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सिंधिया के गढ़ में काँग्रेस की मुश्किल, जजपाल सिंह जज्जी के नामांकन को भाजपा की चुनौती, जाति प्रमाण पत्र पर लगाई आपत्ति, फैसला आना बाकी
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सिंधिया के गढ़ में काँग्रेस की मुश्किल, जजपाल सिंह जज्जी के नामांकन को भाजपा की चुनौती, जाति प्रमाण पत्र पर लगाई आपत्ति, फैसला आना बाकी

न्यूज़ मंच. भोपाल. सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ माने जाने वाले अशोकनगर में कांग्रेस मुश्किलों में फंसी नजर आ रही है। कांग्रेस प्रत्याशी जजपाल सिंह जज्जी के नामांकन पत्र पर भाजपा प्रत्याशी लड्डूराम कोरी एवं अन्य 3 प्रत्याशियों ने आपत्ति दर्ज की है। इन सभी प्रत्याशियों ने अपनी आपत्ति में कांग्रेस उम्मीदवार जजपाल सिंह जज्जी के जाति प्रमाण पत्र को आधार बनाया है। साथ ही जज्जी पर आरोप लगाया है कि नामांकन पत्र भरने के दौरान दिए गए शपथपत्र में जज्जी ने अपने ऊपर भृष्टाचार के एक मामले में ग्वालियर लोकयुक्त में दर्ज आपराधिक प्रकरण को भी छिपाया है। निर्वाचन अधिकारी नीलेश शर्मा ने सोमवार दोपहर दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलों को सुनने के बाद फैसला कल (मंगलवार) दोपहर दो बजे सुनाए जाने का एलान किया।

जजपाल सिंह जज्जी के नामांकन पर बीजेपी ने लगाई आपत्ति - पृष्ठ 1 

जजपाल सिंह जज्जी के नामांकन पर बीजेपी ने लगाई आपत्ति - पृष्ठ 2 

जजपाल सिंह जज्जी के नामांकन पर बीजेपी ने लगाई आपत्ति - पृष्ठ 3

भाजपा: फर्जी है जज्जी का जाती प्रमाणपत्र

भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार लड्डूराम कोरी ने निर्वाचन अधिकारी के समक्ष 6 बिंदुओं के आधार पर कांग्रेस उम्मीदवार के नामांकन को लेकर आपत्ति दर्ज की है। भाजपा का तर्क है कि जजपाल सिंह ने पहले सामान्य फिर पिछड़ा वर्ग और उसके बाद अनुसूचित जाती वर्ग के लिए आरक्षित अशोकनगर विधानसभा से चुनाव लड़ा। सामान्य वर्ग से होने के बावजूद भी जज्जी ने अनुसूचित जाति वर्ग से चुनाव लड़ने के लिए फर्जी जाती प्रमाण पत्र का सहारा लिया। इस संबंध में तत्कालीन कलेक्टर अशोक भार्गव एवं एसडीएम जांच कर अपनी रिपोर्ट दे चुके हैं, जिसके अनुसार जजपाल सिंह जज्जी अनुसूचित जाति वर्ग में नहीं आते। इसी रिपोर्ट के आधार पर राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने जज्जी के जाति प्रमाणपत्र को निरस्त कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की अनुशंसा की थी, लेकिन जज्जी ने 2012 में छानबीन समिति के निर्णय के विरुद्ध ग्वालियर हाई कोर्ट से एक स्टे ऑर्डर हासिल किया था, जिसके अनुसार छानबीन समिति के निर्णय के पालन में रोक लगाई गई थी। भाजपा प्रत्याशी के वकील का तर्क था कि माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा 28 मार्च 2018 को जारी किए गए एक निर्णय में आदेशित किया गया है कि उच्च न्यायालय सहित सभी न्यायालयों में पारित स्टे ऑर्डर 6 माह तक की अवधि के लिए मान्य रहेगा, जब तक कि स्पष्ट बोलता हुआ आदेश स्थगन बढ़ाने हेतु पारित न किया गया हो। ऐसी स्थिति में जज्जी का स्थगन आदेश स्वतः निरस्ती योग्य है, क्योंकि 2012 में जज्जी द्वारा हासिल किए गए स्थगन आदेश के बाद उनके जाति प्रमाणपत्र से जुड़े मामले में कोई सुनवाई ही नहीं हुई है। इसके अलावा भाजपा प्रत्याशी लड्डू राम कोरी के वकील गोपेश सिक्केवाल ने एक अन्य आधार पर भी कांग्रेस प्रत्याशी जजपाल सिंह जज्जी के नामांकन को निरस्त किए जाने की मांग की। सिक्केवाल ने बताया कि कांग्रेस प्रत्याशी ने अपने नामांकन फॉर्म के साथ संलग्न शपथ पत्र में आपराधिक रिकॉर्ड एवं दर्ज प्रकरणों के कॉलम में लोकायुक्त पुलिस ग्वालियर द्वारा 30 जनवरी 2017 को दर्ज की गई एफआईआर का खुलासा ही नहीं किया है और न ही अपने घोषणा पत्र में इस आपराधिक प्रकरण की घोषणा की है। सिक्केवाल ने कहा कि इस संबंध में भी माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा 25 सितंबर 2018 को एक आदेश जारी किया गया है, जिसके आधार पर कांग्रेस प्रत्याशी जजपाल सिंह जज्जी का नामांकन निरस्त किए जाने योग्य है। 

