
नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ पिछले पांच महीने से जारी एलएसी विवाद के बीच भारतीय वायुसेना अपनी मारक क्षमता को लगातार मजबूत बनाने में जुटी हुई है। रक्षामंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार भारत दिसंबर में रूस से 21 उन्नत मिग-29 लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए आर्डर दे सकता है। रक्षामंत्रालय सूत्रों के अनुसार इस संबंध में रूस के साथ बातचीत हो चुकी है। चीन से तनाव को देखते हुए रूस मिग-29 विमान उचित कीमत पर भारत को देने पर राजी हो गया है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार आर्डर से जुड़ी तमाम औपचारिकताएं जल्दी ही पूरी कर ली जाएंगी। उन्होंने बताया कि पहले मिग-29 विमानों का आर्डर दिया जाएगा और उसके बाद 12 सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों से जुड़ी हुई प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाने की योजना है।
रूस के तकनीकी सहयोग से एचएएल करेगा उत्पादन
सुखोई विमानों का उत्पादन रूस के तकनीकी सहयोग से हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) में किया जाएगा। इसके अलावा 83 एलसीए तेजस मार्क1ए की खरीद को लेकर भी वायुसेना में विचार-विमर्श किया जा रहा है। एडवांस मल्टीरोल कॉम्बेट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) को लेकर भी विचार किया जा रहा है। 2027 तक इसके परवान चढ़ने की संभावना है। गौरतलब है कि वायुसेना के लड़ाकू विमानों का बेड़ा लगातार घटता जा रहा है। वर्तमान में चीन और पाकिस्तान सीमा से मिल रही चुनौती के बीच वायुसेना को लड़ाकू विमानों की कुल 42 स्क्वॉड्रन की जरूरत है। जबकि उसके पास अभी केवल 32 स्क्वॉड्रन ही मौजूद हैं। इनमें से भी मिग-21 जैसे कई विमान अपना सेवाकाल पूरा कर चुके हैं।
राजनाथ ने की थी अपग्रेटेड मिग-29 की मांग
दरअसल एलएसी तनाव के बीच भारत की युद्धक क्षमताओं को चाक-चौबंद रखने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बीते कुछ महीनों के दौरान लगातार रूस कई यात्राओं के दौरान आपात परिस्थितियों से मुकाबले के लिए मिग-29 और सुखोई जैसे युद्धक विमानों की जल्द आपूर्ति करने का रूस की सरकार से अपील की था। दोनों देशों के बीच हुई सहमति के आधार पर दिसंबर तक मिग-29 विमानों का आर्डर दिए जाने के बाद रूस जल्द से जल्द इनकी आपूर्ति शुरु कर देगा। मिग-29 वर्ष 1980 के दशक के पुराने विमानों में से एक हैं, जिनका उत्पादन फिलहाल नहीं होता है।
दस सालों में वायुसेना में होंगे 37 स्क्वॉड्रन
वायुसेना प्रमुख एयरचीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने अपनी हालिया वार्षिक प्रेस कांफ्रेंस में कहा है कि सामरिक खरीद से जुड़ी तमाम योजनाएं सख्त समयसीमा के साथ आगे बढ़ाई जा रही हैं। अगले एक दशक के दौरान वायुसेना के लड़ाकू विमानों के बेड़े की क्षमता 36 से 37 स्क्वॉड्रन तक पहुंच सकती है। बजट से जुड़ी हुई चुनौती हमारे समक्ष है, लेकिन इसका वायुसेना पर तब तक कोई प्रभाव नहीं पड़ता, जब हमारे सामने खरीद को लेकर योजना और प्रोडेक्ट को लेकर विचार बिलकुल स्पष्ट होते हैं।
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