
अशोकनगर. नीरज जैन "पैय्यन"/गजेंद्र लोधी, न्यूज मंच, अशोकनगर में भारतीय जनता पार्टी में छिड़ा अंदरूनी घमासान कांग्रेसी सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को फायदा पहुँचाता नजर आ रहा है। दरअसल अशोकनगर में कांग्रेस की हार-जीत से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की साख जुड़ी हुई है। ऐसे में अगर अशोकनगर भाजपा के नेता अपनी ही पार्टी के खिलाफ बगावती रुख अख्तियार करते हैं, तो उसका सीधा फायदा ज्योतिरादित्य सिंधिया और कांग्रेस को होगा।
अशोकनगर जिले में यूं तो भाजपा के कई नेता है, जो अंदरूनी तौर पर बीजेपी को नुकसान पहुचाएंगे, लेकिन भाजपा के खिलाफ खुले तौर पर बगावत का झण्डा बुलंद करने वाले चार नेता सीधे तौर पर सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को खुला फायदा पहुचाएंगे। इनमें पहला नाम है पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मलकीत सिंह संधू का, फिर नाम आता है जिला पंचायत अध्यक्ष बाई साहब यादव का, तीसरा नाम है पूर्व विधायक जगन्नाथ सिंह रघुवंशी का और चौथा नाम है पूर्व विधायक राव राजकुमार सिंह यादव "महुअन" का।
अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं में गहरा प्रभाव रखने वाले यह चारों नेता मुंगावली और चंदेरी विधानसभा से भाजपा द्वारा कांग्रेसी नेताओं को अपना उम्मीदवार बनाए जाने से बेहद नाराज हैं। इनके साथ बीजेपी के ऐसे कार्यकर्ताओं की लंबी-चौड़ी फौज है, जो भाजपा के मौजूदा प्रत्यशियों के खिलाफ उस समय तगड़ा संघर्ष करते थे, जब वे बीजेपी के मौजूदा प्रत्याशी कांग्रेस में रहकर भाजपा का विरोध करते थे।
आइए जानते हैं इन नेताओं का कितना है प्रभाव और ये सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए कैसे रहेंगे फायदेमंद :
1. मलकीत सिंह संधू

जिले भर में चलते-फिरते एम्बुलेंस के नाम से प्रसिद्ध पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मलकीत सिंह संधू की जिले भर में निचले तबके के मतदाताओं में मजबूत पकड़ है। मलकीत सिंह पिछले दो विधानसभा चुनावों के समय से ही मुंगावली से भाजपा का टिकिट पाने दावेदारी कर रहे हैं। इसलिए उन्होंने मूंगावली विधानसभा क्षेत्र में कड़ी मेहनत की है। मुंगावली विधानसभा क्षेत्र के हजारों मतदाताओं से उनका प्रत्यक्ष जुड़ाव है, वहीं हर व्यक्ति के सुख-दुख में साथ निभाने वाली छवि इन्हें जिले के एक बड़े नेता के तौर पर स्थापित करती है। आज (रविवार) मलकीत ने खुले शब्दों में एलान कर दिया है कि वह मुंगावली-चंदेरी में कांग्रेस नेताओं को भाजपा से टिकिट दिए जाने के विरोध में हैं और अब वह मुंगावली से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ेंगे। ऐसे में संभावना जताई जा रही है मलकीत बड़े पैमाने पर भाजपा के वोटों का ही नुकसान करेंगे, जिसका फायदा कंग्रेस यानी ज्योतिरादित्य सिंधिया को होगा।
2. बाई साहब यादव-

जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती बाई साहब यादव का स्वतंत्र तौर पर कोई राजनैतिक अस्तित्व नहीं है, लेकिन इनकी पहचान जिले के कद्दावर नेता पूर्व विधायक स्वर्गीय राव देशराज सिंह यादव की पत्नी के तौर पर होती है। मध्यप्रदेश भर में "राव सहाब" के नाम से लोकप्रिय देशराज सिंह यादव की पूरे इलाके में तूती बोलती थी, उनके राजनैतिक और सामाजिक प्रभाव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वे क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को सीधी चुनौती देते थे। उन्होंने सिंधिया के खिलाफ लोकसभा चुनाव भी लड़ा था। वे मुंगावली विधानसभा से तीन बार विधायक निर्वाचित हुए थे। उनके परिजनों में उनकी पत्नी बाई साहब यादव जिला पंचायत अध्यक्ष हैं, तो उनके छोटे बेटे अजय सिंह यादव अशोकनगर कृषि उपज मंडी के अध्यक्ष हैं। इसके अलावा उनके बड़े बेटे यादवेंद्र सिंह यादव जिला पंचायत के उपाध्यक्ष रह चुके हैं, वहीं उनके भतीजे रामराजा सिंह यादव जनपद पंचायत के अध्यक्ष रह चुके हैं। करीब 8 महीने पहले मुंगावली उप-चुनाव में बाई साहब यादव महज तीन हजार वोटों से चुनाव हारीं थीं। यादव मतदाता बाहुल्य वाले मुंगावली विधानसभा क्षेत्र में राव साहब की गहरी पैठ थी। वे यादव समाज के बड़े नेता के तौर पर स्थापित थे। उनके परिजनों को राव साहब की उपलब्धियां विरासत के तौर पर मिली हैं, हालांकि देशराज सिंह के निधन के बाद उनके परिजनों का उतना प्रभाव मुंगावली के मतदाताओं में नहीं रहा, जितना कि खुद देशराज सिंह यादव का था। इनके बड़े बेटे यादवेंद्र सिंह खुले तौर पर अपने समर्थकों के साथ भोपाल भाजपा मुख्यालय पर बीजेपी के मौजूदा प्रत्याशी का विरोध कर चुके हैं। ऐसे हालातों में अगर राव साहब के परिजनों ने मुंगावली के चुनावी मैदान में अपनी दावेदारी ठोकी, तो निश्चित तौर पर बीजेपी को नुकसान और सिंधिया की कांग्रेस को फायदा होगा।
3.जगन्नाथ सिंह रघुवंशी

पूर्व विधायक जगन्नाथ सिंह रघुवंशी को चंदेरी से भाजपा का टिकिट मिलना लगभग तय माना जा रहा था, लेकिन भाजपा ने ऐन वक्त पर कांग्रेस से आए भूपेंद्र द्विवेदी को अपना प्रत्याशी बना दिया। जिससे जगन्नाथ सिंह रघुवंशी भाजपा से नाराज हैं। जिले की अशोकनगर एवं चंदेरी विधानसभा क्षेत्र में रघुवंशी समाज से जुड़े मतदाता बड़ी संख्या में हैं। भाजपा द्वारा अपनी जाति से जुड़े किसी भी नेता को टिकिट नहीं दिए जाने से रघुवंशी समाज में बीजेपी के प्रति नाराजगी है। बीते दिनों ईसागढ़ के एक निजी स्कूल में रघुवंशी समाज की अगुआई में एक सर्व समाज की बैठक बुलाई गई। इस बैठक में पूर्व विधायक जगन्नाथ सिंह रघुवंशी, पूर्व विधायक राव राजकुमार सिंह "महुअन" समेत लोधी, गुर्जर, सोनी, यादव समाज के प्रभावशाली व्यक्तियों के अलावा भाजपा के चंदेरी मंडल के पदाधिकारी मौजूद थे। इस बैठक में सर्वसम्मति से तय हुआ कि जगगन्नाथ सिंह रघुवंशी अथवा राव राजकुमार सिंह "महुअन" दोनों में से ही कोई एक चंदेरी विधानसभा से चुनावी मैदान में उतरेगा, और अन्य सभी उसका खुलकर सपोर्ट करेंगे। अब अगर जगन्नाथ सिंह रघुवंशी चन्देरी से चुनावी मैदान में उतरते हैं, तो यह तय है कि रघुवंशी समाज से जुड़े अधिकतर वोट उन्हें ही मिलेंगे, ऐसे में भाजपा का नुकसान और सिंधिया की कांग्रेस को फायदा होगा।
4. राव राजकुमार सिंह यादव'महुअन'

पूर्व विधायक रहे राजकुमार सिंह यादव चंदेरी विधानसभा से भाजपा का टिकिट पाने दावेदारी कर रहे थे, लेकिन भाजपा ने महज चार दिन पहले पार्टी की सदस्यता लेने वाले सिंधिया के बेहद नजदीकी लोगों में शुमार रहे भूपेन्द्र द्विवेदी को अपना उम्मीदवार बना दिया। चंदेरी विधानसभा में यादव, रघुवंशी, लोधी और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के मतदाता ज्यादा बड़ी संख्या में हैं। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि यादव समाज राजकुमार सिंह महुअन के समर्थन में वोट करेगा और इस तरह राजकुमार सिंह भी भाजपा के वोटों में ही सेंध लगाएंगे। अगर भाजपा के वोटों में सेंध लगेगी तो यहां भी फायदा सिंधिया और कांग्रेस को ही होगा।
Leave Comments