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अपनी ही बात से पलटे मलैया, पहले बोले प्रदेश क़र्ज़ में, बाद में बोले वित्तीय हालत बिलकुल ठीक
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अपनी ही बात से पलटे मलैया, पहले बोले प्रदेश क़र्ज़ में, बाद में बोले वित्तीय हालत बिलकुल ठीक

भोपाल, 19 दिसंबर, न्यूज़ मंच, कांग्रेस ने मध्यप्रदेश में सरकार बनने के बाद 10 दिनों के अंदर किसानों की कर्जमाफी का वादा किया था। इस कर्जमाफी की घोषणा को प्रदेश के वित्तमंत्री रहे जयंत मलैया ने चार दिन पहले प्रदेश के लिए आर्थिक संकट बताया था।

कांग्रेस ने जैसा खज़ाना सौंपा, वैसा ही लौटाया 
उन्होंने कहा था कि, कांग्रेस ने 15 साल पहले हमें जिस हालत में मध्य प्रदेश का खजाना सौंपा था, हमने उन्हें वैसा ही लौटाया है। उन्होंने कहा था, "मप्र पर राष्ट्रीयकृत बैंकों का 34 से 36 हजार करोड़ रुपए का कर्ज बाकी है। सब कुछ मिलाकर देखा जाए तो मप्र एक लाख 65 हजार करोड़ रुपए के कर्ज में है और करीब दो हजार करोड़ रुपए का ओवर ड्रॉफ्ट है।"

कर्जमाफी से प्रदेश आर्थिक संकट में फंस जाएगा
मलैया ने यह भी कहा था, "किसानों की कर्जमाफी की गई तो प्रदेश आर्थिक संकट में फंस जाएगा। इस कदम से प्रदेश के खजाने की स्थिति गंभीर हो जाएगी। वेतन के लाले पड़ जाएंगे। यदि कर्जमाफी होती है तो विकास के सारे काम बंद हो जाएंगे।"

सरकार बनते ही कांग्रेस ने किसानो के क़र्ज़ माफ़ करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपनी पहली प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि मुझे ख़ुशी है कि बीजेपी मान रही है कि वह खजाना खाली करके गई है। 

प्रदेश पर एक लाख 60 हजार करोड़ का कर्ज 
कमलनाथ के उस बयान पर बीजेपी की ओर से मलैया ने जवाब दिया है। उन्होंने कहा , "हमने जो भी उधार लिया है, वह राजकोषीय जवाबदेही और बजट प्रबंधन अधिनियम (एफआरबीएम ऐक्ट) के तहत है। यह धन हमने बुनियादी विकास पर ही खर्च किया है। वर्ष 2017-18 में प्रदेश पर शुद्ध कर्ज 1.60 लाख करोड़ रुपये का था, जोकि राज्य के सकल घरेलू उत्पाद की सीमा 25 प्रतिशत से कम होकर 22.22 प्रतिशत था जबकि कांग्रेस शासन काल के जमाने में यह कर्ज 33.40 प्रतिशत था, जोकि सामान्य से अधिक उधार था।"

जयंत मलैया ने अपना बयान बदला

"इसके साथ ही मलैया ने दावा किया कि बीजेपी सरकार के के दौरान 15 साल में प्रदेश में एक बार भी ओवरड्रॉफ्ट नहीं हुआ। प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि चुनाव के एक दिन पहले अर्थात 27 नवंबर को हमने कोषालय में 3000 करोड़ रुपये छोड़े हैं।"

उन्होंने अपने बयान के बचाव में यह भी कहा, "भाजपा सरकार में मध्य प्रदेश की वित्तीय हालत बिलकुल ठीक है। इस साल सरकार ने 12 हजार 500 करोड़ का लोन लिया है। जहां तक किसानों की कर्जमाफी का सवाल है तो कांग्रेस की मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सरकारें राहुल गांधी के डर से किसानों के कर्ज माफ कर रही हैं। राहुल गांधी ने कहा था कि किसानों का कर्ज माफ नहीं हुआ तो 10 दिन में मुख्यमंत्री हटा दूंगा।"

मलैया ने मंगलवार को कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने घोषणा की थी कि "जिस मुख्यमंत्री ने 10 दिन के अंदर किसानों का कर्ज माफी नहीं की, वह उसे 11 वें दिन हटा देगें’ और अब सब लोग इसी डर के कारण बिना किसी तैयारी के किसानों का कर्ज माफ कर रहे हैं।"

एमपी में 7 बार के विधायक और शिवराज के वित्त मंत्री रहे मलैया

पिछले 28 साल से वित्त मंत्री जयंत मलैया का दमोह सीट पर कब्जा था।  लेकिन 2018 के विधान सभा चुनाव में पूर्व सांसद और वरिष्ठ बीजेपी नेता डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया(बाबा) के बागी हो जाने से यह सीट फंस गई थी। 2013 के चुनाव में भी जयंत मलैया सिर्फ 4953 वोटों से जीते थे, तो इस तरह की अंतर कलह का फायदा कांग्रेस को मिलना ही था।
 कांग्रेस प्रत्याशी राहुल सिंह के नामांकन फॉर्म पर मलैया ने 16 आपत्तियां लगाईं थीं, जिसे लेकर विरोधियों ने कहा कि मलैया कहीं घबरा तो नहीं रहे। इतनी उठा पटक करने के बाद भी आखिरकार जयंत मलैया  दमोह सीट पर 78,199 वोट पाकर भी मात्र 798 वोटों से कांग्रेस के राहुल सिंह (78,997 वोट) से हार गए। बीजेपी के बागी नेता डॉ. राकमृष्ण कुस्मारिया को 1133 वोट मिले, और बीजेपी के अंदर अंतरकलह ही मलैया की हार का कारण बानी। 

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