
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए जारी निर्वाचन प्रक्रिया के तहत 28 नवंबर 2018 को वोट डाले जाएंगे। वहीं वोटों की गिनती 11 दिसंबर को की जाएगी। भारतीय जनता पार्टी ने पूरी 230 विधानसभाओं के लिए अपने प्रत्याशियों की घोषणा की है, जबकि कांग्रेस ने 229 सीटों पर ही अपने प्रत्याशी उतारें हैं। कांग्रेस ने टीकमगढ़ जिले की जतारा विधानसभा अपने गठबंधन वाली लोकतांत्रिक जनता दल के लिए छोड़ दी है। कांग्रेस यहां लोकतांत्रिक जनतादल के प्रत्याशी का ही समर्थन करेगी। इस तरह कांग्रेस अथवा उसके सहयोगी दल भी 230 विधानसभाओं में अपनी दावेदारी कर रहे हैं।
मध्यप्रदेश की 230 विधानसभाओं पर सीधा मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच है, हालांकि प्रदेश की कुछ गिनी-चुनी सीटों पर बसपा भी अपनी मौजूदगी का दमदार एहसास कराती।
मध्य प्रदेश में कुल 231 विधानसभा सीटें हैं. 230 सीटों पर चुनाव होते हैं जबकि एक सदस्य को मनोनीत किया जाता है. 2013 के चुनाव में बीजेपी को 165, कांग्रेस को 58, बसपा को 4 और अन्य को तीन सीटें मिली थीं.
9 नवंबर को नामांकन भरे जाने का आखरी दिन था। ऐसे में सभी पार्टियों ने बहुत मंथन के बाद अपने अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतारने का निर्णय लिया है।
आइये जानते है भोपाल में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबले में 2013 में क्या समीकरण रहे, और 2018 में पिछले समीकरणों का क्या प्रभाव पड़ेगा :
गोविंदपुरा विधानसभा
बीजेपी ने अपने कद्दावर नेता बाबू लाल गौर की पुत्रवधु कृष्णा गौर को इस सीट से अपना उम्मीदवार बना कर उतरा है। कई दिनों तक इस सीट को होल्ड पर रखा गया लेकिन उम्मीदवार का नाम घोषित होने बाद कोई अचम्भा नहीं हुआ, क्यूंकि यह तो तय था की इस सीट पर बीजेपी कोई रिस्क नहीं लेगी। 1980 से ही यह सीट बीजेपी के पास रही है। इस दौरान यह भोपाल की सबसे चर्चित सीट रही है।
वहीँ कांग्रेस ने गिरीश शर्मा को कृष्णा गौर के विरुद्ध मैदान में उतरा है। इस सीट पर कुल वोटर 355115 हैं, जिसमे पुरुष वोटर की संख्या 1,88,712 हैं और महिला वोटर 1,66,176 हैं। 2013 के इस सीट पर कुल 1,82,783 वोट पड़े थे और कुल 61.53% वोटिंग हुई थी। बाबूलाल गौर के 1,16,586 वोट मिले थे, वहीँ गोविंद गोयल को 45,942 वोट मिले थे। हार जीत का अंतर काफी बड़ा था। बाबूलाल गौर 70,644 वोटों से जीते थे।
भोपाल दक्षिण-पश्चिम विधानसभा
यह भी भोपाल के एक और बहुत ही चर्चित सीट है। इस सीट पर बीजेपी के उमाशंकर गुप्ता के विरुद्ध कांग्रेस के पीसी शर्मा खड़े हुए हैं। उमाशंकर गुप्ता इस सीट पर एक मजबूत उम्मीदवार हैं।
सुबह इनके घर लगने वाली जनता की भीड़ को जनता दरबार के नाम से जाना जाता है, जहाँ आम जनता अपनी समस्याओं की सुनवाई के लिए गुहार लगाती थी। इनकी संघ की पृस्ठभूमि है इसलिए बीजेपी कार्यकर्ताओं और बीजेपी तबके से सीधे इनका जुड़ाव है।
हालाँकि उमाशंकर गुप्ता को इस सीट पर एंटी इंकम्बेंसी फैक्टर का सामना करना पड़ सकता है जिसका फायदा कांग्रेस के उम्मीदवार पीसी शर्मा को मिल सकता है। जनता दरबार के द्वारा जनता ने इन तक बहुत सी समस्याएं पहुंचाई, लेकिन निराकरण नहीं मिलने से गुप्ता को जनता की नाराज़गी का सामना करना पड़ सकता है। जनता के प्रति इनका रुख कुछ रूखा सा महसूस किया गया है।
इसी दौरान, पीसी शर्मा ने जनता से सीधा संपर्क बनाये रखा और ज़मीनी स्तर पर लोगों के लिए काम किये। जिससे पीसी शर्मा ने अपनी जड़ो को मजबूत कर लिया और इसका फायदा उन्हें चुनाव में हो सकता है।
