
शिलांग, 31 दिसंबर, न्यूज़ मंच, मेघालय के ईस्ट जयंतियां हिल्स की कोयला खदान में फंसे 15 मजदूरों का 18 वें दिन भी कोई पता नहीं चल सका है। भारतीय नौसेना और एनडीआरएफ के गोताखोरों ने रविवार को पांच घंटे तक साढ़े तीन सौ फुट गहरी खदान में लगभग 70 फीट नीचे तक उतर कर तलाशी अभियान चलाया। मजदूरों का कोई सुराग नहीं लगा। बचाव अभियान का संचालन करने वाले अधिकारियों ने बताया कि खान में पानी बहुत ठंडा है। जिसकी वजह से ज्यादा गहराई में जा पाना संभव नहीं है। खदान में अचानक नदी का पानी भर जाने से ये मजदूर बीते 13 दिसंबर से कोयला खान के भीतर फंसे हुए हैं।
छह गोताखोर खदान में उतरे
छह गोताखोरों की एक टीम दोपहर बाद दो बजे खदान में उतरी। उन्होंने खदान में पानी के स्तर और उसकी गहराई का जायजा लिया। एनडीआरएफ के सहायक कमांडेंट संतोष कुमार सिंह ने बताया कि इस दौरान गोताखोरों को भीतर मजदूरों की मौजूदगी का कोई निशान नहीं मिला। उन्होंने बताया कि तलाशी अभियान सोमवार को भी जारी रहेगा।
नदी से पानी आने की थ्योरी खारिज
पहले कहा जा रहा था कि बगल से बहने वाली लीटन नदी का पानी अचानक घुसने की वजह से ही मजदूर वहां फंस गए थे, लेकिन खनन विशेषज्ञ जसवंत सिंह गिल ने इस थ्योरी को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि नदी का जल स्तर खदान की गहराई से नीचे है। गिल का दावा है कि पास की किसी बंद पड़ी खदान से ही पानी इस खदान में घुसा है। इसे निकालने में कई दिनों का समय लग सकता है।
100 फीट तक जा सकते हैं नौसेना के गोताखोर
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), नौसेना, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और कोल इंडिया की मदद से बचाव अभियान में लगा है। जिले के पुलिस अधीक्षक ने कहा कि नौसेना के गोताखोरों ने बताया है कि उनके पास खदान में 100 फुट अंदर तक जाने की क्षमता है जबकि एनडीआरएफ के गोताखोर 30 फुट अंदर तक जा सकते हैं।
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