
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में देश की जीडीपी में 7.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। कोरोना के चलते किए गए लॉकडाउन की वजह से पहली तिमाही में जीडीपी में 23.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। अगर पहली तिमाही से तुलना करें तो अर्थव्यवस्था को रिकवरी मिली है। यह गिरावट अब तक के सभी विश्लेषकों के अनुमानों से काफी कम है। सभी विश्लेषकों ने 8% से 12% तक की गिरावट का अनुमान जताया था। सबसे कम अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का था। इसने 8.6% की गिरावट का अनुमान जताया था। यह आंकड़ा एनएसओ ने जारी किया।
लॉकडाउन के बाद इकोनॉमी में रफ्तार देखने को मिली है। सितंबर में वाहनों की बिक्री, रीयल एस्टेट, मैन्युफैक्चरिंग PMI और रेल भाड़ा कमाई पिछले सितंबर के मुकाबले अधिक रहे। इसके अलावा सितंबर में इस साल पहली बार इनकम टैक्स कलेक्शन में पिछले साल के समान महीने के मुकाबले बढ़ोतरी रही। अक्टूबर में जीएसटी कलेक्शन भी 1.05 लाख करोड़ से अधिक रहा। सेल्स में बढ़ोतरी से आईएचएस मार्किट मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई भी अक्टूबर में सितंबर के 56.8 के मुकाबले बढ़कर 58.9 हो गया जोकि पिछले दस साल में सबसे अधिक है। जुलाई-सितंबर के दौरान मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने 0.6 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की। अपने अच्छा प्रदर्शन जारी रखते हुए कृषि क्षेत्र सितंबर तिमाही में 3.4 फीसदी की दर से आगे बढ़ा, वहीं ट्रेड व सर्विसेज सेक्टर में 15.6 फीसदी की गिरावट रही.।पब्लिक स्पेंडिंग 12 फीसदी कम रही।
पिछली तिमाहियों में GDP ग्रोथ
Q1FY21: (-)23-9%
Q4FY20: 3.1%
Q2FY20: 4.5%
Q3FY20: 4.7%
Q1FY20: 5%
जानिए क्या है जीडीपी?
ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (जीडीपी) किसी एक साल में देश में पैदा होने वाले सभी सामानों और सेवाओं की कुल वैल्यू को कहते हैं। जीडीपी किसी देश के आर्थिक विकास का सबसे बड़ा पैमाना है। अधिक जीडीपी का मतलब है कि देश की आर्थिक बढ़ोतरी हो रही है। अगर जीडीपी बढ़ती है तो इसका मतलब है कि अर्थव्यवस्था ज्यादा रोजगार पैदा कर रही है। इसका यह भी मतलब है कि लोगों का जीवन स्तर भी आर्थिक तौर पर समृद्ध हो रहा है। इससे यह भी पता चलता है कि कौन से क्षेत्र में विकास हो रहा है और कौन सा क्षेत्र आर्थिक तौर पर पिछड़ रहा है।
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