इस सीट पर कुल वोटर 2,14,808 हैं, जिनमे पुरुष वोटर 1,13,483 हैं और महिला वोटर 1,01,143 . 2013 के चुनाव में इस सीट पर कुल 1,31,578 वोट पड़े थे, जो कि 64.79% वोटिंग प्रतिशत था। उमाशंकर गुप्ता को 2013 म 71,167 वोट मिले थे और कांग्रेस से संजीव सक्सेना 52,969 वोट मिले थे. इससे पता चलता है की वोटों का अंतर मात्र 18,198 रहा, जिसे पीसी शर्मा जैसे उम्मीदवार आसानी से पूरा कर सकते है। 2003 के चुनाव में में गुप्ता और शर्मा आमने-सामने हुए थे, लेकिन तब पीसी शर्मा चुनाव हार गए थे। यही वजह थी कि पीसी शर्मा ने अपनी जड़ो को मजबूत बनाने के लिए पूरा वक़्त दिया और कांग्रेस को उनसे इस सीट पर काफी उम्मीदें हैं।
नरेला विधानसभा
यह सीट साल 2008 में अस्तित्व में आई तभी से ही इस सीट पर बीजेपी का कब्ज़ा है। वर्तमान में इस बीजेपी के विश्वास सारंग विधायक हैं। उन्होंने 2013 के चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार सुनील सूद को 26,970 वोटों से हराया था। सारंग शिवराज सरकार में राज्यमंत्री हैं। इससे पहले 2008 के चुनाव में भी यहां पर बीजेपी को ही जीत मिली थी।
कांग्रेस ने इस सीट से पहली बार महेंद्र सिंह चौहान को उतारा है। इस सीट पर कुल वोटर 3,10,545 हैं जिनमे पुरुष वोटर 1,65,009 और महिला वोटर 1,45,358 हैं।
दावा किया जा रहा है नरेला में सारंग ने विकास के कई काम किए हैं। उन्होंने यहां पर कई फ्लाईओवर बनवाए हैं। बता दें कि सारंग खुद सिविल इंजीनियर हैं। इस बार इस सीट पर आम आदमी पार्टी ने भी अपना उम्मीदवार उतारा है. 'आप' ने रिहान जाफरी को टिकट दिया है। ऐसे में इस बार बीजेपी का मुकाबला सिर्फ कांग्रेस से ही नहीं आम आदमी पार्टी से भी है। इस इलाके में ब्राह्मण, मुस्लिम, कायस्थ वोटर्स की संख्या अच्छी खासी है। यही लोग चुनाव में किसी भी उम्मीदवार की जीत में अहम भूमिका निभाते हैं।
भोपाल उत्तर विधानसभा
बीते बीस सालों से अभेद किले के रूप में राजधानी की उत्तर विधानसभा कांग्रेस की मजबूत सीट मानी जाती है। वर्ष 1998 से इस सीट से कांग्रेस विधायक आरिफ अकील का कब्जा रहा है। लेकिन इस बार के विधानसभा चुनावों में जीत बरकरार रखना कांग्रेस के लिए मुश्किल होगा। करीब 1 लाख 26 हजार मतदाताओं के इस क्षेत्र में सालों पुरानी समस्याएं आज भी जस की तस है। राजधानी के सबसे पिछड़े क्षेत्र में से एक उत्तर सीट पर आज भी मुद्दे मूलभूत आवश्कताओं से जुड़े हैं।
मुस्लिम बाहुल्य इस विधानसभा में पानी की किल्लत, ट्रैफिक,अव्यवस्थित बसाहट, अवैध कब्जे और गरीबी के साथ-साथ गैस पीड़ितों की भी समस्याएं हैं। उत्तर विधानसभा में गैस पीड़ित मतदाताओं की संख्या कम नहीं है लिहाजा पेंशन, रोजगार और गैस राहत के अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी भी एक बड़ा मुद्दा है। गैस राहत से जुड़े आधा दर्जन संगठन लगातार सरकार के खिलाफ लामबंदी कर रहे हैं। मतलब साफ है कि भाजपा सरकार पर गैस पीड़ितों का रोष भारी पड़ सकता है। अब तक इस क्षेत्र के गैस पीड़ितों का वोट बैंक कांग्रेस के पाले में रहा है। लेकिन स्थानीय विधायक की क्षेत्र में ज्यादातर गैर मौजूदगी और व्याप्त समस्याओं के कांग्रेस से यह वर्ग खफा है।
हालांकि यहां मुद्दों से ज्यादा जातिगत समीकरण ही जीत-हार तय करते हैं। अल्पसंख्यकों में विधायक आरिफ अकील की बेहद गहरी पकड़ मानी जाती है लेकिन इस बार क्षेत्र में उनकी निष्क्रियता भी लोगों में नाराजगी की बड़ी वजह है। वहीं इस बार भाजपा ने सीट पर पकड़ बनाने के लिए पार्षदों के माध्यम से पिछली बार की अपेक्षा ज्यादा काम कराया है। बीजेपी ने यहाँ से फातिमा रसूल सिद्दीकी को अपना उम्मीदवार बनाया है, लेकिन देखना ये है की वोटर बीजेपी के नाम की छांव में फातिमा रसूल सिद्दीकी को वोट देंगे या नहीं। इस लिहाज से इस सीट पर भी चुनावी समीकरण बहुत रोचक होने वाले हैं।