कांग्रेस : हमारे पास डबल बेंच का स्टे ऑर्डर, हमारा पक्ष मजबूत

कांग्रेस प्रत्याशी जजपाल सिंह जज्जी के वकील एसएस गौतम का कहना है कि माननीय हाई कोर्ट द्वारा इस मामले में स्थगन आदेश दिया गया है, जब तक कि उसका अंतिम निराकरण नहीं हो जाता , तब तक उसका कास्ट सर्टिफिकेट मान्य है। भाजपा के वकील द्वारा सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय से जुड़ी रूलिंग, जिसके अनुसार कोई भी स्थगन आदेश 6 महीने तक कि सीमित अवधि के लिए मान्य है, के संबंध ने गौतम ने कहा कि उनके ख्याल से वह ऑर्डर सिविल या क्रिमनल ट्रायल कोर्ट के लिए है, कांस्टीट्यूशनल कोर्ट के लिए वह ऑर्डर नहीं है। वहीं जजपाल सिंह जज्जी द्वारा अपने नामांकन पत्र में लोकयुक्त में दर्ज प्रकरण छिपाए जाने पर उनके वकील ने कहा कि उनके क्लाइंट को इस प्रकरण की जानकारी है नहीं थी। वैसे भी क्रिमिनल केस और एफआईआर में डिफरेंस होता है। उस मामले की जांच जारी है, उसकी चार्जशीट भी फाइल नहीं हुई है। जज्जी के वकील ने कहा कि उन्होंने यह जानकारी जानबूझ कर नहीं छिपाई है। वहीं
कांग्रेस प्रत्याशी जजपालसिंह जज्जी का कहना है कि भाजपा प्रत्याशी की आपत्ति पर हमने अपना पक्ष रखा है। न्यायालीन मामला है सब जानते हैं, हाईकोर्ट डबल बेंच से हमारे पास स्टे ऑर्डर है। इसलिए हमारा पक्ष मजबूत है।

कुछ यूं चला आपत्ति का घटनाक्रम

अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित अशोकनगर विधानसभा सीट के भाजपा प्रत्याशी लड्डूराम कोरी और निर्दलीय प्रत्याशी दिनेश अहिरवार, जीवनदास और बीपीसिंह ने कांग्रेस प्रत्याशी जजपालसिंह जज्जी की जाति पर सोमवार को दोपहर 12 बजे आपत्ति लगाई और जाति प्रमाण पत्र को फर्जी बताया। साथ ही नामांकन के घोषणा पत्र में जज्जी पर लोकायुक्त में दर्ज प्रकरण को छिपाने का भी आरोप लगाया।  इस पर रिटर्निंग ऑफीसर ने दोनों पक्षों को सुनने के लिए दोपहर दो बजे का समय निर्धारित किया। मामले पर बहस के लिए आपत्तिकर्ताओं ने करीब एक दर्जन वकीलों को बुलाया। जिसमें कांग्रेस प्रत्याशी ने दिल्ली से एडवोकेट अशोक देशवाल और ग्वालियर से एडवोकेट एसएस गौतम को, भाजपा प्रत्याशी ने भोपाल से एडवोकेट गोपेश सिक्केवाल को लेकर आए। हालांकि रिटर्निंग ऑफीसर नीलेश शर्मा ने सिर्फ तीन वकीलों को ही कार्यालय में पक्ष रखने की अनुमति दी। इससे करीब एक घंटे तक रिटर्निंग ऑफीसर  कार्यालय में कांग्रेस प्रत्याशी की जाति पर बहस चली। जहां पर दोनों ही पक्षों ने अपने-अपने पक्ष रखे। इससे दोनों ही प्रत्याशियों के समर्थकों की भीड़ जुटी रही और यह मामला पूरे दिन जिलेभर में चर्चा का विषय बना रहा। 

चर्चा: यदि नामांकन निरस्त हुआ तो क्या होगा?

कांग्रेस प्रत्याशी के जाति प्रमाण पत्र और लोकायुक्त में दर्ज मामले को छिपाने के मामले के बाद जिलेभर में राजनैतिक पार्टियों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। इस घटनाक्रम के बाद अब लोगों में चर्चाएं शुरू हो गई हैं कि यदि कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन निरस्त हुआ तो क्या होगा। कांग्रेस की तरफ से विधानसभा सीट पर जज्जी के अलावा तीन अन्य अभ्यर्थियों ने अपने नामांकन फॉर्म जमा किए हैं। यदि नामांकन निरस्त हुआ तो कांग्रेस को अपने दूसरे अभ्यर्थी को अधिकृत प्रत्याशी बनाया जा सकता है। वहीं यदि फैसला कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में आया तो निर्वाचन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी इस जाति प्रमाण पत्र को कोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी।

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