
नई दिल्ली। खुफिया एजेंसी रॉ के पूर्व प्रमुख विक्रम सूद ने चीन की टेलिकॉम कंपनी हुवावेई को भारत में क्रिटिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में काम करने की अनुमति नहीं देने की हिमायत की है। उन्होंने कहा कि इस कंपनी को भारत में संवेदनशील क्षेत्रों में काम करने की अनुमति देने में कई तरह के जोखिम हैं। हुवावेई के पीछे चीन की सरकार का हाथ है।
सूद ने यह बात ऐसे समय पर कही है, जबकि सरकार ने अभी तक रेडियोवेव्स के आवंटन के बारे में फैसला नहीं लिया है, जबकि टेलिकॉम ऑपरेटर 5जी का ट्रायल शुरू करने के लिए स्पेक्ट्रम के वास्ते आवेदन कर चुके हैं। सूद ने अपनी किताब द अल्टीमेट गोल, ए फार्मर रा चीफ डिकंस्ट्रक्ट हाऊ नेशंस कंस्ट्रक्ट नैरेटिवज में लिखा है कि हुवावेई खुद इंडिपेंडेंट कंपनी होने का दावा करती है, लेकिन इस क्षेत्र की जानकारी रखने वाला हर व्यक्ति जानता है कि इसमें सच्चाई नहीं है। चीन सरकार ने हुआवेई को फाइनेंस किया है और अमेरिका में इंटेलेक्चुअल प्रोपर्टी की चोरी में इसकी अहम भूमिका निभाई थी।
उन्होंने कहा कोविड-19 संकट के बाद चीन के जिम्मेदार देश होने के बारे में दुनिया की धारणा बदल गई है और इससे चीन के कॉरपोरेट हितों को भी नुकसान होगा। हुआवेई की 5जी मोबाइल टेक्नोलॉजी को बेचने के चीन के प्रयासों पर भी असर होगा। सूद ने कहा भारत के बारे में चीन की सोच ठीक नहीं है। यही वजह है कि भारत को हुवावेई से दूर रहना चाहिए, क्योंकि इससे देश के राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंच सकता है।
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