
भोपाल, 12 दिसंबर, न्यूज़ मंच , कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ मध्य प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से मिल लिए हैं और उन्होंने 121 विधायकों के समर्थन की लिस्ट राज्यपाल को सौंपी है। इस दौरान दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, दीपक बावरिया सहित कांग्रेस के अन्य नेता मौजूद रहे।
उधर, शिवराज सिंह चौहान ने भी अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया है। तो अब कांग्रेस का रास्ता साफ़ हो गया है और मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार ही बन रही है।
राज्यपाल से मिलने के बाद कमलनाथ एक शिष्टाचार मीटिंग के तहत मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान से उनके आवास पर मिले।
बहुमत साबित करने के बाद, अब मध्य प्रदेश में यह तय होना है कि यहाँ मुख्य मंत्री कौन बनेगा। इसपर प्रदेश के कांग्रेस विधायक दो खेमे में बंटे हुए हैं। एक तरफ कमलनाथ के समर्थक हैं , जो एक सधे हुए अनुभवी नेता को सपोर्ट कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ ज्योतिरादित्य के समर्थक हैं, जो एक उभरते हुए युवा नेता के साथ खड़े हैं। यह भी माना जाता है की ज्योतिरादित्य राहुल गाँधी के चहेते भी हैं।
दरअसल, चुनाव प्रचार के दौरान यह देखा गया कि बुंदेलखंड और मालवा-निमाड़ बेल्ट में ज़्यादा प्रभाव कमलनाथ का है, और ग्वालियर - चम्बल क्षेत्र में ज्योतिरादित्य सिंधिया का। यही कारण था कि पार्टी ने चुनावी रणनीति के तहत मुख्य मंत्री के चेहरे का नाम घोषित नहीं किया था। और यह चुनावोपरांत ही तय करने का निर्णय लिया गया की मुख्य मंत्री कौन बनेगा।
चुनाव कमलनाथ और ज्योतिरादित्य, दोनों के चेहरों को सामने रख कर लड़े गए। फलस्वरूप, यह रणनीति कारगर साबित हुई और कांग्रेस मध्य प्रदेश में 114 सीट जीतने में सफल हुई। अब कांग्रेस के द्वारा किये गए किसानो की कर्जमाफी और बेरोज़गारी जैसे बड़े वादों को पूरा करने के वाला चेहरा कौनसा होगा, यह राज़ कुछ ही समय में खुलेगा।
अभी पार्टी हाई कमान और विधायकों से बातचीत की जा रही है, और गठबंधन में महारथी कांग्रेस पार्टी की हाई कमान से सभी को उम्मीद है, कि वो इस मुद्दे को जल्द ही हल कर कर लेंगे और आज शाम तक निर्णय सामन आ जायेगा।
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