उत्तर विधानसभा में अब तक सिर्फ एक बार खिला कमल
उत्तर विधानसभा में कुल वोटर 2,34,434 जिनमे पुरुष वोटर 1,20,436 और महिला वोटर 1,13,881 हैं। 2013 में इस सीट पर 1,44,253 वोट पड़े थे जो कि 63.94% वोटिंग था। आरिफ अकील को 73070 वोट मिले थे और उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी आरिफ बेग 6664 के अंतर से।
यह सीट 1977 में अस्तित्व में आई। तब पहली बार इस सीट से जनता पार्टी के हामिद कुर जीते। इसके बाद 1980 और 1985 में कांग्रेस के रसूल अहमद चुनाव जीते। 1990 में हुए चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। 1990 में निर्दलीय उम्मीदवार आरिफ अकील को जीत मिली। इस सीट पर बीजेपी का खाता साल 1993 में खुला, जब रमेश शर्मा यहां से विजयी हुए । 1998 से लेकर अब तक आरिफ अकील विधायक हैं।
हुजूर विधानसभा
हुजूर विधानसभा सीट मध्य प्रदेश के भोपाल जिले की सीट है. इस सीट पर भाजपा ने रामेश्वर शर्मा को फिर से उम्मीदवार बनाया है, वहीँ कांग्रेस ने नए चेहरे, नरेश ज्ञानचंदानी, को मौका दिया है। इस विधानसभा सीट में वोटरों की कुल संख्या 2,95,737 है, जिनमे पुरुष 1,54,974 हैं और महिला वोटर 1,40,540 हैं। 2013 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर रामेश्वर शर्मा (बीजेपी) ने 1,08,994 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी।उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी राजेंद्र मंडलोई को 59,604 मतों के अंतर से हराया था।
बैरसिया विधानसभा
बैरसिया विधानसभा क्षेत्र से भाजपा ने मौजूदा विधायक विष्णु खत्री को और कांग्रेस ने महिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष जय श्री हरि करण को टिकट दिया है।
भाजपा विधायक विष्णु खत्री ने पिछले वादे पूरे नहीं किए, जिससे मतदाता नाराज हैं। इस सीट पर कुल वोटर 2,10,840 जिसमे पुरुष वोटर 1,11,186 और महिला वोटर 99,567 . 2013 के चुनाव में कुल 1,41,258 वोट पड़े थे जो कि 72.37% वोटिंग प्रतिशत था। बीजेपी के विष्णु खत्री को 76,657 वोट मिले थे, वही महेश रत्नाकर को 47,353 वोट मिले थे। दोनों के बीच हार जीत का अंतर 19,304 रहा था।
इस सीट पर गुर्जर समाज के 50 हजार से अधिक वोटर हैं। दूसरे नंबर पर अनुसूचित जाति और फिर सवर्ण समाज के वोट हैं।
क्षेत्र के लोगों में नाराजगी है कि विष्णु खत्री बैरसिया के विधायक हैं, लेकिन रहते भोपाल में हैं। लोग अपनी समस्याएं उन्हें नहीं बता पाते। उन्होंने 2013 कई वादे किए थे, लेकिन अधिकांश पूरे नहीं हुए। चुनाव के बाद कई क्षेत्रों में वे गए ही नहीं हैं। सडक़ें बदहाल हैं, लो-फ्लोर बसें भी बैरसिया तक नहीं आ पाई हैं, स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई हुई हैं, डिलेवरी तक के लिए भोपाल जाना पड़ता है।
भोपाल मध्य विधानसभा सीट
भोपाल मध्य विधान सीट पर बीजेपी से सुरेंद्र नाथ सिंह प्रत्याशी हैं तो वहीँ कांग्रेस से आरिफ मसूद प्रत्याशी हैं। 2013 में भी आरिफ मसूद सुरेंद्र नाथ के विरुद्ध खड़े हुए थे। सुरेंद्र नाथ सिंह ने 70,696 के साथ आरिफ मसूद (63715 वोट ) को 6,891 वोटों से हराया था। भाजपा ने सुरेंद्र नाथ सिंह को फिर उम्मीदवार बनाया है और कांग्रेस ने भी आरिफ मसूद को भी दोबारा टिकट दिया है। यहाँ कुल वोटर 234426 हैं, जिनमे पुरुष वोटर 122265 और महिला वोटर 111965 हैं।
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