
चंडीगढ़। पंजाब अब अंधेरे में डूबने की कगार पर पहुंच गया है, क्योंकि केंद्र सरकार के खेती कानूनों के खिलाफ किसान रेलवे ट्रैक पर बैठे हुए हैं और 'रेल रोको' आंदोलन के कारण 5 थर्मल प्लांट्स को कोयला नहीं पहुंच रहा है।
पंजाब राज्य बिजली निगम लिमिटेड के प्रधान और प्रबंध निर्देशक वेनू प्रसाद ने कहा कि कोयले की कमी से 5 में से 2 थर्मल पलांट बंद होने की कगार पर हैं, जबकि 3 थर्मल प्लांट्स में सिर्फ 2 से 3 दिनों का कोयला बचा है।
14 अक्तूबर को किसानों और केंद्र सरकार की मीटिंग में कोई हल नहीं निकला तो ब्लैक आउट के हालात बन सकते हैं। राज्य सरकार के सामने घरेलू खपतकारों, कमर्शियल और कृषि सेक्टर को बिजली दे सकना चुनौती बन सकता है, हालांकि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह किसानों को मालगाड़ियां को जाने देने की अपील कर चुके हैं, लेकिन किसान संगठनों ने कोई फ़ैसला नहीं किया है।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार की तरफ से नए खेती कानूनों के विरोध में पंजाब की 31 किसान यूनियनों ने आर -पार की लड़ाई का ऐलान करते आंदोलन शुरू किया हुआ है। किसान आंदोलन के मद्देनज़र रेलवे बोर्ड ने 24 सितंबर से रेल गाड़ियां की आवाजाई को रोक दिया था।
किसान मज़दूर संघर्ष तालमेल समिति ने फिरोजपुर और अमृतसर जिले में 24 सितंबर से रेलवे लाइनों पर धरना शुरू कर दिया था, जबकि बाकी किसान संगठनों ने 1 अक्तूबर से पंजाब भर के रेलवे ट्रैक पर अनिश्चित समय के लिए डेरा लगाया हुआ है।
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