
नई दिल्ली। महिलाओं के खिलाफ बढ़ते आपराधिक मामलों को देखते हुए गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी है। गृह मंत्रालय ने महिला अपराध के मामलों में पुलिस की प्रभावपूर्ण कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। गृहमंत्रालय ने ऐसे मामलों में सही तरीके से काम करने और लापरवाही न बरतने का निर्देश दिया है।
उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान व कुछ अन्य राज्यों में महिलाओं के खिलाफ हाल ही में घटी अनेक घटनाओं के बाद केंद्रीय गृहमंत्रालय ने यह निर्देश जारी किया है। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार की तरफ से राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के समय सयम पर महिला अपराधों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए जाते हैं। दुष्कर्म के मामलों में जल्द एफआइआर दर्ज करने, सबूत जुटाने और समय पर फॉरेंसिक जांच करने का निर्देश है।
मंत्रालय ने कहा है कि महिला के खिलाफ अपराध यदि थाने के अधिकार क्षेत्र के बाहर हुआ है तो उस स्थिति में जीरो एफआइआर दर्ज की जाए। दिशा-निर्देशों में साफ कहा गया है कि अगर महिलाओं के खिलाफ अपराधों में अगर कोई चूक होती है तो मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। भारतीय दंड संहिता की धारा 166 (ए) एफआईआर दर्ज न करने की स्थिति में पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की इजाज़त देता है। सीआरपीसी की धारा 173 के तहत दुष्कर्म के मामले में 2 महीने के भीतर जांच पूरी करना ज़रूरी है।
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