
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ‘माय गंगा-माय डॉल्फिन’ अभियान को हरी झंडी दे दी है। इस योजना के तहत गंगा में मौजूद डॉल्फिन के संरक्षण पर काम किया जाएगा। इसके साथ ही जैव-विविधता आधारित ईको-टूरिज्म को प्रोत्साहित करने के लिए ‘गांगेय डॉल्फिन जलज सफारी’ अभियान भी शुरू किया गया है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार बिजनौर से ‘माय गंगा-माय डॉल्फिन’ अभियान का शुभारंभ किया गया है। इस अभियान के तहत बिजनौर से नरौरा तक कुल 250 किलोमीटर के दायरे में डॉल्फिन की गणना की जाएगी। एक अन्य कार्यक्रम में एनएमसीजी महानिदेशक राजीव रंजन मिश्रा द्वारा 6 स्थानों बिजनौर, बृजघाट, प्रयागराज, वाराणसी, भागलपुर और पश्चिम बंगाल के बैंडल में ‘गांगेय डॉल्फिन जलज सफारी’ अभियान का ऑनलाइन शुभारंभ किया गया। इस मौके पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने वीडियो संदेश में जानकारी दी कि हाल के वर्षों में नमामि गंगे मिशन के प्रयासों के कारण गंगा नदी में डॉल्फिन की संख्या में संतोषजनक बढ़ोतरी हुई है। खासकर बिजनौर से लेकर नरौरा के इलाके में गंगा नदी में डॉल्फिन की गतिविधियां फिर से बढ़ी हैं। इसलिए गंगा नदी में जैव विविधता को प्रोत्साहित करने केलिए डॉल्फिन संरक्षण अभियान शुरु किया गया है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के निदेशक राजीव रंजन मिश्रा ने कहा कि इस अभियान इसकी सहायता से लोगों को गंगा की जैव विविधता और जलीय पशुओं के संरक्षण के महत्व के बारे में पता चलेगा। उन्होने बताया गांगेय डॉल्फिन जलज सफारी के ईको टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा साथ ही स्थानीय समुदाय की आजीविका में भी बढ़ोतरी होगी। उन्होंने कहा इन सभी सफारी केन्द्रों पर गंगा प्रहरियों को जैव-विविधता आधारित ईको-टूरिज्म में प्रशिक्षित किया गया है। ये प्रहरी पर्यटकों को सफारी के दौरान डॉल्फिन और जैव-विविधता से जुड़ी जानकारी देंगे।
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