वाले आरटीआई आवेदन का जवाब देते हुए पीएमओ ने यह नहीं बताया कि ऐसा क्यों नहीं हुआ था। पीएमओ ने कहा कि 'सूचना के अधिकार" अधिनियम के तहत मांग की गई जानकारी को "सूचना" नहीं माना जा सकता है।
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